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लाइनमैन से लेकर मीटर तक, सब संविदा कर्मियों के भरोसे
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
एक तरफ बिजली विभाग के अफसर गलत काम को रोकने के लिए लगातार कदम उठा रहे हैं। वहीं खास बात यह है कि बिजली महकमे में लाइनमैन से लेकर मीटर तक निजी लोगों के हाथों में हैं। इस कारण संविदा पर कार्य करने वाले कर्मी समय समय पर फायदा उठाते हैं। जवाबदेही जिम्मेदार अधिकारी की होती है। इसे लेकर भी महकमे के अधिकारी खासे परेशान हैं।
उल्लेखनीय है कि बिजली विभाग में नियमित स्टाफ की काफी कमी चल रही है। इस कारण जिले के 65 बिजलीघरों पर करीब 600 संविदा कर्मी बिजली आपूर्ति को सुचारू करने में लगे हुए हैं। इसके अलावा विभाग में कार्यालयों में कंप्यूटर आपरेटर भी प्राइवेट हैं। मीटर की रीडिंग के लिए एजेंसी के जरिए कार्य कराया जा रहा है।
इसके बाद मीटर लगाने वाले चंद कर्मी है। इस कारण मीटरों को लगवाने में ठेकेदार के लोगों की मदद ली जाती है। इसके अलावा विभाग के पास पर्याप्त संसाधनों की भी कमी है। जब तत्काल में लाइन दुरुस्त करानी हो या फिर अन्य कोई काम हो। इसके लिए ठेकेदार के प्राइवेट लोगों की मदद ली जाती है। इतना बड़ा सिस्टम होने के बाद इंतजाम नहीं है।
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एक तरफ बिजली विभाग के अफसर गलत काम को रोकने के लिए लगातार कदम उठा रहे हैं। वहीं खास बात यह है कि बिजली महकमे में लाइनमैन से लेकर मीटर तक निजी लोगों के हाथों में हैं। इस कारण संविदा पर कार्य करने वाले कर्मी समय समय पर फायदा उठाते हैं। जवाबदेही जिम्मेदार अधिकारी की होती है। इसे लेकर भी महकमे के अधिकारी खासे परेशान हैं।
उल्लेखनीय है कि बिजली विभाग में नियमित स्टाफ की काफी कमी चल रही है। इस कारण जिले के 65 बिजलीघरों पर करीब 600 संविदा कर्मी बिजली आपूर्ति को सुचारू करने में लगे हुए हैं। इसके अलावा विभाग में कार्यालयों में कंप्यूटर आपरेटर भी प्राइवेट हैं। मीटर की रीडिंग के लिए एजेंसी के जरिए कार्य कराया जा रहा है।
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इसके बाद मीटर लगाने वाले चंद कर्मी है। इस कारण मीटरों को लगवाने में ठेकेदार के लोगों की मदद ली जाती है। इसके अलावा विभाग के पास पर्याप्त संसाधनों की भी कमी है। जब तत्काल में लाइन दुरुस्त करानी हो या फिर अन्य कोई काम हो। इसके लिए ठेकेदार के प्राइवेट लोगों की मदद ली जाती है। इतना बड़ा सिस्टम होने के बाद इंतजाम नहीं है।
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