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हाथरस : घर की कुर्की होने पर भी नहीं छोड़ा देश को आजाद कराने का इरादा

Thu, 11 Aug 2022 11:00 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 11 Aug 2022 11:00 PM IST
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Hathras: Even after the attachment of the house did not leave the intention to liberate the country
हाथरस : स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. ज्वाला प्रसाद रावत। फाइल फोटो - फोटो : SHAPHU
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ (हाथरस)
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देश को स्वतंत्र कराने का जज्बा ऐसा कि घर पर कुर्की की कार्रवाई होने के बावजूद कभी इरादा नहीं बदला। अंग्रेजी हुकूमत के सामने कभी घुटने न टेकने वाले गांव सिखरा निवासी पंडित ज्वाला प्रसाद रावत उर्फ भगवत प्रसाद रावत की गिनती ब्लॉक के सबसे युवा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी में होती थी।
उनके भतीजे गोविंद रावत बताते है कि घर में पूरी पाबंदी के बावजूद भी जानकारी मिलते ही वह अंग्रेजों के खिलाफ होने वाले आंदोलन में भाग लेने के लिए निकल जाते थे। चाहे चमरौला कांड हो या बरहन स्टेशन लूट कांड जानकारी मिलते ही घर वालों को चकमा देकर निकल जाते थे। उनको सर्वप्रथम सन 1930 नमक सत्याग्रह में तीन माह कठिन कारावास की सजा और 50 रुपये जुर्माना दिया।
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कई बार भारत छोड़ो आंदोलन में नजर बंद रहे। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह कई बार घर से भाग गए। इसके लिए उसके लिए उनके घर कई कुर्की भी हुई लेकिन उन्होंने देश को स्वतंत्र करवाने का अपना इरादा नहीं बदला। सन 1972 में आजादी की 25 वीं वर्षगांठ पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया। देश आजाद होने के बाद भी उन्होंने जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा, बेरोजगारों को नौकरी दिलाने, गरीब असहाय कन्याओं की शादी, राष्ट्रीय पर्वों पर बच्चों को पुरस्कृत करने जैसे कार्य किए। संवाद
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क्रांतिकारियों की प्रेरणा से नहीं किया विवाह
क्रांतिकारियों से प्रेरणा लेकर पं. ज्वाला प्रसाद रावत ने आजीवन शादी न करने और देश सेवा करने का फैसला लिया। पं. ज्वाला प्रसाद दो भाई थे। बड़े भाई पं. हरिप्रसाद रावत उर्फ उड़िया बाबा की मृत्यु के बाद परिवार का भार उन्होंने ही संभाला। बड़े भाई के परिवार को संभालने के साथ साथ स्वतंत्रता आंदोलनों से भी जुड़े रहे। उनके परिवार वालों को आज तक कोई सरकारी (स्वतंत्रता सेनानी) सुविधा नहीं मिली। छह जनवरी 1976 को गले में कैंसर की वजह से उनका निधन हो गया।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की समाधि के लिए नहीं है पक्का मार्ग
सहपऊ। क्षेत्र के सिखरा में उनकी समाधि स्थल उड़िया बाबा आश्रम, सिखरा- सादाबाद, खांड़ा मार्ग से मात्र 800 मीटर की दूरी पर है। यहां तक जाने के लिए कच्चा मार्ग है। इस मार्ग पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं जिसकी वजह से बरसात में काफी दिक्कत होती है। गांव में कई बार जनप्रतिनिधि आते रहते हैं लेकिन आज तक किसी ने इस मार्ग पर ध्यान नहीं दिया। परिवार एवं ग्रामीणों को उम्मीद थी कि आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर स्वतंत्रता सेनानी पंडित ज्वाला प्रसाद उर्फ भगवत प्रसाद रावत समाधि स्थल-उड़िया बाबा आश्रम तक 800 मीटर मार्ग को पक्का कराया जाए। संवाद
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