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हाथरस : तेजी से फैल रहा कोरोना, अस्पतालों में चिकित्सकों का टोटा
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जिला अस्पताल में बनी बीएसएल 2 लैब। संवाद
- फोटो : HATHRAS
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
जिले में कोरोना ने फिर से पैर फैलाना शुरू कर दिया है। बुधवार को जिले में 16 लोग संक्रमित पाए गए। इससे लोगों को फिर से दूसरी लहर की तरह भयावह होने का डर सताने लगा है। इधर, जिले के अस्पतालों में संसाधनों व चिकित्सकों की कमी ने लोगों की चिंताएं और बढ़ा दी है।
बागला जिला अस्पताल में 25 चिकित्सकों की जगह पर सिर्फ आठ ही चिकित्सक हैं तो वहीं, देहात के सरकारी अस्पतालों में 105 की अपेक्षा 68 चिकित्सक ही तैनात हैं। जिले में कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए एमडीटीबी अस्पताल एल टू श्रेणी का है, जबकि सासनी, मुरसान, हसायन व सिकंदराराऊ में एल-वन श्रेणी के अस्पताल बनाए गए हैं।
सासनी, मुरसान, सिकंदराराऊ व हसायन में 30-30 बेड की व्यवस्था है, जबकि एमडीटीबी अस्पताल में 40 बेड की पीकू यूनिट तैयार की गई है। कोरोना की दूसरी लहर में जिले में सबसे ज्यादा कमी ऑक्सीजन की हुई थी। ऐसे में जिले में अब ऑक्सीजन के तीन प्लांट लगाए गए हैं। इसमें एमडीटीबी अस्पताल के निकट एक प्लांट स्थापित किया गया है।
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साथ ही मुरसान के सीएचसी और सिकंदराराऊ के सीएचसी पर भी ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए हैं। पिछले दिनों जिला अस्पताल में आरटीपीसीआर लैब की शुरुआत हो गई लेकिन इसमें जांचों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। यहां न तो पर्याप्त स्टाफ है और न ही किट।
इसकी वजह से केवल चंद जांचें ही यहां हो पाती है। काफी नमूने अभी भी बाहर भेजे जा रहे हैं और उनकी रिपोर्ट देरी से आ पा रही है। इसके अलावा जिले में लंबे समय से चिकित्सकों की कमी है। बागला जिला अस्पताल में महज आठ चिकित्सकों की तैनाती है।
जब कि यहां चिकित्सकों के 25 पद सृजित हैं। इसी तरह देहात के सरकारी अस्पतालों में है। वहां 105 की अपेक्षा 68 चिकित्सक हैं। पिछली बार यहां चिकित्सकों की कमी से काफी मरीजों को परेशानी हुई।
वहीं सीएमओ डॉ. सीएम चतुर्वेदी का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं। आरटीपीसीआर जांच के लिए प्रयोगशाला शुरू हो गई है। पर्याप्त बेड हैं और पीकू वार्ड भी तैयार हैं। ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा चुके हैं।
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जिले में कोरोना ने फिर से पैर फैलाना शुरू कर दिया है। बुधवार को जिले में 16 लोग संक्रमित पाए गए। इससे लोगों को फिर से दूसरी लहर की तरह भयावह होने का डर सताने लगा है। इधर, जिले के अस्पतालों में संसाधनों व चिकित्सकों की कमी ने लोगों की चिंताएं और बढ़ा दी है।
बागला जिला अस्पताल में 25 चिकित्सकों की जगह पर सिर्फ आठ ही चिकित्सक हैं तो वहीं, देहात के सरकारी अस्पतालों में 105 की अपेक्षा 68 चिकित्सक ही तैनात हैं। जिले में कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए एमडीटीबी अस्पताल एल टू श्रेणी का है, जबकि सासनी, मुरसान, हसायन व सिकंदराराऊ में एल-वन श्रेणी के अस्पताल बनाए गए हैं।
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सासनी, मुरसान, सिकंदराराऊ व हसायन में 30-30 बेड की व्यवस्था है, जबकि एमडीटीबी अस्पताल में 40 बेड की पीकू यूनिट तैयार की गई है। कोरोना की दूसरी लहर में जिले में सबसे ज्यादा कमी ऑक्सीजन की हुई थी। ऐसे में जिले में अब ऑक्सीजन के तीन प्लांट लगाए गए हैं। इसमें एमडीटीबी अस्पताल के निकट एक प्लांट स्थापित किया गया है।
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साथ ही मुरसान के सीएचसी और सिकंदराराऊ के सीएचसी पर भी ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए हैं। पिछले दिनों जिला अस्पताल में आरटीपीसीआर लैब की शुरुआत हो गई लेकिन इसमें जांचों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। यहां न तो पर्याप्त स्टाफ है और न ही किट।
इसकी वजह से केवल चंद जांचें ही यहां हो पाती है। काफी नमूने अभी भी बाहर भेजे जा रहे हैं और उनकी रिपोर्ट देरी से आ पा रही है। इसके अलावा जिले में लंबे समय से चिकित्सकों की कमी है। बागला जिला अस्पताल में महज आठ चिकित्सकों की तैनाती है।
जब कि यहां चिकित्सकों के 25 पद सृजित हैं। इसी तरह देहात के सरकारी अस्पतालों में है। वहां 105 की अपेक्षा 68 चिकित्सक हैं। पिछली बार यहां चिकित्सकों की कमी से काफी मरीजों को परेशानी हुई।
वहीं सीएमओ डॉ. सीएम चतुर्वेदी का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं। आरटीपीसीआर जांच के लिए प्रयोगशाला शुरू हो गई है। पर्याप्त बेड हैं और पीकू वार्ड भी तैयार हैं। ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा चुके हैं।