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फूड प्वायजनिंग से बिगड़ी 23 छात्राओं की हालत
अमर उजाला, हाथरस
Updated Thu, 08 Dec 2016 11:15 PM IST
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जिला अस्पताल में छात्राओं का उपचार करती स्वास्थ्य कर्मी।
- फोटो : अमर उजाला
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कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की कक्षा छह से आठवीं तक की 23 छात्राआें की हालत फूड प्वॉयजनिंग के कारण शुक्रवार शाम को अचानक बिगड़ गई। इनमें से 20 छात्राओं को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। पेट दर्द, उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत पर छात्राओं को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल के सीएमएस डॉ.एमएल अग्रवाल के निर्देशन में इमरजेंसी में डॉक्टर और बाकी स्टाफ छात्राओं के उपचार में जुट गया। बीएसए रेखा सुमन खुद छात्राओं को उपचार दिलाने के लिए वहां डटी रहीं। रात को डीएम अविनाश कृष्ण सिंह भी अस्पताल पहुंचे और छात्राओं का हाल जाना। स्कूल में देर रात डीएम के आदेश पर पहुंची डॉक्टर्स की टीम ने जांच में तीन अन्य छात्राओं को भी बीमार पाया।
जिन छात्राओं को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, उनमें हिना, ईशा, मुस्कान, निशा, सीमा, सोनिया, चांदनी, कुमकुम, गुलबहार, प्रियंका, रंजना, अंजलि, शिवानी, संजना, खुशबू, प्रीति, राधा, नेहा, काजल और सोनी शामिल थीं। इनमें से एक ईशा ने बताया कि सुबह दस बजे दलिया खाने के बाद से ही उसे बुखार और उल्टी-दस्त की शिकायत होने लगी थी।
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इस बारे में उसने विद्यालय की शिक्षिका को भी बताया था। इस पर उसे एक टेबलेट भी दी गई थी, लेकिन उससे कोई फायदा नहीं मिला। एक बजे विद्यालय की मेस में बना खाना छात्राओं ने खाया। इसमें उन्होंने आलू-बैंगन की सब्जी, रोटी और दाल-चावल खाए। शाम होते-होते कई छात्राओं की हालत एक साथ बिगड़ने लगी।
तब जाकर विद्यालय की शिक्षिका ने इसे गंभीरता से लिया। विद्यालय के शिक्षक और शिक्षिका छात्राओं को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे और बीएसए को जानकारी दी। अस्पताल में उपचार के दौरान ज्यादातर छात्राओं का रो-रोकर बुरा हाल था। जो छात्राएं स्थानीय थीं, उनके माता-पिता भी अस्पताल पहुंच गए थे। अस्पताल में उपचार के बाद छात्राओं की हालत सामान्य हो गई।
कुछ छात्राओं ने नहाने के लिए विद्यालय में गर्म पानी का इंतजाम नहीं होने की शिकायत भी की। हाथरस के सपा प्रत्याशी मूलचंद्र निम भी अस्पताल पहुंच गए और बीमार बच्चियों का हाल जाना।
हाथरस के सपा प्रत्याशी मूलचंद्र निम भी अस्पताल पहुंच गए और बीमार बच्चियों का हाल जाना।
कस्तूरबा स्कूल की छात्राओं ने जो खाना खाया था, उसकी क्वालिटी की जांच कराई जाएगी। इस मामले में विभागीय स्टाफ की भूमिका की भी जांच होगी। प्रथमदृष्टया स्कूल की वार्डन प्रतिभा भारद्वाज की सेवा समाप्त कर दी गई है।
-अविनाशकृष्ण सिंह, डीएम हाथरस
इसे पूरी तरह फूड प्वॉयजनिंग का मामला नहीं माना जा सकता, लेकिन इतना तय है कि हालत खाना खाने के बाद फैले संक्रमण से ही बिगड़ी है। इसमें से कुछ को तेज बुखार और सर्दी की शिकायत भी है। अगर छात्राओं को सुबह ही यहां ले आया जाता तो हालत इतनी नहीं बिगड़ती। सभी 18 छात्राओं को भर्ती किया गया है। सभी की हालत सामान्य है।
- डॉ. एमएल अग्रवाल, सीएमएस, जिला अस्पताल
मेस में बने खाने से छात्राओं के हालत बिगड़ने की आशंका नजर आ रही है। इस बारे में पता किया जाएगा कि सुबह के नाश्ते और दोपहर के भोजन को बनाने में क्या लापरवाही की गई। इस मामले की जांच कर दोषी लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- रेखा सुमन, बीएसए हाथरस
