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हाथरस : 19 साल बाद भी शहीद के परिवार की किसी को सुध नहीं
Mon, 26 Jul 2021 12:22 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला, हाथरस।
अमर उजाला, हाथरस।
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 26 Jul 2021 12:22 AM IST
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हाथरस : जहूर खां की पत्नी पति की तस्वीर के साथ। संवाद
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कारगिल युद्ध के बाद ऑपरेशन रक्षक में शहीद हुए गांव मीतई निवासी जहूर खां के परिजनों की 19 साल बाद भी कोई सुध लेने वाला नहीं है। शहादत के इतने साल बाद भी प्रशासन की ओर से जहूर खां के परिजनों को मदद नहीं मिली है। यहां तक गांव में उनकी कब्र की देखभाल करने वाला भी कोई नहीं है। परिजनों को इस बात की टीस है। उनके बेटे का कहना है कि कब्र पर जाने वाले रास्ते को बालू आदि डालकर अवरुद्ध कर दिया गया है।
कारगिल विजय दिवस पर साल शहीदों को याद किया जाता है। कारगिल विजय दिवस के बाद जब ऑपरेशन रक्षक चला तो इसमें सेना चार ग्रेनेडियर में तैनात जहूर खां भी 17 अक्तूबर 2002 को शहीद हुए। वे गांव मीतई के रहने वाले थे, जबकि उनका परिवार वर्षों से मोहल्ला मधुगढ़ी इगलास अड्डा के निकट मोहल्ला नई दिल्ली में रह रहा है। जहूर अपने पीछे पत्नी हाजरा बेगम के साथ छह बच्चों को छोड़ गए हैं।
जहूर की शहादत के समय तमाम वादे किए गए, लेकिन अब तक उनके परिवार को कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। इस कारण जहूर खां के बच्चे गुरबत की जिंदगी जी रहे हैं। जहूर खा के बेटे आसिफ का कहना है कि आज तक प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली है। कब्र को भी अपने पैसों से पक्का कराया है। अब तक कब्र पर जाने वाले रास्ते पर बालू बदरफुट डालकर अवरुद्ध कर दिया गया है। इस कारण जाने में काफी परेशानी होती है।
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कारगिल युद्ध के बाद ऑपरेशन रक्षक में शहीद हुए गांव मीतई निवासी जहूर खां के परिजनों की 19 साल बाद भी कोई सुध लेने वाला नहीं है। शहादत के इतने साल बाद भी प्रशासन की ओर से जहूर खां के परिजनों को मदद नहीं मिली है। यहां तक गांव में उनकी कब्र की देखभाल करने वाला भी कोई नहीं है। परिजनों को इस बात की टीस है। उनके बेटे का कहना है कि कब्र पर जाने वाले रास्ते को बालू आदि डालकर अवरुद्ध कर दिया गया है।
कारगिल विजय दिवस पर साल शहीदों को याद किया जाता है। कारगिल विजय दिवस के बाद जब ऑपरेशन रक्षक चला तो इसमें सेना चार ग्रेनेडियर में तैनात जहूर खां भी 17 अक्तूबर 2002 को शहीद हुए। वे गांव मीतई के रहने वाले थे, जबकि उनका परिवार वर्षों से मोहल्ला मधुगढ़ी इगलास अड्डा के निकट मोहल्ला नई दिल्ली में रह रहा है। जहूर अपने पीछे पत्नी हाजरा बेगम के साथ छह बच्चों को छोड़ गए हैं।
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जहूर की शहादत के समय तमाम वादे किए गए, लेकिन अब तक उनके परिवार को कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। इस कारण जहूर खां के बच्चे गुरबत की जिंदगी जी रहे हैं। जहूर खा के बेटे आसिफ का कहना है कि आज तक प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली है। कब्र को भी अपने पैसों से पक्का कराया है। अब तक कब्र पर जाने वाले रास्ते पर बालू बदरफुट डालकर अवरुद्ध कर दिया गया है। इस कारण जाने में काफी परेशानी होती है।
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