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हाथरस : रैली निकालकर अहेरिया समाज ने सौंपा ज्ञापन
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हाथरस : तहसील में धरना-प्रदर्शन करते अहेरिया समाज के लोग। संवाद
- फोटो : SASNI
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासनी (हाथरस)
अपनी जाति को सूचीबद्ध कराने की मांग को लेकर शुक्रवार को अहेरिया समाज के लोगों ने कैलोरा चौराहे पर एकत्रित होकर दरियापुर होते हुए रैली निकाली। इसका नेतृत्व चंद्रपाल सिंह अहेरिया और धर्मेंद्र कुमार अहेरिया ने किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी अंजलि गंगवार को दिया गया। सरकार विरोधी नारे लगाते हुए अहेरिया जाति को सूचीबद्ध करने की मांग की गई।
ज्ञापन में अहेरिया समाज के लोगों का कहना है कि अहेरिया समाज को सूचीबद्ध कराने की मांग वर्षों से चली आ रही है, लेकिन आज तक इसे पूरा नहीं किया गया है। संविधान लागू होने के बाद से अहेरिया समाज के साथ भेदभाव किया जा रहा है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 16 लाख से अधिक अहेरिया समाज के लोग निवास कर रहे हैं। इन्हें सत्ताधीशों ने केवल उपयोग की वस्तु समझ लिया है।
वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक राजनीतिक दल अहेरिया जाति के मत प्राप्त करने के लिए लालायित रहता है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल द्वारा अहेरिया समाज के हितों को ध्यान में नहीं रखा गया है। अहेरिया समाज को न तो अनुसूचित जाति में शामिल किया गया है और न ही पिछड़ी जाति में। सामान्य जाति में भी इस जाति का कोई उल्लेख नहीं है। इस कारण अहेरिया जाति समाज की मुख्य धारा से नहीं जुड़ पा रही है। संवाद
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अपनी जाति को सूचीबद्ध कराने की मांग को लेकर शुक्रवार को अहेरिया समाज के लोगों ने कैलोरा चौराहे पर एकत्रित होकर दरियापुर होते हुए रैली निकाली। इसका नेतृत्व चंद्रपाल सिंह अहेरिया और धर्मेंद्र कुमार अहेरिया ने किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी अंजलि गंगवार को दिया गया। सरकार विरोधी नारे लगाते हुए अहेरिया जाति को सूचीबद्ध करने की मांग की गई।
ज्ञापन में अहेरिया समाज के लोगों का कहना है कि अहेरिया समाज को सूचीबद्ध कराने की मांग वर्षों से चली आ रही है, लेकिन आज तक इसे पूरा नहीं किया गया है। संविधान लागू होने के बाद से अहेरिया समाज के साथ भेदभाव किया जा रहा है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 16 लाख से अधिक अहेरिया समाज के लोग निवास कर रहे हैं। इन्हें सत्ताधीशों ने केवल उपयोग की वस्तु समझ लिया है।
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वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक राजनीतिक दल अहेरिया जाति के मत प्राप्त करने के लिए लालायित रहता है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल द्वारा अहेरिया समाज के हितों को ध्यान में नहीं रखा गया है। अहेरिया समाज को न तो अनुसूचित जाति में शामिल किया गया है और न ही पिछड़ी जाति में। सामान्य जाति में भी इस जाति का कोई उल्लेख नहीं है। इस कारण अहेरिया जाति समाज की मुख्य धारा से नहीं जुड़ पा रही है। संवाद
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