ग्राम पंचायतें बनाएंगी याोजना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाथरस। ग्राम पंचायतों के कामकाज की निगरानी के लिए की जा रही त्रिस्तरीय मॉनीटरिंग की व्यवस्था को लागू करने की तैयारी तेज हो गई हैं। जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर अधिकारी व कर्मियों को नई व्यवस्था की ट्रेनिंग देने के लिए शासन से चार मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण लेकर आ चुके हैं। अब जिला पंचायतराज अधिकारी और अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत भी ट्रेनिंग लखनऊ रवाना हो गए हैं। उनके लौटने पर ही जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर ट्रेनिंग शुरू की जाएगी।
पहले सभी एडीओ पंचायत, खंड विकास अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। उनके बाद ग्राम प्रधानों को ट्रेनिंग दी जाएगी। दरअसल, पंचातयों को विकास के लिए मिलने वाली धनराशि के आय-व्यय में पारदर्शिता रखने के लिए शासन ने नई व्यवस्था बनाई है, जिसके तहत अब सभी ग्राम पंचायतों को पूरे पांच साल के लिए अपनी कार्य योजना बनानी होगी। इसमें से हर साल की कार्य योजना तैयार होगी। जो धनराशि उस वर्ष में ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध होगी, उसके हिसाब से वह अपने यहां कामों का चयन करेंगी और उनके एस्टीमेट तैयार कराएंगी।
एस्टीमेट की स्वीकृति अब तीन स्तर पर होगी। 50 हजार तक की धनराशि के एस्टीमेट ग्राम पंचायतें खुद मंजूर कर सकेंगी। एक लाख रुपये तक के एस्टीमेट की मंजूरी एडीओ पंचायत से लेनी होगी। पांच लाख रुपये तक के एस्टीमेट जिला पंचायतराज अधिकारी मंजूर करेंगे, जबकि इससे ज्यादा धनराशि के एस्टीमेट को डीएम मंजूरी देंगे। ग्राम पंचायतों में फिलहाल नई कार्य योजना की तैयारी शुरू हो चुकी है।
ये मास्टर ट्रेनर किए गए हैं तैयार
नई व्यवस्था नए वित्तीय वर्ष से लागू होनी है। लिहाजा इसके लिए जो चार मास्टर ट्रेनर शासन ने तैयार करके भेजे हैं, उनमें एओ राम सिंह, बीएस अगरिया, विनय कुमार और डीसीएम स्वच्छ मिशन अंशुल गुप्ता शामिल हैं। अब डीपीआरओ और एएमए प्रशिक्षण लेने गए हैं। उनके आने के बाद जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर प्रशिक्षण शुरू होगा।