वहीं कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों की बच्चियों के खाने की गुणवत्ता को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग गंभीर नहीं है। यही वजह है कि कुछ महीनों के भीतर ही इस संस्था की छात्राएं दूसरी बार फूड प्वाइजनिंग की शिकार हुई हैं। इससे पूर्व सहपऊ के कस्तूरबा स्कूल की छात्राएं भी फूड प्वाइजनिंग की शिकार बन चुकी हैं।
शासन की ओर से साफ निर्देश हैं कि बच्चियों के लिए पकने वाले भोजन को पहले विद्यालय की वार्डन एवं शिक्षिकाओं द्वारा खाकर चेक किया जाएगा। बीच-बीच में विभागीय अधिकारी एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम से भी भोजन की चेकिंग कराए जाने का नियम है। एफडीए की टीम द्वारा खाने के नमूने भी भरे जाने चाहिए, जिससे इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
इन विद्यालयों में खाने की सप्लाई एनजीओ के माध्यम से की जाती है। इन एनजीओ संचालकों का सीधा विभागीय अधिकारियों से संपर्क रहता है। किस एनजीओ के खाने और दैनिक उपयोग की सामग्री की सप्लाई दी जानी है, यह जिला स्तरीय टीम द्वारा तय होता है।
एनजीओ संचालक विद्यालय की वार्डन और शिक्षिकाओं से सिर्फ खाने का ऑर्डर लेते हैं। इसके बाद खान-पान की वस्तुओं की सप्लाई अपने हिसाब से करते हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम बच्चियों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए भी कभी-कभार पहुंचती है। इसी ढिलाई का नतीजा है कि बच्चियों के बीमार होने की यह दूसरी घटना हुई है।
शासन की नीतियों के अनुसार कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की बच्चियों के लिए फर्स्ट एड बॉक्स की भी व्यवस्था की जाती है, जिससे बच्चियों को रात में बुखार, उल्टी-दस्त आदि सामान्य बीमारियों की शिकायत होने पर वार्डन और शिक्षिकाओं द्वारा दवा दी जा सके। विभागीय लापरवाही का ही प्रतिफल है कि वार्डन के लगातार इस बारे में विभाग से पत्राचार करने के बावजूद विभाग लंबे समय से अनसुनी कर रहा है।
हाथरस। डीएम ने कस्तूरबा स्कूल की बच्चियों के बीमार होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की एक टीम देर रात ही स्कूल में दूसरी बच्चियों के चेकअप के लिए रवाना की। स्कूल में गुरुवार को कुल 75 बच्चियां थीं, जिनमें से 18 बच्चियां खाना खाने के बाद बीमार पड़ीं। डीएम ने रात में ही बेसिक स्कूलों की करीब 12 शिक्षिकाओं को जिला अस्पताल बुलवा लिया और उन्हें बीमार बच्चियों की देखभाल के लिए तैनात कर दिया।
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अस्पताल के सीएमएस डॉ.एमएल अग्रवाल के निर्देशन में इमरजेंसी में डॉक्टर और बाकी स्टाफ छात्राओं के उपचार में जुट गया। बीएसए रेखा सुमन खुद छात्राओं को उपचार दिलाने के लिए वहां डटी रहीं। रात को डीएम अविनाश कृष्ण सिंह भी अस्पताल पहुंचे और छात्राओं का हाल जाना। स्कूल में देर रात डीएम के आदेश पर पहुंची डॉक्टर्स की टीम ने जांच में तीन अन्य छात्राओं को भी बीमार पाया।
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जिन छात्राओं को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, उनमें हिना, ईशा, मुस्कान, निशा, सीमा, सोनिया, चांदनी, कुमकुम, गुलबहार, प्रियंका, रंजना, अंजलि, शिवानी, संजना, खुशबू, प्रीति, राधा, नेहा, काजल और सोनी शामिल थीं। इनमें से एक ईशा ने बताया कि सुबह दस बजे दलिया खाने के बाद से ही उसे बुखार और उल्टी-दस्त की शिकायत होने लगी थी।
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इस बारे में उसने विद्यालय की शिक्षिका को भी बताया था। इस पर उसे एक टेबलेट भी दी गई थी, लेकिन उससे कोई फायदा नहीं मिला। एक बजे विद्यालय की मेस में बना खाना छात्राओं ने खाया। इसमें उन्होंने आलू-बैंगन की सब्जी, रोटी और दाल-चावल खाए। शाम होते-होते कई छात्राओं की हालत एक साथ बिगड़ने लगी।
तब जाकर विद्यालय की शिक्षिका ने इसे गंभीरता से लिया। विद्यालय के शिक्षक और शिक्षिका छात्राओं को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे और बीएसए को जानकारी दी। अस्पताल में उपचार के दौरान ज्यादातर छात्राओं का रो-रोकर बुरा हाल था। जो छात्राएं स्थानीय थीं, उनके माता-पिता भी अस्पताल पहुंच गए थे। अस्पताल में उपचार के बाद छात्राओं की हालत सामान्य हो गई।
