{"_id":"619a88a958295f5d422bd961","slug":"hathras-despite-being-eligible-due-to-factionalism-housing-is-not-available-sasni-news-ali2787089166","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथरस : गुटबंदी की वजह से पात्र होने के बावजूद नहीं मिल रहा आवास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथरस : गुटबंदी की वजह से पात्र होने के बावजूद नहीं मिल रहा आवास
विज्ञापन
हाथरस : छप्पर डालकर निवास करते सठिया का गरीब परिवार। संवाद
- फोटो : SASNI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
क्षेत्र में आज भी काफी लोग प्रधानमंत्री आवास से वंचित हैं। पात्र होने के बावजूद उन्हें आवास नहीं मिला है। गुटबंदी के कारण पात्र लोग भी घास फूस की झोपड़ी बना कर रहने को मजबूर हैं। गुटबंदी की वजह से लोगों का नाम बार-बार सूची से काट दिया जाता है।
लोगों का कहना है कि सारी पात्रता पूरी करने के बावजूद सालों बीतने के बाद भी छत नसीब नहीं हुई है। सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगा लगाकर तंग आ चुके हैं। सिस्टम के टाल मटोल रवैया के कारण पात्रता सूची में नाम शामिल नहीं किए जाते है। दफ्तरों में झूठे आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता है। संवाद
- कमलेश पत्नी पूरन सिंह निवासी सठिया का कहना है कि ऐसा लगता है कि हम गरीब के गरीब ही बने रहेंगे। गांव में कोई जमीन नहीं है। परिवार की आय का कोई साधन नहीं है। हर बार कर्मचारी आवास देने का आश्वासन दे कर टरका देते है। गांव के जनप्रतिनिधियों ने आज तक सूची में नाम नहीं आने दिया।
विज्ञापन
- जगदीश पुत्र रामजी लाल निवासी सठिया का कहना है कि आवास के लिए उसके नाम की सर्वे कई बार हो चुकी है। दीवार पर छप्पर डाल कर रह रहा हूं। कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए है। लेकिन आवास मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। शायद, हमारे नसीब में अब आवास नहीं है।
- सोनपाल पुत्र छिदा सिंह निवासी सठिया का कहना है कि भूमिहीन हूं। गरीबी हमारी किस्मत में लिखी है। परिवार की आय का कोई साधन नहीं है। मजदूरी करके गुजर बसर करता हूं। सिर छिपाने के लिए छप्पर भी नसीब नहीं है। आवास मिलने की कोई आस नहीं है।
- इन गरीब महिलाओं के पास गांव में रहने के लिए कोई आवास नहीं है। ये महिलाएं गरीब परिवार की है। इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ मिलना चाहिए। प्रधान बनने के बाद मैंने देखा है कि इन महिलाओं के पास आवास नहीं है। इन्हें आवास मिलना चाहिए। - कृष्णा देवी, ग्राम प्रधान, सठिया
विज्ञापन
क्षेत्र में आज भी काफी लोग प्रधानमंत्री आवास से वंचित हैं। पात्र होने के बावजूद उन्हें आवास नहीं मिला है। गुटबंदी के कारण पात्र लोग भी घास फूस की झोपड़ी बना कर रहने को मजबूर हैं। गुटबंदी की वजह से लोगों का नाम बार-बार सूची से काट दिया जाता है।
लोगों का कहना है कि सारी पात्रता पूरी करने के बावजूद सालों बीतने के बाद भी छत नसीब नहीं हुई है। सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगा लगाकर तंग आ चुके हैं। सिस्टम के टाल मटोल रवैया के कारण पात्रता सूची में नाम शामिल नहीं किए जाते है। दफ्तरों में झूठे आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता है। संवाद
विज्ञापन
- कमलेश पत्नी पूरन सिंह निवासी सठिया का कहना है कि ऐसा लगता है कि हम गरीब के गरीब ही बने रहेंगे। गांव में कोई जमीन नहीं है। परिवार की आय का कोई साधन नहीं है। हर बार कर्मचारी आवास देने का आश्वासन दे कर टरका देते है। गांव के जनप्रतिनिधियों ने आज तक सूची में नाम नहीं आने दिया।
विज्ञापन
- जगदीश पुत्र रामजी लाल निवासी सठिया का कहना है कि आवास के लिए उसके नाम की सर्वे कई बार हो चुकी है। दीवार पर छप्पर डाल कर रह रहा हूं। कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए है। लेकिन आवास मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। शायद, हमारे नसीब में अब आवास नहीं है।
- सोनपाल पुत्र छिदा सिंह निवासी सठिया का कहना है कि भूमिहीन हूं। गरीबी हमारी किस्मत में लिखी है। परिवार की आय का कोई साधन नहीं है। मजदूरी करके गुजर बसर करता हूं। सिर छिपाने के लिए छप्पर भी नसीब नहीं है। आवास मिलने की कोई आस नहीं है।
- इन गरीब महिलाओं के पास गांव में रहने के लिए कोई आवास नहीं है। ये महिलाएं गरीब परिवार की है। इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ मिलना चाहिए। प्रधान बनने के बाद मैंने देखा है कि इन महिलाओं के पास आवास नहीं है। इन्हें आवास मिलना चाहिए। - कृष्णा देवी, ग्राम प्रधान, सठिया