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हाथरस : जिले के 813 टीबी रोगियों को लिया गोद
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत क्षय रोगियों को बेहतर इलाज के लिए प्रशासनिक अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों व विभिन्न संस्थाओं ने जनवरी 2022 से अब तक जिले में कुल 813 टीबी रोगियों को गोद लिया है। मुख्यालय सहित सभी विकास खंडों में भी टीबी रोगियों को गोद लेने का कार्य तेजी से चल रहा है। टीबी रोगियों को गोद लेने वालों में प्रशासनिक अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थान और समाजसेवी शामिल हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. अनिल सागर वशिष्ठ ने बताया टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो एक-दूसरे से फैलती है। इलाज नहीं होने पर परिवार के अन्य सदस्यों में भी बीमारी होने की संभावना रहती है। यदि परिवार में कोई टीबी का मरीज है तो उससे परिवार के अन्य सदस्यों को भी अलग रखें। टीबी के लक्षणों और उपचार की सही जानकारी जनमानस को होना बहुत आवश्यक है।
जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ. प्रवीण भारती ने बताया कि टीबी रोगियों को 500 रुपये प्रतिमाह पोषण भत्ते के रूप में पूर्व की तरह से दिए जा रहे हैं। गोद लेने वाली संस्थाओं द्वारा टीबी रोगी को हर महीने एक किलो मूंगफली, एक किलो भुना चना, एक किलो गुड़, एक किलो सत्तू आदि स्वस्थ होने तक दिया जाता रहेगा। डॉ. प्रवीण भारती ने बताया कि टीबी एक ऐसी बीमारी है, जिसके प्रति लोगों को जागरूक होना बहुत जरूरी है। टीबी को खत्म करने के लिए कई उपचार पद्धतियों को भी खोजा गया है। यह बीमारी एक प्रकार के माइक्रोबैक्टेरियम ट्यूबरयुक्लोसिस बैक्टीरिया (जीवाणु) के कारण होती है। टीबी अधिकतर फेफड़े पर ही असर करती है। संवाद
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टीबी रोग के लक्षण
- लगातार दो हफ्तों से खांसी आना और आगे भी जारी रहना
- इस रोग में शाम को बुखार हो जाता है
- छाती (सीने) में दर्द की शिकायत भी होती है
- गले में गिल्टी या सूजन होना
- वजन घटने लगता है
- सांस फूलने लगती है
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राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत क्षय रोगियों को बेहतर इलाज के लिए प्रशासनिक अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों व विभिन्न संस्थाओं ने जनवरी 2022 से अब तक जिले में कुल 813 टीबी रोगियों को गोद लिया है। मुख्यालय सहित सभी विकास खंडों में भी टीबी रोगियों को गोद लेने का कार्य तेजी से चल रहा है। टीबी रोगियों को गोद लेने वालों में प्रशासनिक अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थान और समाजसेवी शामिल हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. अनिल सागर वशिष्ठ ने बताया टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो एक-दूसरे से फैलती है। इलाज नहीं होने पर परिवार के अन्य सदस्यों में भी बीमारी होने की संभावना रहती है। यदि परिवार में कोई टीबी का मरीज है तो उससे परिवार के अन्य सदस्यों को भी अलग रखें। टीबी के लक्षणों और उपचार की सही जानकारी जनमानस को होना बहुत आवश्यक है।
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जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ. प्रवीण भारती ने बताया कि टीबी रोगियों को 500 रुपये प्रतिमाह पोषण भत्ते के रूप में पूर्व की तरह से दिए जा रहे हैं। गोद लेने वाली संस्थाओं द्वारा टीबी रोगी को हर महीने एक किलो मूंगफली, एक किलो भुना चना, एक किलो गुड़, एक किलो सत्तू आदि स्वस्थ होने तक दिया जाता रहेगा। डॉ. प्रवीण भारती ने बताया कि टीबी एक ऐसी बीमारी है, जिसके प्रति लोगों को जागरूक होना बहुत जरूरी है। टीबी को खत्म करने के लिए कई उपचार पद्धतियों को भी खोजा गया है। यह बीमारी एक प्रकार के माइक्रोबैक्टेरियम ट्यूबरयुक्लोसिस बैक्टीरिया (जीवाणु) के कारण होती है। टीबी अधिकतर फेफड़े पर ही असर करती है। संवाद
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टीबी रोग के लक्षण
- लगातार दो हफ्तों से खांसी आना और आगे भी जारी रहना
- इस रोग में शाम को बुखार हो जाता है
- छाती (सीने) में दर्द की शिकायत भी होती है
- गले में गिल्टी या सूजन होना
- वजन घटने लगता है
- सांस फूलने लगती है