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हाथरस : पीड़िता की वेदना के अनुमान से ही अंत: चेतना कांप जाएगी : न्यायालय

Sun, 19 Dec 2021 12:18 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 19 Dec 2021 12:18 AM IST
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Hathras: Consciousness will tremble only due to the estimate of the victim's pain: Court
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि अभियुक्त चंद्रपाल द्वारा 10 साल की मासूम बालिका को बलात्कार के लिए अपहरण कर हत्या की गई। उसके शव को साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से नहर में फेंक दिया। दस वर्ष की उस मासूम बालिका ने जीवन के विभिन्न रंग और संसार को ठीक प्रकार से देखा भी नहीं था। वह अपना प्राकृतिक जीवन भी ठीक प्रकार से प्रारंभ नहीं कर पाई थी। मृतका रक्षाबंधन के पर्व के उपरांत अपने भाई के साथ पिता की चारपाई से थोड़ी दूर सो रही थी।
मृतका के परिवार में और स्वयं मृतका द्वारा भी यह अनुमान नहीं लगाया लगा होगा कि उक्त रात अभियुक्त के कुत्सित विचारों एवं उनकी परिणति के कारण वह रात्रि पीड़िता के लिए अंतिम रात थी। मृतका इतनी कम आयु की थी कि वह अभियुक्त द्वारा किए जा रहे कृत्य का प्रतिरोध करने में सक्षम नहीं थी। पीड़िता द्वारा उसके अपहरण से लेकर बलात्कार एवं उसकी हत्या किए जाने तक की अवधि में जो मानसिक व शारीरिक वेदना सहन की होगी, उसका मात्र अनुमान करने पर ही किसी भी सामान्य व्यक्ति की अंत: चेतना कांप जाएगी। अभियुक्त चंद्रपाल प्रौढ़ है और उसकी पुत्री का भी विवाह हो चुका है। ऐसी स्थिति में अभियुक्त द्वारा किए गए अपराध की निकृष्टता और पाशविकता की प्रकृति और गंभीर हो जाती है। इस कारण अभियुक्त चंद्रपाल का अपराध विरल से विरलतम की श्रेणी में आता है। संवाद
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धारा-302 व 376 एबी में सुनाई मृत्युदंड की सजा
न्यायालय ने अभियुक्त चंद्रपाल को धारा-302 भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत दंडनीय अपराध के लिए मृत्युदंड तथा पचास हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड न अदा करने पर अभियुक्त को छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भोगना होगा। अभियुक्त को धारा-376 एबी भारतीय दंड संहिता सपठित धारा 5 ड -6े लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत मृत्युदंड एवं पचास हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर अभियुक्त छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भोगेगा। धारा-363 आईपीसी के अंतर्गत सात वर्ष के कारावास व दस हजार रुपये का अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड न देने पर दो माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भोगेगा। धारा-201 आईपीसी के अंतर्गत अभियुक्त को सात वर्ष के कारावास एवं दस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है । अर्थदंड न देने पर दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास अभियुक्त भोगेगा। अभियुक्त की सभी सजाएं अर्थदंड के अतिरिक्त साथ-साथ चलेंगी।
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हत्यारे को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल ले गई पुलिस
शनिवार को न्यायालय द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी हो गई। कोर्ट ने जैसे ही अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई, वैसे ही अभियुक्त चंद्रपाल के चेहरे का रंग उड़ गया। पुलिस उसे कड़ी सुरक्षा के बीच अलीगढ़ कारागार ले गई।
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