हाथरस : गंगचौली में दूर-दूर तक सुनी गई धमाके की आवाज

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Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 24 Feb 2021 12:11 AM IST
हाथरस : सिलिंडर फटने से हुए धमाके से धराशाई हुई मकान की छत।
हाथरस : सिलिंडर फटने से हुए धमाके से धराशाई हुई मकान की छत। - फोटो : HATHRAS

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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गांव गंगचौली में गैस सिलिंडर इतनी तेज आवाज से फटा कि इसकी आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी। एकबारगी तो ग्रामीणों को कुछ समझ में ही नहीं आया, लेकिन जब ग्रामीणों ने मलबे में दबे बसंतलाल और उसके बच्चों की चीख-पुकार सुनी तो आनन-फानन उन्हें मलबे से निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां भी देर रात तक कोहराम मचा रहा। मेहनत-मजदूरी करने वाले बसंतलाल का एक कमरे का मकान इस हादसे में मलबे में तब्दील हो गया।
गांव का बसंतलाल मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का जीवन-यापन करता है। गांव में एक ही कमरे में ही व और उसका पूरा परिवार रहता था। मंगलवार की देर शाम जब उसके घर में गैस सिलिंडर फटा तो मकान की छत फट गई गई और पूरा मकान मलबे में तब्दील हो गया। उनके मकान के निकट ही एक और मकान की टिनशेड भी उड़ गई। निकट ही मौजूद कुछ ग्रामीणों ने उसके मकान की छत के ऊपर से एक आग का गोला जाता देखा।

गांव के बाहर तक काफी तेज आवाज ग्रामीणों ने सुनी। एकबारगी तो ग्रामीणों को यही समझ में आया कि आखिर हुआ क्या है, लेकिन जब ग्रामीणों ने मकान को ढहता देखा और बसंतलाल और उसके मासूम बच्चों की चीख-पुकार सुनी तो आनन-फानन ग्राम प्रधान गौरव प्रताप व अन्य ग्रामीणों ने इन्हें मलबे से निकलवाकर इसकी सूचना पुलिस व प्रशासन को दी।
गांव में एंबुलेंस पहुंची और इन घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया। वहां इनका उपचार शुरू किया गया। वहीं काफी ग्रामीण भी अस्पताल पहुंच गए। जब बसंतलाल की पत्नी लता को मृत घोषित कर दिया गया तो वहां कोहराम मच गया। पुलिस भी वहां पहुंच गई। आग में झुलसे मासूम बच्चों को रोता बिलखता देख व उनकी मां की मौत की जानकारी पाकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
घायल बच्चों को रेफर करने पर हुआ हंगामा
हाथरस। जिला अस्पताल में इस घटना के बाद स्थिति हंगामेदार हो गई। इसकी वजह यह थी कि अस्पताल से चिकित्सक इन बच्चों को रेफर कर रहे थे, जबकि ग्रामीणों का कहना था कि बच्चे की मां मर गई है और पिता घायल है। ऐसे में बच्चों का यहीं उपचार कराया जाए। इन्हें रेफर न किया जाए। इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सक का कहना था कि यहां बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है और बच्चों की हालत बिगड़ सकती है।

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