फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   First, crops were ruined by the rains; now, farmers are trapped in a vicious cycle.

Hathras News: पहले बारिश से फसल हुई बर्बाद, अब चक्रव्यूह में फंसे किसान

Sat, 18 Apr 2026 01:53 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Sat, 18 Apr 2026 01:53 AM IST
विज्ञापन
First, crops were ruined by the rains; now, farmers are trapped in a vicious cycle.
हाथरस जंक्शन क्षेत्र में गेहूं की फसल सुखाते किसान। संवाद - फोटो : Samvad
जिले के किसानों पर इस समय दोहरी मार पड़ रही है। पहले बारिश और ओलावृष्टि ने उनकी सोने जैसी गेहूं की फसल को मिट्टी में मिला दिया और अब बैंक का कर्ज चुकाने की चिंता उन्हें खाए जा रही है। वर्तमान में जिले के 42,699 किसान करीब 1232.12 करोड़ रुपये के भारी-भरकम कर्ज के बोझ तले दबे हैं।
विज्ञापन





आंकड़ों के अनुसार जिले के हजारों किसानों ने खेती के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिये बैंकों से कर्ज लिया था। किसानों को उम्मीद थी कि गेहूं की बंपर पैदावार होगी, जिसे बेचकर वे न केवल कर्ज उतारेंगे, बल्कि घर की जिम्मेदारियां भी पूरी करेंगे, लेकिन कटाई के वक्त हुई बारिश ने उनकी योजनाओं को मटियामेट कर दिया है।
विज्ञापन




किसानों का कहना यदि केसीसी का ऋण समय पर नहीं चुकाया जाता, तो मिलने वाली ब्याज सब्सिडी खत्म हो जाती है। ऐसे में किसान पर ब्याज का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा। किसान अब सरकार से विशेष राहत पैकेज और कर्ज माफी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन




गौरतलब है कि बारिश और ओलावृष्टि गेहूं की लहलहाती फसल अब खेतों में बिछ चुकी हैं। कहीं दाना काला पड़ गया है, तो कहीं भूसा तक सड़ चुका है। कर्ज लेकर खेती करने वाले किसान अब अपनी सुध-बुध खो रहे हैं और उन्हें भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। संवाद




केस-01
ब्याज और कर्जदाताओं के चक्रव्यूह में फंसे हरेंद्र सिंह

गांव चंदनपुर के किसान हरेंद्र सिंह ने अपनी व्यथा बताते हुए बताया कि उन्होंने नौ हजार रुपये प्रति बीघा की दर से 10 बीघा खेत बंटाई पर लिया था। खेती के लिए उन्होंने भारी ब्याज पर रुपये लिए थे। उनकी 10 बीघा की गेहूं की फसल पूरी तरह बेकार हो गई है। कर्जदाता घर पर रुपये मांगने आ रहे हैं, लेकिन उनके पास देने के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने हाथ जोड़कर समय मांगा है, लेकिन समझ नहीं आता कि यह कर्ज कैसे उतरेगा। मैं पूरी तरह बर्बाद हो चुका हूं।







केस-02



बैंक के कर्ज ने बढ़ाई प्रवीण-टीकम की चिंता

गांव बरौली के प्रवीण कुमार और टीकम सिंह की कहानी भी इससे अलग नहीं है। प्रवीण ने बैंक से दो लाख रुपये का केसीसी के जरिये कर्ज लेकर अपनी 22 बीघा जमीन पर गेहूं की फसल बोई थी। पूरी फसल बर्बाद होने से अब उन्हें बैंक के नोटिस का डर सता रहा है। गांव के ही टीकम सिंह बताते हैं कि केवल गेहूं ही नहीं, बल्कि पशुओं के चारे (भूसे) का भी भारी नुकसान हुआ है। रात-दिन बस यही चिंता रहती है कि बैंक का कर्ज कैसे चुकाऊंगा।



गेहूं का हाल : दाना काला पड़ गया और कटाई के लायक नहीं बचा।
भूसे का संकट : बारिश के कारण भूसा काला पड़ चुका है, जिससे पशुओं के सामने भी चारे का संकट खड़ा हो गया है।



बैंक -- वित्तीय वर्ष में जारी केसीसी -- जारी की गई धनराशि (करोड़ में)
लीड बैंक -- 18041 -- 769.91
नॉन लीड बैंक -- 291 -- 6.98
प्राइवेट बैंक -- 3706 -- 52.68
कोऑपरेटिव बैंक -- 2368 -- 13.97
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक -- 18293 -- 388.58
कुल -- 42699 -- 1232.12





सर्वाधिक केसीसी जारी करने वाला बैंक -- एसबीआई
एसबीआई द्वारा जारी धनराशि -- 427.47
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed