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हाथरस : मनरेगा से खर्च हुए 45 करोड़ रुपये का मांगा उपभोग प्रमाणपत्र
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
कोरोना महामारी के दौरान शासन के निर्देश पर जिले में मनरेगा के तहत कामगारों को काम मुहैया कराया गया था। कोरोना काल में जिले में मनरेगा से 45 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। अब शासन स्तर से उक्त खर्च धनराशि का उपभोग प्रमाण मांगा गया है। इस उपभोग प्रमाण पत्र के मांगे जाने के बाद अफसरों द्वारा खर्च का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। उपभोग प्रमाण पत्र को शासन को भेजने की तैयार की जा रही है।
कोरोना महामारी के दौर में प्रवासी श्रमिकों को जिले में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए शासन स्तर से निर्देश जारी किए थे। इन निर्देश के क्रम में ग्रामीणों को उन्हीं के गांवों में मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराया गया। यहां तक कि विशेष अभियान चलाकर प्रवासी श्रमिकों के मनरेगा के तहत जॉब कार्ड बनाए गए। इन जॉब कार्ड के जरिये प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। यहां जिले में पिछले वित्तीय वर्ष में 18 लाख मानव दिवस सृजित कराए गए।
मनरेगा के तहत विभिन्न कार्यों में 45 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसमें से 36 करोड़ रुपये कार्मिकों को दिए गए। शेष धनराशि को साम्रगी पर खर्च किया गया। जिले में मनरेगा के तहत हुई खर्च धनराशि का शासन स्तर से उपभोग प्रमाण पत्र मांगा गया है। इस उपभोग प्रमाण पत्र को लेकर विभाग की ओर से पूरा ब्योरा तैयार कर लिया गया है। धनराशि के खर्च का उपभोग प्रमाण पत्र विभाग की ओर से शासन को भेजने की कार्रवाई की जा रही है। पीडी एके मिश्र ने बताया कि मनरेगा के तहत प्रवासी श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराया गया है। उपभोग प्रमाण पत्र भेजने की कार्रवाई की जा रही है। संवाद
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कोरोना महामारी के दौरान शासन के निर्देश पर जिले में मनरेगा के तहत कामगारों को काम मुहैया कराया गया था। कोरोना काल में जिले में मनरेगा से 45 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। अब शासन स्तर से उक्त खर्च धनराशि का उपभोग प्रमाण मांगा गया है। इस उपभोग प्रमाण पत्र के मांगे जाने के बाद अफसरों द्वारा खर्च का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। उपभोग प्रमाण पत्र को शासन को भेजने की तैयार की जा रही है।
कोरोना महामारी के दौर में प्रवासी श्रमिकों को जिले में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए शासन स्तर से निर्देश जारी किए थे। इन निर्देश के क्रम में ग्रामीणों को उन्हीं के गांवों में मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराया गया। यहां तक कि विशेष अभियान चलाकर प्रवासी श्रमिकों के मनरेगा के तहत जॉब कार्ड बनाए गए। इन जॉब कार्ड के जरिये प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। यहां जिले में पिछले वित्तीय वर्ष में 18 लाख मानव दिवस सृजित कराए गए।
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मनरेगा के तहत विभिन्न कार्यों में 45 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसमें से 36 करोड़ रुपये कार्मिकों को दिए गए। शेष धनराशि को साम्रगी पर खर्च किया गया। जिले में मनरेगा के तहत हुई खर्च धनराशि का शासन स्तर से उपभोग प्रमाण पत्र मांगा गया है। इस उपभोग प्रमाण पत्र को लेकर विभाग की ओर से पूरा ब्योरा तैयार कर लिया गया है। धनराशि के खर्च का उपभोग प्रमाण पत्र विभाग की ओर से शासन को भेजने की कार्रवाई की जा रही है। पीडी एके मिश्र ने बताया कि मनरेगा के तहत प्रवासी श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराया गया है। उपभोग प्रमाण पत्र भेजने की कार्रवाई की जा रही है। संवाद
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