Potato: बढ़ रही लागत, मुनाफा हो रहा कम, इस बार सब्जियों के राजा आलू को नहीं मिला भाव, बेहाल किसान
किसानों का कहना है कि मौजूदा भाव में किसानों को घाटा हो रहा है। इसलिए शीतगृह से नहीं निकाल रहे। अगस्त माह में भाव बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। लागत बढ़ रही है और मुनाफा कम हो रहा है।
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सब्जियों के राजा को इस बार बाजार में भाव नहीं मिल रहा है। दाम नहीं बढ़ने से आलू की शीतगृहों से निकासी नहीं हो रही है। 271 कोल्ड स्टोरों में पौने दो करोड़ बोरं पड़े हुए हैं। हाथरस में पिछले चार माह में 35 और अलीगढ़ में 30 प्रतिशत मीट्रिक टन आलू की निकासी शीतगृहों से हो पाई है। करीब आठ लाख 89 हजार मीट्रिक टन आलू शीतगृहों में जमा है, जिसकी अगले दो माह में निकासी होनी है। हालात नहीं सुधरे तो आलू की बेकद्री हो सकती है और सड़कों पर फेंकने जैसी नौबत आ सकती है।
उद्यान विभाग भी किसानों को आलू निकालने के लिए चेता रहा है। किसान परेशान है कि इस बार भाड़ा निकल भी पाएगा या नहीं। शीतगृह एसोशिएशन के अध्यक्ष गिर्राज गोदानी बताते हैं कि इस बार अलीगढ़ में आलू का रक्बा करीब हजार हेक्टेयर बढ़ा था और पैदावार भी 15 प्रतिशत अधिक हुई। 36,000 हजार हेक्टेयर में आलू था। उन्होंने बताया कि इसमें से 30 प्रतिशत की ही निकासी हो पाई है। पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी बंगाल, मध्यप्रदेश में भी आलू की अच्छी पैदावार हुई है। फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज को भी पर्याप्त माल मिला है। बाजार में मांग कम हुई है।
शीतगृह मालिकों की माने तो हाथरस पिछले दो साल से भाव भी अच्छा मिल रहा था। इस बार 52 हजार हेक्टेयर करीब हेक्टेयर में आलू की पैदावार हुई है। मार्च 2025 तक आलू का भंडारण हुआ और मई से निकासी शुरू हो गई। मई माह से अगस्त माह तक करीब चार लाख मीट्रिक टन यानी 35 फीसदी ही आलू की ही निकासी हो पाई है। पिछले साल में इस समय तक 50 फीसदी आलू की निकासी हो जाती थी।
आलू की स्थिति इस बार चिंताजनक है। बाजार की स्थिति को देखते हुए 10 से 20 फीसदी आलू शीतगृहों में रह सकता है। 31 अक्तूबर तक आलू की निकासी का समय होता है। सरकार इसे नवबंर तक बढ़ा सकती है। पंजाब की आने वाली सीजन की फसल लेट होने पर ही कुछ राहत मिल सकती है। सरकार को चाहिए कि गोशालाओं और मिड डे मिल के लिए आलू की खरीद कराकर मांग बढ़ा दें, जिससे किसानों को राहत मिल जाए।-गिर्राज गोदानी, अध्यक्ष शीतगृह एसोसिएशन, अलीगढ़
इस बार बहुत कम निकासी हुई है। हरी सब्जियों की अच्छी पैदावार और हाइब्रिड आलू की वजह से भी किसानों को फसल का अच्छा रेट नहीं मिल पा रहा है।-निरंजन सिंह शास्त्री, शीतगृह संचालक, हाथरस।
सामान्य आलू का अच्छा रेट नहीं मिल पा रहा है। आलू की शीतगृहों से बिक्री नहीं हो पा रही है। अगर समय रहते आलू की निकासी न हुई तो भारी नुकसान होने की संभावना है।-रविकांत अग्रवाल, शीतगृह संचालक, हाथरस
आलू की निकासी के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। किसान रेट बढ़ने की उम्मीद में आलू की निकासी नहीं कर रहे हैं। समय काफी कम है, किसान आलू की निकासी कर लें। बुवाई का समय भी आने वाला है।-डॉ. सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी, हाथरस।
पिछले साल से आधा है भाव
व्यापारियों और किसानों के अनुसार इस समय शीतगृहों से 3797 प्रजाति का आलू 550 से 650 प्रति पैकेट (40किलोग्राम) तक बिक रहा है, जबकि पिछले साल यह 1300 से 1400 रुपये प्रति पैकेट बिका था। हाइब्रिड आलू इस बार 300 से 500 तक बिक रहा है, जबकि पिछले साल यही आलू 1100 से 1200 रुपये प्रति पैकेट तक बिक गया था।
बढ़ रही लागत, मुनाफा हो रहा कम
किसानों का कहना है कि मौजूदा भाव में किसानों को घाटा हो रहा है। इसलिए शीतगृह से नहीं निकाल रहे। अगस्त माह में भाव बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। लोकेरा निवासी किसान दीपू चौधरी बताते हैं कि एक बीघा खेत में 50 पैकेट आलू हुआ। इसमें करीब 25 हजार रुपये की लागत आई। 130 रुपये कोल्ड स्टोरेज भाड़ा, 32 रुपये का बारदाना और 12 रुपये प्रति पैकेट शीतगृह तक पहुंचाने में खर्च हो गए। भाव 400 रुपये प्रति पैकेट मिलने से घाटा है। हाथरस के गांव टीकैत अरौठा निवासी मनोज कुमार का कहना है कि एक बीघा खेत में करीब 45 से 50 पैकेट आलू पैदा होता हैं। इसमें 30 से 35 पैकेट मोटे आलू के होते हैं, जिसका भाव 500 रुपये तक चल रहा है। 15-20 पैकेट गुल्ला होता है, जिसका भाव 300 रुपये है। पांच पैकेट किर्री (छोटा आलू) के निकलते हैं, जिसका भाव 150 रुपये प्रति पैकेट रहता है।
सिकुड़ रहा है यूपी के आलू का बाजार
कारोबारियों के अनुसार उत्तर प्रदेश के आलू का बाजार सिकुड़ रहा है। पंजाब, गुजरात और पश्चिमी बंगाल के आलू ने यूपी के आलू की खपत कम कर दी है। पहले यहां से छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, राजस्थान और हरियाणा में आलू जाता था, लेकिन अब वहां पंजाब का आलू छाया हुआ है। बंगाल ने भी अपना आलू भेजना शुरू कर दिया है। गुजरात में भी अपनी आलू की फसल होने लगी है। इन कारणों से यूपी के आलू की मांग कम हुई है।
मंडल में आलू की खेती पर एक नजर
| जिला | रक्बा हेक्टेयर में | भंडारण मीट्रिक टन में | निकासी |
| हाथरस | 52,000 | 12,00,000 | 4,00,000 |
| अलीगढ़ | 36,000 | 1,25,000 | 36,000 |