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हाथरस : मंडी समिति के आढ़तिया करेंगे ऑनलाइन कारोबार
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गौरव भारद्वाज
हाथरस। मंडी समिति के आढ़तिया अब कलम से नहीं, बल्कि कंप्यूटर से कारोबारी लिखा-पढ़ी करेंगे। उनका पूरा कारोबार ऑनलाइन होगा। मंडी समिति के गेट पास से लेकर सब कुछ ऑनलाइन होगा। गेट पर होने वाली गतिविधि की सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होगी। कर चोरी करने वाले आढ़तियों पर कार्रवाई की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि अब सरकार ने ई मंडी के तहत हाथरस कृषि उत्पादन मंडी को भी ऑनलाइन कर दिया है। मंडी में करीब 400 दुकानदार हैं। अब तक 6 आर (किसान बाउचर) व 9 आर यानि (आढ़तिया का बिल) की मैनुअल रसीद बुक दी जाती थी। इनसे आढ़तिया बिल काटकर काम करते थे, लेकिन अब यह सब बंद हो जाएगा।
प्रवेश पर्ची भी कटेगी ऑनलाइन
मंडी के प्रवेश द्वार पर वाहन के पहुंचने पर चेक पोस्ट पर तैनात कर्मी द्वारा यह पूछा जाएगा कि किस आढ़ती के यहां माल लेकर जाना है। कौन सी जींस है, कितना माल है, यह सब अंकित कर कंप्यूटरीकृत पर्ची माल लाने वाले को दी जाएगी। उसके बाद संबंधित आढ़तिया के पास किसान माल लेकर पहुंचेगा।
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मंडी प्रशासन देगा लॉगिन आइडी
मंडी प्रशासन द्वारा 15 जनवरी से किसानों को माल की बिक्री के लिए ऑनलाइन का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद मंडी के करीब 30 प्रतिशत आढ़तिया ऑनलाइन काम करने लग गए हैं। लॉगिन आईडी मिलने बाद आढ़तिया ई मंडी डॉट यूपी एसडीसी डॉट जीओवी पर जाकर अपनी लॉगिन आईडी को खोलेगा। उसके बाद डेस बोर्ड पर ऑप्शन आएंगे। 6 आर और 9 आर के ऑप्शन आएंगे। ऑप्शन के हिसाब से आढ़तिया फसल की जींस, दर, भार आदि अंकित करेगा। मंडी शुल्क व विकास शुल्क भरने के बाद उसके बाद सबमिट का ऑप्शन आएगा। इसके साथ प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके अलावा माल को बाहर भेजने के लिए मंडी प्रशासन गेट पास जारी करेगा।
आढ़तियों के सामने आ रही समझने की परेशानी
कई वर्षों से मंडी के आढ़तिया मैनुअल काम कर रहे थे। अब ई मंडी प्रणाली के तहत ऑनलाइन सिस्टम को समझने में आढ़तियों को परेशानी आ रही है। आढ़तिया यह कह रहे हैं कि मंडी प्रशासन उन्हें लैपटॉप और कंप्यूटर मुहैया कराएं, जिससे वह काम कर सकें। सरकार ने यह सिस्टम लागू किया है तो पहले इसके संसाधन तो मुहैया कराएं। इसे लेकर आढ़तियों में गुस्सा है। आढ़तियों को ऑनलाइन सिस्टम सिखाने के लिए एक काउंटर लगाया गया है। इस पर आढ़तिया ऑनलाइन की जानकारी कर रहे हैं।
ई मंडी के तहत सबकुछ ऑनलाइन हो गया है। आढ़तियों को 15 जनवरी से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। करीब 30 प्रतिशत आढ़तियों ने काम भी शुरू कर दिया है। बाकी को समझाने के लिए एक कंप्यूटर लगाया गया है।
-यशपाल सिंह, मंडी सचिव
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हाथरस। मंडी समिति के आढ़तिया अब कलम से नहीं, बल्कि कंप्यूटर से कारोबारी लिखा-पढ़ी करेंगे। उनका पूरा कारोबार ऑनलाइन होगा। मंडी समिति के गेट पास से लेकर सब कुछ ऑनलाइन होगा। गेट पर होने वाली गतिविधि की सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होगी। कर चोरी करने वाले आढ़तियों पर कार्रवाई की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि अब सरकार ने ई मंडी के तहत हाथरस कृषि उत्पादन मंडी को भी ऑनलाइन कर दिया है। मंडी में करीब 400 दुकानदार हैं। अब तक 6 आर (किसान बाउचर) व 9 आर यानि (आढ़तिया का बिल) की मैनुअल रसीद बुक दी जाती थी। इनसे आढ़तिया बिल काटकर काम करते थे, लेकिन अब यह सब बंद हो जाएगा।
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प्रवेश पर्ची भी कटेगी ऑनलाइन
मंडी के प्रवेश द्वार पर वाहन के पहुंचने पर चेक पोस्ट पर तैनात कर्मी द्वारा यह पूछा जाएगा कि किस आढ़ती के यहां माल लेकर जाना है। कौन सी जींस है, कितना माल है, यह सब अंकित कर कंप्यूटरीकृत पर्ची माल लाने वाले को दी जाएगी। उसके बाद संबंधित आढ़तिया के पास किसान माल लेकर पहुंचेगा।
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मंडी प्रशासन देगा लॉगिन आइडी
मंडी प्रशासन द्वारा 15 जनवरी से किसानों को माल की बिक्री के लिए ऑनलाइन का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद मंडी के करीब 30 प्रतिशत आढ़तिया ऑनलाइन काम करने लग गए हैं। लॉगिन आईडी मिलने बाद आढ़तिया ई मंडी डॉट यूपी एसडीसी डॉट जीओवी पर जाकर अपनी लॉगिन आईडी को खोलेगा। उसके बाद डेस बोर्ड पर ऑप्शन आएंगे। 6 आर और 9 आर के ऑप्शन आएंगे। ऑप्शन के हिसाब से आढ़तिया फसल की जींस, दर, भार आदि अंकित करेगा। मंडी शुल्क व विकास शुल्क भरने के बाद उसके बाद सबमिट का ऑप्शन आएगा। इसके साथ प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके अलावा माल को बाहर भेजने के लिए मंडी प्रशासन गेट पास जारी करेगा।
आढ़तियों के सामने आ रही समझने की परेशानी
कई वर्षों से मंडी के आढ़तिया मैनुअल काम कर रहे थे। अब ई मंडी प्रणाली के तहत ऑनलाइन सिस्टम को समझने में आढ़तियों को परेशानी आ रही है। आढ़तिया यह कह रहे हैं कि मंडी प्रशासन उन्हें लैपटॉप और कंप्यूटर मुहैया कराएं, जिससे वह काम कर सकें। सरकार ने यह सिस्टम लागू किया है तो पहले इसके संसाधन तो मुहैया कराएं। इसे लेकर आढ़तियों में गुस्सा है। आढ़तियों को ऑनलाइन सिस्टम सिखाने के लिए एक काउंटर लगाया गया है। इस पर आढ़तिया ऑनलाइन की जानकारी कर रहे हैं।
ई मंडी के तहत सबकुछ ऑनलाइन हो गया है। आढ़तियों को 15 जनवरी से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। करीब 30 प्रतिशत आढ़तियों ने काम भी शुरू कर दिया है। बाकी को समझाने के लिए एक कंप्यूटर लगाया गया है।
-यशपाल सिंह, मंडी सचिव