कुछ छात्राओं ने नहाने के लिए विद्यालय में गर्म पानी का इंतजाम नहीं होने की शिकायत भी की। हाथरस के सपा प्रत्याशी मूलचंद्र निम भी अस्पताल पहुंच गए और बीमार बच्चियों का हाल जाना।
हाथरस के सपा प्रत्याशी मूलचंद्र निम भी अस्पताल पहुंच गए और बीमार बच्चियों का हाल जाना।
कस्तूरबा स्कूल की छात्राओं ने जो खाना खाया था, उसकी क्वालिटी की जांच कराई जाएगी। इस मामले में विभागीय स्टाफ की भूमिका की भी जांच होगी। प्रथमदृष्टया स्कूल की वार्डन प्रतिभा भारद्वाज की सेवा समाप्त कर दी गई है।
-अविनाशकृष्ण सिंह, डीएम हाथरस
इसे पूरी तरह फूड प्वॉयजनिंग का मामला नहीं माना जा सकता, लेकिन इतना तय है कि हालत खाना खाने के बाद फैले संक्रमण से ही बिगड़ी है। इसमें से कुछ को तेज बुखार और सर्दी की शिकायत भी है। अगर छात्राओं को सुबह ही यहां ले आया जाता तो हालत इतनी नहीं बिगड़ती। सभी 18 छात्राओं को भर्ती किया गया है। सभी की हालत सामान्य है।
- डॉ. एमएल अग्रवाल, सीएमएस, जिला अस्पताल
मेस में बने खाने से छात्राओं के हालत बिगड़ने की आशंका नजर आ रही है। इस बारे में पता किया जाएगा कि सुबह के नाश्ते और दोपहर के भोजन को बनाने में क्या लापरवाही की गई। इस मामले की जांच कर दोषी लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- रेखा सुमन, बीएसए हाथरस
वहीं कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों की बच्चियों के खाने की गुणवत्ता को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग गंभीर नहीं है। यही वजह है कि कुछ महीनों के भीतर ही इस संस्था की छात्राएं दूसरी बार फूड प्वाइजनिंग की शिकार हुई हैं। इससे पूर्व सहपऊ के कस्तूरबा स्कूल की छात्राएं भी फूड प्वाइजनिंग की शिकार बन चुकी हैं।
शासन की ओर से साफ निर्देश हैं कि बच्चियों के लिए पकने वाले भोजन को पहले विद्यालय की वार्डन एवं शिक्षिकाओं द्वारा खाकर चेक किया जाएगा। बीच-बीच में विभागीय अधिकारी एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम से भी भोजन की चेकिंग कराए जाने का नियम है। एफडीए की टीम द्वारा खाने के नमूने भी भरे जाने चाहिए, जिससे इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
इन विद्यालयों में खाने की सप्लाई एनजीओ के माध्यम से की जाती है। इन एनजीओ संचालकों का सीधा विभागीय अधिकारियों से संपर्क रहता है। किस एनजीओ के खाने और दैनिक उपयोग की सामग्री की सप्लाई दी जानी है, यह जिला स्तरीय टीम द्वारा तय होता है।
एनजीओ संचालक विद्यालय की वार्डन और शिक्षिकाओं से सिर्फ खाने का ऑर्डर लेते हैं। इसके बाद खान-पान की वस्तुओं की सप्लाई अपने हिसाब से करते हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम बच्चियों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए भी कभी-कभार पहुंचती है। इसी ढिलाई का नतीजा है कि बच्चियों के बीमार होने की यह दूसरी घटना हुई है।
शासन की नीतियों के अनुसार कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की बच्चियों के लिए फर्स्ट एड बॉक्स की भी व्यवस्था की जाती है, जिससे बच्चियों को रात में बुखार, उल्टी-दस्त आदि सामान्य बीमारियों की शिकायत होने पर वार्डन और शिक्षिकाओं द्वारा दवा दी जा सके। विभागीय लापरवाही का ही प्रतिफल है कि वार्डन के लगातार इस बारे में विभाग से पत्राचार करने के बावजूद विभाग लंबे समय से अनसुनी कर रहा है।
हाथरस। डीएम ने कस्तूरबा स्कूल की बच्चियों के बीमार होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की एक टीम देर रात ही स्कूल में दूसरी बच्चियों के चेकअप के लिए रवाना की। स्कूल में गुरुवार को कुल 75 बच्चियां थीं, जिनमें से 18 बच्चियां खाना खाने के बाद बीमार पड़ीं। डीएम ने रात में ही बेसिक स्कूलों की करीब 12 शिक्षिकाओं को जिला अस्पताल बुलवा लिया और उन्हें बीमार बच्चियों की देखभाल के लिए तैनात कर दिया।