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हाथरस : डॉ. निडर की पुस्तक चहकै बगिया, महकै फूल पुरस्कार के लिए चयनित
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डॉ. कर्णपाल सिंह निडर।
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव कैलोरा गांव के निवासी साहित्यकार डॉ. कर्ण पाल सिंह निडर को उ.प्र. हिंदी संस्थान ने उनकी ब्रजभाषा में लिखी पुस्तक चहकै बगिया, महकै फूल को रामशंकर शुक्ल रसल पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। इस पुरस्कार के लिए डॉ. निडर को 40 हजार रुपये की धनराशि व प्रशस्ति पत्र मिलेगा।
गांव कैलोरा के कृषक परिवार में जन्मे डॉ. निडर साहित्य के क्षेत्र में वर्षों से सेवा करते आ रहे है। डॉ. निडर दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। वह बताते हैं कि जब वह 19 वर्ष की अवस्था में थे तो ट्रेन की चपेट में आकर उनके दोनो पैर कट गए थे। तब से वह निरंतर समाजसेवा व साहित्य सेवा कर रहे हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में लहराया वीरान, जिस्म के दो टूंक, झरते आंसू, प्यार और संघर्ष, घटाओं के बादल, खौलता खून, टूटी आस, प्रेम सुधा, लहू के घूंट, चलता प्यार थिरकती किस्मत आदि प्रमुख हैं। उनकी पुस्तक के इस पुरस्कार के लिए चयनित होने पर उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा है। संवाद
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हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव कैलोरा गांव के निवासी साहित्यकार डॉ. कर्ण पाल सिंह निडर को उ.प्र. हिंदी संस्थान ने उनकी ब्रजभाषा में लिखी पुस्तक चहकै बगिया, महकै फूल को रामशंकर शुक्ल रसल पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। इस पुरस्कार के लिए डॉ. निडर को 40 हजार रुपये की धनराशि व प्रशस्ति पत्र मिलेगा।
गांव कैलोरा के कृषक परिवार में जन्मे डॉ. निडर साहित्य के क्षेत्र में वर्षों से सेवा करते आ रहे है। डॉ. निडर दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। वह बताते हैं कि जब वह 19 वर्ष की अवस्था में थे तो ट्रेन की चपेट में आकर उनके दोनो पैर कट गए थे। तब से वह निरंतर समाजसेवा व साहित्य सेवा कर रहे हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में लहराया वीरान, जिस्म के दो टूंक, झरते आंसू, प्यार और संघर्ष, घटाओं के बादल, खौलता खून, टूटी आस, प्रेम सुधा, लहू के घूंट, चलता प्यार थिरकती किस्मत आदि प्रमुख हैं। उनकी पुस्तक के इस पुरस्कार के लिए चयनित होने पर उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा है। संवाद
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