हाथरस: अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई ग्रीन बेल्ट, साफ नजर आ रही विभागीय लापरवाही
वन विभाग की ओर से क्षतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंध एवं योजना प्राधिकरण (कैंपा योजना) के तहत यह हरित पट्टिका (ग्रीन बेल्ट) तैयार कराई गई थी। वर्तमान में यह हरित पट्टिका अतिक्रमण का शिकार हो गई है। यह ग्रीन बेल्ट सादाबाद से सासनी के बीच हाथरस शहर से होकर लगभग 34 किलोमीटर में तैयार कराई गई थी।
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आगरा-अलीगढ़ रोड पर वन विभाग की ओर से तैयार की गई हरित पट्टिका अब लगभग बर्बाद हो चुकी है। शहर से गुजरने वाले आगरा-अलीगढ़ मार्ग पर अतिक्रमण के साथ विभागीय लापरवाही भी साफ नजर आ रही है। हरित पट्टिका बनाने के लिए वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधे कम, घास-फूस ज्यादा दिखाई दे रही है। हरित पट्टिका के नाम पर यहां बैरिकेडिंग के कुछ खंभे ही रह गए हैं।
वन विभाग की ओर से क्षतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंध एवं योजना प्राधिकरण (कैंपा योजना) के तहत यह हरित पट्टिका (ग्रीन बेल्ट) तैयार कराई गई थी। वर्तमान में यह हरित पट्टिका अतिक्रमण का शिकार हो गई है। यह ग्रीन बेल्ट सादाबाद से सासनी के बीच हाथरस शहर से होकर लगभग 34 किलोमीटर में तैयार कराई गई थी। शहर से बाहर फिर भी इस हरित पट्टिका के अवशेष दिखाई देते हैं, लेकिन शहर में हाल बहुत बुरा है। विभागीय लापरवाही के चलते ग्रीन बेल्ट की बैरिकेडिंग काफी समय पहले ही क्षतिग्रस्त हो गई।
बकायदा लोहे के तारों और सीमेंट के खंभों से की गई बैरिकेडिंग के तार लगभग गायब हो चुके हैं। कुछ खंभे सिर्फ अहसास दिला रहे हैं कि कभी यहां व्यवस्थित हरित पट्टिका होती थी। बैरिकेडिंग न होने के कारण यहां अब अतिक्रमण का बोलबाला है। चाट पकौड़ी के ठेलों से लेकर भवन निर्माण सामग्री के दुकानदारों तक ने हरित पट्टिका पर कब्जा जमा लिया है। अहम बात यह है कि वर्ष 2015 में न्यायालय के निर्णय के बाद कैंपा योजना के तहत पेड़ों की कटान की क्षतिपूर्ति के रूप में आने वाले धन से ग्रीन बेल्ट का निर्माण किया गया था।
इस ग्रीन बेल्ट का काम काफी समय पहले कराया गया था। यहां लगाए गए पौधे अब काफी बड़े हो चुके हैं। मौसम की मार के कारण बैरिकेडिंग के तार गल जाते हैं। शहरी क्षेत्र में अब स्वीकृति के साथ इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाए जाने का काम किया जा रहा है। बाहरी क्षेत्रों में ग्रीन बेल्ट की देखभाल की जा रही है।-डाॅ. सीपी सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी, हाथरस।