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Hathras News: ऑनलाइन गेमिंग व बेटिंग एप से ठगी करने वाले चार शातिर धरे

Sat, 25 Jul 2026 02:04 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Sat, 25 Jul 2026 02:04 AM IST
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Four cunning fraudsters running online gaming and betting app scams nabbed.
साइबर ठगी के आरोपियों से बरामद उपकरण व दस्तावेज।  स्रोत : पुलिस - फोटो : Police
साइबर क्राइम टीम ने शुक्रवार को मथुरा-बरेली हाईवे पर मेंडू स्थित भूमिगत मार्ग से चार शातिरों को गिरफ्तार कर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी वेबसाइट्स व अन्य ऐप के माध्यम से ठगी करता था। गिरोह फर्जी (शेल) कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर करोड़ों रुपये ठिकाने लगाता था। पुलिस ने इनके पास से मोबाइल, टैबलेट और फर्जी कागजात बरामद किए हैं। सिम कार्ड, बैंक चेक बुक और ठगी की नकदी भी मिली है।
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पुलिस पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। एसपी चिरंजीवनाथ सिन्हा ने बताया कि चमरुआ, मुरसान निवासी मुख्य आरोपी माधव शर्मा ने अहम खुलासे किए हैं। उसने बताया कि वह पहले star66.co गेमिंग ऐप पर सट्टा और जुआ खेलता था। ज्यादा पैसों के लेन-देन से उसका संपर्क ऐप संचालकों से हुआ। इसके बाद व्हाट्सएप पर उनकी बातचीत शुरू हुई। वेबसाइट चलाने वाले शातिरों ने उसे ठगी के तरीके बताए। वे बैंक अधिकारी बनकर केवाईसी के नाम पर या फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर हवाला का पैसा आने की धमकी देकर सीधे-साधे लोगों से ओटीपी व अन्य बैंक विवरण ले लेते थे। व्हाट्सएप पर एपीके फाइल या वायरस भेजकर फोन हैक करते थे। इससे पीड़ित का बैंकिंग डाटा चोरी हो जाता था। शातिरों को पकड़ने वाली टीम में साइबर क्राइम थाना प्रभारी आशीष कुमार, एसआई सचिन कुमार, नवीन कुमार व अन्य पुलिस कर्मी मौजूद रहे।
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कमीशन के लालच में दोस्तों को जोड़ा साइबर ठगों को ठगी का पैसा ट्रांसफर करने के लिए फर्जी बचत और चालू खाता चाहिए थे। इसके बदले वे भारी कमीशन देने का लालच देते थे। माधव शर्मा ने इस काम में अपने तीन दोस्तों दुर्गेश कुमार, कन्हैया सिंह और दीपक शर्मा उर्फ दीपू को शामिल किया। दुर्गेश आगरा के गुढ़ा बहरामपुर, खंदौली का निवासी है। कन्हैया और दीपक हाथरस के जारऊ, सादाबाद निवासी हैं। ये चारों आरोपी उज्जैन के एक मुख्य सरगना के इशारे पर काम करते थे।
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फर्जी आधार और शेल कंपनियों का नेटवर्क
पूछताछ में दुर्गेश, कन्हैया व दीपक ने कबूला कि वे माधव के साथ मिलकर फर्जी आधार कार्ड तैयार करते थे। इन फर्जी आधार कार्डों के आधार पर फर्जी जीएसटी और उद्यम रजिस्ट्रेशन कराकर कागजों पर फर्जी कंपनियां बना लेते थे। इसके बाद बैंकों में बचत और चालू खाते खुलवाए जाते थे। इन फर्जी खातों में ठगी के करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए जाते थे। बैंक खातों में आने वाले कमीशन का आधा हिस्सा ये खाताधारक को देते थे और बाकी आधा पैसा आपस में बांट लेते थे। फर्जी खातों के जरिए इन आरोपियों की लाखों रुपये की काली कमाई हो रही थी।
दोस्तों का नेटवर्क बनाया
इस गिरोह ने बैंक खातों के लिए अपना नेटवर्क और बढ़ाया। उन्होंने अपने परिचितों व दोस्तों को भी इसमें जोड़ा। इनसे खाते खुलवाकर करोड़ों रुपये ट्रांसफर कराए गए। साइबर धोखाधड़ी की स्कीम समझाकर कमीशन के रुपये बांटे जाते थे। खाताधारक को ठगी की आधी रकम दी जाती थी। शातिर माधव ने हाल ही में आगरा के नैनीताल बैंक शाखा में सात खाते खुलवाए थे। इन खातों में ठगी की रकम आनी थी। पुलिस ने गिरफ्तारी से पहले ही इनकी चेक बुक भी प्राप्त कर ली थी। सात पुराने खाते भी पता चले हैं जिन पर एनसीआरपी पोर्टल की छह शिकायतें थीं।
ठगों से यह सामान हुआ बरामद
ठगों से एक टैबलेट, सात मोबाइल स्मार्टफोन, 17 सिम कार्ड, नौ पासबुक, 11 चेक बुक, दो चेक, 15 मोहरें, आठ डेबिट कार्ड, पांच क्यूआर कोड, दो ट्रेड बुक, स्टांप पैड, बैंक खाते खोलने के फॉर्म, जीएसटी प्रमाणपत्र, आठ आधार कार्ड और पांच हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं। यह नकदी भी ठगी के धंधे से ही कमाई गई थी। पुलिस अब उज्जैन और अन्य राज्यों से जुड़े सरगनाओं की तलाश कर रही है।
आजीवन कारावास तक की सजा
इन चारों ठगों पर जो धाराएं लगी हैं उनमें आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा 10 वर्ष तक की कैद व जुर्माना लग सकता है। मूल्यवान प्रतिभूति व बैंक दस्तावेजों की कूटरचना पर भी यही सजा है। कंप्यूटर या संचार साधन से पहचान बदलकर धोखाधड़ी में तीन वर्ष तक की कैद व एक लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा का प्रावधान है। धोखाधड़ी में सात वर्ष तक की कैद व जुर्माना, पहचान बदलकर धोखाधड़ी करने पर पांच वर्ष व फर्जी दस्तावेज बनाने पर सात वर्ष तक की कैद व जुर्माने का प्रावधान है।

ठगी से बचने के लिए ये सावधानियां रखें
-अनजान गेमिंग ऐप या वेबसाइट डाउनलोड न करें। एप केवल आधिकारिक स्टोर से ही इंस्टॉल करें।
-ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी, पासवर्ड या बैंक की जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
-किसी गेम या टूर्नामेंट में शामिल होने से पहले कंपनी की विश्वसनीयता और नियम जांच लें।
- रुपये दोगुने करने, गारंटीड जीत या फ्री बोनस जैसे लालच से सावधान रहें।
-किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर रिमोट एक्सेस एप जैसे ऐनी डेस्क आदि इंस्टॉल न करें।
-ठगी होने पर तुरंत बैंक/भुगतान सेवा को सूचित करें और भारत में 1930 पर साइबर अपराध हेल्पलाइन या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल शिकायत दर्ज करें।
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