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हाथरस : राजा महेंद्र प्रताप को जातीय सीमा में न बांधें
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पत्रकार वार्ता करते पूर्व विधायक प्रताप चौधरी, प्रमेंद्र गावर और रमेश सिंह ठेंनुआ।
- फोटो : SADABAD
संवाद न्यूज एजेंसी, सादाबाद।
भाजपा सरकार मुरसान नरेश राजा महेंद्र प्रताप को जाट राजा के रूप में सम्मान देकर प्रचारित कर रही है, लेकिन राजा महेंद्र प्रताप जैसी शख्सियत को जातीय सीमा में न बांधा जाए। राजा महेंद्र प्रताप जाति धर्म के सख्त विरोधी थे।
यह बातें पूर्व विधायक प्रताप चौधरी ने प्रेस वार्ता के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि राजा महेंद्रप्रताप ने देश की आजादी के लिए 35 वर्ष तक विदेश में रहकर निर्वासित स्वतंत्रता आंदोलन चलाया था और अफगानिस्तान में संविद सरकार की घोषणा की थी, इसलिए उन्होंने केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार से अनुरोध है कि राजा महेंद्रप्रताप को जाति सीमा में न बांधा जाए।
राजा महेंद्र प्रताप के साथ किसान मसीहा पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह, दीनबंधु, सर छोटूराम, बल्लभगढ़ नरेश राजा नाहर सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। प्रधानमंत्री यदि जाट समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं तो वह अपने वादे को पूरा करते हुए केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण दें।
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आरक्षण की भी ऐसी व्यवस्था हो, जिसको कहीं भी चुनौती न दी जा सके। राजा महेंद्र प्रताप को सच्ची श्रद्धांजलि तब ही मानी जाएगी, जब उन्हें भारत रत्न दिया जाए और उन्हें स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। वार्ता में प्रमेंद्र गावर, निरंजन सिंह शास्त्री, रमेश ठेनुआं, सुरेंद्र परिहार, कुंजिल सिंह, चंद्रकांत बधौतिया, डॉ. मोनपाल सिंह आदि थे।
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भाजपा सरकार मुरसान नरेश राजा महेंद्र प्रताप को जाट राजा के रूप में सम्मान देकर प्रचारित कर रही है, लेकिन राजा महेंद्र प्रताप जैसी शख्सियत को जातीय सीमा में न बांधा जाए। राजा महेंद्र प्रताप जाति धर्म के सख्त विरोधी थे।
यह बातें पूर्व विधायक प्रताप चौधरी ने प्रेस वार्ता के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि राजा महेंद्रप्रताप ने देश की आजादी के लिए 35 वर्ष तक विदेश में रहकर निर्वासित स्वतंत्रता आंदोलन चलाया था और अफगानिस्तान में संविद सरकार की घोषणा की थी, इसलिए उन्होंने केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार से अनुरोध है कि राजा महेंद्रप्रताप को जाति सीमा में न बांधा जाए।
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राजा महेंद्र प्रताप के साथ किसान मसीहा पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह, दीनबंधु, सर छोटूराम, बल्लभगढ़ नरेश राजा नाहर सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। प्रधानमंत्री यदि जाट समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं तो वह अपने वादे को पूरा करते हुए केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण दें।
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आरक्षण की भी ऐसी व्यवस्था हो, जिसको कहीं भी चुनौती न दी जा सके। राजा महेंद्र प्रताप को सच्ची श्रद्धांजलि तब ही मानी जाएगी, जब उन्हें भारत रत्न दिया जाए और उन्हें स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। वार्ता में प्रमेंद्र गावर, निरंजन सिंह शास्त्री, रमेश ठेनुआं, सुरेंद्र परिहार, कुंजिल सिंह, चंद्रकांत बधौतिया, डॉ. मोनपाल सिंह आदि थे।