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हाथरस: या तो मजदूरी दिलवा दे या फिर घर पहुंचवा दे प्रशासन
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हाथरस: सादाबाद के गांव कटैला का मजदूर परिवार।
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
क्षेत्र के गांव कटैला में बाहर से आया एक मजदूर का परिवार बेहद परेशान है। यह परिवार लॉकडाउन होने से पहले अपने क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक लोगों के साथ मजदूरी करने के लिए मुरसान आया था। कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन होने के बाद कुछ लोग पैदल पैदल ही अपने यहां वापस चले गए, लेकिन गांव कटैला में अभी एक मजदूर परिवार रुका हुआ है।
रामबाबू पुत्र रघुवीर निवासी गांव न्योरा थाना उसैत जिला बदायूं ने बताया कि वह गांव के करीब दो दर्जन से अधिक लोगों के साथ मुरसान क्षेत्र में मजदूरी के लिए पत्नी मीरा और दो बच्चों के साथ आया था। लॉकडाउन के चलते साथ आए अन्य लोग तो पैदल पैदल ही बदायूं के लिए निकल गए, लेकिन वह अपनी पत्नी व बच्चों के साथ पैदल जाने में असमर्थ था, जिसके चलते वह अपने गांव नहीं गया। रामबाबू ने बताया कि उसकी एक कटैला गांव में रिश्तेदारी है।
वह अभी तक उन्हीं के यहां पर परिवार के साथ रुका हुआ है। अब तक उसने मेहनत मजदूरी में कमाए पैसों से खर्च चला लिया, लेकिन अब वह घर चलाने में असमर्थ है। रिश्तेदार भी गरीब है। रामबाबू ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि प्रशासन उसके परिवार को गांव तक जाने की व्यवस्था करा दे या फिर उन्हें भोजन पानी व मजदूरी के लिए काम दिला दे, जिससे वह अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें।
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क्षेत्र के गांव कटैला में बाहर से आया एक मजदूर का परिवार बेहद परेशान है। यह परिवार लॉकडाउन होने से पहले अपने क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक लोगों के साथ मजदूरी करने के लिए मुरसान आया था। कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन होने के बाद कुछ लोग पैदल पैदल ही अपने यहां वापस चले गए, लेकिन गांव कटैला में अभी एक मजदूर परिवार रुका हुआ है।
रामबाबू पुत्र रघुवीर निवासी गांव न्योरा थाना उसैत जिला बदायूं ने बताया कि वह गांव के करीब दो दर्जन से अधिक लोगों के साथ मुरसान क्षेत्र में मजदूरी के लिए पत्नी मीरा और दो बच्चों के साथ आया था। लॉकडाउन के चलते साथ आए अन्य लोग तो पैदल पैदल ही बदायूं के लिए निकल गए, लेकिन वह अपनी पत्नी व बच्चों के साथ पैदल जाने में असमर्थ था, जिसके चलते वह अपने गांव नहीं गया। रामबाबू ने बताया कि उसकी एक कटैला गांव में रिश्तेदारी है।
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वह अभी तक उन्हीं के यहां पर परिवार के साथ रुका हुआ है। अब तक उसने मेहनत मजदूरी में कमाए पैसों से खर्च चला लिया, लेकिन अब वह घर चलाने में असमर्थ है। रिश्तेदार भी गरीब है। रामबाबू ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि प्रशासन उसके परिवार को गांव तक जाने की व्यवस्था करा दे या फिर उन्हें भोजन पानी व मजदूरी के लिए काम दिला दे, जिससे वह अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें।
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