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हाथ्ारस जिला पंचायत अध्यक्ष के भाग्य का फैसला कल
अमर उजाला ब्यूरो/ हाथरस।
Updated Mon, 12 Jun 2017 11:07 PM IST
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पंचायत
- फोटो : अमर उजाला
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जिला पंचायत अध्यक्ष विनोद उपाध्याय के भाग्य का फैसला कल हो जाएगा। 14 जून को उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर मतदान होगा। इसको लेकर डीएम अमित कुमार व एसपी घुले सुशील ने मतदान स्थल जिला पंचायत परिसर का निरीक्षण किया और तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने जिला पंचायत के एएमए गुरमीक सिंह को बैरीकेडिंग सहित सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने के आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। इधर अविश्वास प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी भी जोरों पर हैं।
गौरतलब है कि हाथरस जिले के इतिहास में यह पहला मौका है, जब जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराया जाना है। अब तक जिला पंचायत में बहुजन समाज पार्टी का एकक्षत्र राज रहा है। बसपा को इससे पहले जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए कोई चुनौती ही नहीं मिल पा रही थी। तमाम राजनीतिक उठापटक के बावजूद इस बार भी बसपा ने 12 के मुकाबले 13 वोट से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा कर लिया था। इस पद पर पूर्व ऊर्जा मंत्री एवं बसपा विधायक रामवीर उपाध्याय के अनुज विनोद उपाध्याय काबिज हुए, लेकिन इस बार के जिला पंचायत अध्यक्ष को बार-बार चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
विरोधी दलों के नेता लगातार सपा जिलाध्यक्ष ओमवती यादव के नेतृत्व में विनोद उपाध्याय के खिलाफ एकजुट होते रहे और अविश्वास प्रस्ताव की चुनौती दी। अब चुनाव को लेकर राजनीतिक परिस्थितियां भी बदल गई हैं। उस समय सपा सत्ता में थी लेकिन अब भाजपा के हाथ में प्रदेश की बागडोर है। अब विपक्षियों का एकजुटता कायम रखना कितना संभव होता है इसका फैसला कल हो जाएगा।
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गौरतलब है कि हाथरस जिले के इतिहास में यह पहला मौका है, जब जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराया जाना है। अब तक जिला पंचायत में बहुजन समाज पार्टी का एकक्षत्र राज रहा है। बसपा को इससे पहले जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए कोई चुनौती ही नहीं मिल पा रही थी। तमाम राजनीतिक उठापटक के बावजूद इस बार भी बसपा ने 12 के मुकाबले 13 वोट से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा कर लिया था। इस पद पर पूर्व ऊर्जा मंत्री एवं बसपा विधायक रामवीर उपाध्याय के अनुज विनोद उपाध्याय काबिज हुए, लेकिन इस बार के जिला पंचायत अध्यक्ष को बार-बार चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
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विरोधी दलों के नेता लगातार सपा जिलाध्यक्ष ओमवती यादव के नेतृत्व में विनोद उपाध्याय के खिलाफ एकजुट होते रहे और अविश्वास प्रस्ताव की चुनौती दी। अब चुनाव को लेकर राजनीतिक परिस्थितियां भी बदल गई हैं। उस समय सपा सत्ता में थी लेकिन अब भाजपा के हाथ में प्रदेश की बागडोर है। अब विपक्षियों का एकजुटता कायम रखना कितना संभव होता है इसका फैसला कल हो जाएगा।
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