फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Father-son sentenced to seven years imprisonment for dowry death

Hathras News: दहेज हत्या के 15 साल पुराने मामले में आया फैसला, पिता-पुत्र को सात साल की कैद

Sat, 28 Mar 2026 09:45 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sat, 28 Mar 2026 09:45 PM IST
सार

किरन देवी की शादी जितेंद्र उर्फ जीतम से हुई। ससुराल वाले दहेज से संतुष्ट नहीं थे।अतिरिक्त दहेज के लिए पति, जेठ, ससुर, सास आदि आए दिन उसका मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न करते थे। 13 मई 2011 की सुबह किरन देवी की मौत हो गई।

विज्ञापन
Father-son sentenced to seven years imprisonment for dowry death
कोर्ट - फोटो : सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

हाथरस के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश माधवी सिंह की कोर्ट ने दहेज हत्या के 15 साल पुराने मामले में जेठ व ससुर को दोष सिद्ध करते हुए सात-सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। महिला का अतिरिक्त दहेज के लिए महिला उत्पीड़न किया गया था, जिसके चलते उसकी मौत हुई।

विज्ञापन


आगरा के एत्मादपुर क्षेत्र के गांव मितावली निवासी सुरेशचंद्र ने 13 मई 2011 को कोतवाली हाथरस गेट में दहेज हत्या व दहेज उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सुरेश ने एफआईआर में बताया था कि उन्होंने अपनी बेटी किरन देवी की शादी 21 नवंबर 2007 को जितेंद्र उर्फ जीतम पुत्र प्रभुदयाल निवासी गढ़ी गिरधर से की थी। ससुराल वाले दहेज से संतुष्ट नहीं थे।
विज्ञापन


अतिरिक्त दहेज के लिए पति जितेंद्र, जेठ बहादुर सिंह, ससुर प्रभुदयाल, सास रामश्री व परिवार के अन्य लोग आए दिन उसका मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न करते थे, जिससे परेशान होकर वह 12 मई 2011 को बेटी को लेने पहुंचे थे, लेकिन ससुरालियों ने बेटी को नहीं भेजा। 13 मई की सुबह जानकारी मिली कि उनकी बेटी की मौत हो गई। मायके वालों को जिला अस्पताल में किरन का शव मिला था।

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रकरण में विवेचना करते हुए पुलिस ने जितेंद्र, बहादुर, प्रभुदयाल व रामश्री के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। प्रकरण विचारण के लिए एडीजी एफटीसी कोर्ट द्वितीय में पहुंचा। विचारण के दौरान ही रामश्री की मौत हो गई थी। पति जितेंद्र की भी मृत्यु की जानकारी न्यायालय को दी गई थी। अभियुक्त बहादुर सिंह ने मृत्यु प्रमाण पत्र की छाया प्रति भी लगाई थी, लेकिन उससे यह साबित नहीं हो सका कि जितेंद्र की मृत्यु हो चुकी है। इसलिए न्यायालय ने उसकी फाइल पृथक कर दी।

शनिवार को एडीजे माधवी सिंह ने बहादुर व प्रभुदयाल की फाइल पर सुनवाई करते हुए अंतिम निर्णय दिया। गवाह व सबूतों के आधार पर दोनों पर आरोप सिद्ध पाए गए। न्यायालय ने मृतका के जेठ बहादुर व ससुर प्रभुदयाल को दहेज हत्या में सात-सात साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। दहेज उत्पीड़न में दो साल की कैद व एक-एक हजार रुपये जुर्माना तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम में दो साल की कैद व एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed