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हाथरस : कोरोना महामारी ने थामी आयुष्मान योजना की रफ़्तार
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कोरोना संक्रमण ने वर्तमान में आयुष्मान योजना की रफ्तार को थाम दिया है। योजना के तहत पूर्व में कार्ड बनाने के लिए हुई लाभार्थियों की केवाईसी शासन स्तर से अनुमोदित नहीं हो पा रही है। ऐसे में लाभार्थी कार्ड पाने के लिए इन-दिनों कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) और कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
शासन स्तर से पूर्व में आयुष्मान योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनाए जाने के लिए ग्राम पंचायतों में शिविर लगाए गए थे। इन शिविरों के जरिये आयुष्मान योजना के तहत लाभार्थियों की केवाईसी की गई थी। केवाईसी के बाद डेटा स्थानीय स्तर से अनुमोदित होने के लिए शासन को भेजा जाता है, लेकिन कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद शिविरों में हुई केवाईसी के अनुमोदन की प्रक्रिया थम गई।
इस कारण अब लाभार्थियों को कार्ड नहीं मिल पा रहे हैं। लाभार्थी गोल्डन कार्ड लेने के लिए कार्यालयों और सीएससी के चक्कर लगा रहे हैं। यहां जिले में 70,360 परिवारों के गोल्डन कार्ड बनाने के लिए लक्ष्य मिला था। इस आधार पर 3,51,800 लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए जाने हैं। अब तक करीब 99500 लोगों के जिले में गोल्डन कार्ड बन चुके हैं। योजना के नोडल अधिकारी डॉ. प्रभात ने बताया कि कोरोना के कारण लखनऊ कार्यालय में अधिकारी बैठ नहीं रहे हैं। इस कारण केवाईसी अनुमोदित नहीं हो पा रही है।
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कोरोना संक्रमण ने वर्तमान में आयुष्मान योजना की रफ्तार को थाम दिया है। योजना के तहत पूर्व में कार्ड बनाने के लिए हुई लाभार्थियों की केवाईसी शासन स्तर से अनुमोदित नहीं हो पा रही है। ऐसे में लाभार्थी कार्ड पाने के लिए इन-दिनों कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) और कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
शासन स्तर से पूर्व में आयुष्मान योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनाए जाने के लिए ग्राम पंचायतों में शिविर लगाए गए थे। इन शिविरों के जरिये आयुष्मान योजना के तहत लाभार्थियों की केवाईसी की गई थी। केवाईसी के बाद डेटा स्थानीय स्तर से अनुमोदित होने के लिए शासन को भेजा जाता है, लेकिन कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद शिविरों में हुई केवाईसी के अनुमोदन की प्रक्रिया थम गई।
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इस कारण अब लाभार्थियों को कार्ड नहीं मिल पा रहे हैं। लाभार्थी गोल्डन कार्ड लेने के लिए कार्यालयों और सीएससी के चक्कर लगा रहे हैं। यहां जिले में 70,360 परिवारों के गोल्डन कार्ड बनाने के लिए लक्ष्य मिला था। इस आधार पर 3,51,800 लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए जाने हैं। अब तक करीब 99500 लोगों के जिले में गोल्डन कार्ड बन चुके हैं। योजना के नोडल अधिकारी डॉ. प्रभात ने बताया कि कोरोना के कारण लखनऊ कार्यालय में अधिकारी बैठ नहीं रहे हैं। इस कारण केवाईसी अनुमोदित नहीं हो पा रही है।
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