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हाथरस : दो पशुओं की मौत, कुछ दिन पहले मिले थे लंपी के लक्षण

Thu, 15 Sep 2022 10:51 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 15 Sep 2022 10:51 PM IST
सार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ (हाथरस)बुधवार की रात क्षेत्र के दो अलग-अलग गांवों में दो पशुओं की मौत हो गई।मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि पशुओं की मौत लंपी से नहीं बल्कि किसी अन्य बीमारी से हुई है।इसे लेकर पशु पालन विभाग की टीमें टीकाकरण के लिए दौड़ रही हैं।

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Hathras: Death of two animals, symptoms of lumpi were found a few days ago

विस्तार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ (हाथरस)
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बुधवार की रात क्षेत्र के दो अलग-अलग गांवों में दो पशुओं की मौत हो गई। कुछ दिन पहले इनमें लंपी रोग के लक्षण मिले थे। पशुओं की मौत सूचना पर पशु पालन विभाग की टीमें गांव पहुंच गई। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि पशुओं की मौत लंपी से नहीं बल्कि किसी अन्य बीमारी से हुई है। लंपी से मौत का प्रतिशत महज 1-2 है।
गौरतलब है कि इन दिनों लंपी वायरस बीमारी का प्रकोप चल रहा है। इसे लेकर पशु पालन विभाग की टीमें टीकाकरण के लिए दौड़ रही हैं। बुधवार की रात गांव कुकरगवां और नगला मौजी में एक-एक गोवंश की मौत हो गई है। प्रभारी पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुमित वार्ष्णेय ने बताया कि मरने वाले गोवंश में कुछ दिन पूर्व लंपी बीमारी के लक्षण पाए गए थे। लंपी बीमारी के साथ उसे और किसी बीमारी ने जकड़ लिया हो जिससे उसकी मौत हो गई। उसके साथ ही इसी परिवार में एक अन्य गोवंश को भी लंपी बीमारी के लक्षण पाए गए हैं वह अब ठीक है।
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नगला मौजी में हुई गोवंश की मौत पर सहपऊ के प्रभारी पशु चिकित्सा अधिकारी जय देव सिंह ने बताया कि पहले उस पशु के पैर में चोट लगा था बाद में उसे बुखार आया और उसकी मौत हो गई। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि मौत की वजह लंपी बीमारी नहीं बल्कि कोई और बीमारी हो सकती है। टीम को भेजकर पता किया जा रहा है और गोवंशों की मौत की किस बीमारी से मौत हुई है। टीमें भेजकर पशुओं में टीकाकरण करवाया जा रहा है। सर्वप्रथम जिले से अन्य जिलों के साथ सटी सीमा के गांवों में टीकाकरण किया जा रहा है जिससे यह बीमारी दूसरे जिले से हमारे जिले में प्रवेश नहीं कर सके । अब तक 53 हजार पशुओं के टीकाकरण किया जा चुका है। संवाद
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लंपी वायरस के लक्षण
तेज बुखार आना, आंख एवं नाक से पानी गिरना, पशुओं के पैरों में सूजन आना, पूरे शरीर में चकते व गांठ होना, गाय का दूध कम हो जाना, पशुओं में वजन घटना व कमजोरी इस तरह फैलती है बीमारी, रोग के विषाणु बीमार पशु की लार, दूध व स्पर्म में भारी मात्रा में पाए जाते हैं।

ऐसे करें उपचार
पशु चिकित्सक के परामर्श से लक्षणात्मक उपचार किया जा सकता है। बुखार की स्थिति में ज्वरनाशक दवा का उपयोग करें। सूजन एवं चर्म रोग की स्थिति में तीन से पांच दिन तक एंटीबायोटिक दवा दें। घावों को मक्खियों से बचाने के लिए नीम की पत्ती, लहसुन का लेप करें।
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