{"_id":"622ce69ff96a320ee811ce0a","slug":"hathras-after-a-tough-struggle-rana-got-the-victory-sikandhra-rahu-news-ali2869813176","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथरस : कड़े संघर्ष के बाद राना को नसीब हुई जीत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथरस : कड़े संघर्ष के बाद राना को नसीब हुई जीत
विज्ञापन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिकंदराराऊ (हाथरस)
भारतीय जनता पार्टी से निर्वाचित वीरेंद्र सिंह राना को सपा प्रत्याशी डॉ. ललित बघेल ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन काफी कश्मकश के बाद भी जीत राना की झोली में ही आई।
प्रारंभिक मतगणना में राना ने आठवें और नौवें राउंड तक तो काफी बढ़त बना ली थी, लेकिन इसके बाद सपा के परंपरागत वोटरों वाले इलाकाें और हसायन क्षेत्र में सपा प्रत्याशी की जाति बहुल इलाकों में सपा प्रत्याशी बघेल ने बढ़त बना ली। उनकी बढ़त 26वें राउंड तक रही। इसके बाद हाथरस जंक्शन क्षेत्र के क्षत्रिय बहुल इलाके की मतगणना शुरू होते ही राना ने बढ़त लेनी शुरू कर दी और आखिर में आठ हजार वोटों से उन्होंने चुनाव जीत लिया। जानकारों का कहना है कि राना को भितरघात का भी शिकार होना पड़ा। बावजूद इसके योगी और मोदी सरकार की नीतियों का जादू मतदाताओं के सिर चढ़कर बोला।
बसपा के टिकट पर खड़े हुए अवधेश कुमार सिंह को पार्टी का कैडर वोट तो खूब मिला, लेकिन अन्य जातियों का वोट नहीं मिल पाया। स्वयं उनकी जाति के मतदाताओं वाले इलाकों में भी भाजपा प्रत्याशी को बढ़त मिली। सपा प्रत्याशी हालांकि पहली बार चुनाव मैदान में उतरे थे, लेकिन उनको चुनाव लड़ा रहे बड़े नेता उनकी जीत की रणनीति को ठीक से अमलीजामा नहीं पहना सके। एक तरफ राना के समर्थन में पूरा संगठन लगा था तो दूसरी तरफ बघेल का संगठन बिखरा हुआ था। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
भारतीय जनता पार्टी से निर्वाचित वीरेंद्र सिंह राना को सपा प्रत्याशी डॉ. ललित बघेल ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन काफी कश्मकश के बाद भी जीत राना की झोली में ही आई।
प्रारंभिक मतगणना में राना ने आठवें और नौवें राउंड तक तो काफी बढ़त बना ली थी, लेकिन इसके बाद सपा के परंपरागत वोटरों वाले इलाकाें और हसायन क्षेत्र में सपा प्रत्याशी की जाति बहुल इलाकों में सपा प्रत्याशी बघेल ने बढ़त बना ली। उनकी बढ़त 26वें राउंड तक रही। इसके बाद हाथरस जंक्शन क्षेत्र के क्षत्रिय बहुल इलाके की मतगणना शुरू होते ही राना ने बढ़त लेनी शुरू कर दी और आखिर में आठ हजार वोटों से उन्होंने चुनाव जीत लिया। जानकारों का कहना है कि राना को भितरघात का भी शिकार होना पड़ा। बावजूद इसके योगी और मोदी सरकार की नीतियों का जादू मतदाताओं के सिर चढ़कर बोला।
विज्ञापन
बसपा के टिकट पर खड़े हुए अवधेश कुमार सिंह को पार्टी का कैडर वोट तो खूब मिला, लेकिन अन्य जातियों का वोट नहीं मिल पाया। स्वयं उनकी जाति के मतदाताओं वाले इलाकों में भी भाजपा प्रत्याशी को बढ़त मिली। सपा प्रत्याशी हालांकि पहली बार चुनाव मैदान में उतरे थे, लेकिन उनको चुनाव लड़ा रहे बड़े नेता उनकी जीत की रणनीति को ठीक से अमलीजामा नहीं पहना सके। एक तरफ राना के समर्थन में पूरा संगठन लगा था तो दूसरी तरफ बघेल का संगठन बिखरा हुआ था। संवाद
विज्ञापन