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Hathras News: चकबंदी के विरोध में फिर उतरे महासिंहपुर के किसान
Fri, 13 Jun 2025 11:12 PM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Fri, 13 Jun 2025 11:12 PM IST
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हसायन के महासिंहपुर में चकबंदी के विरोध में हुंकार भरते ग्रामीण। स्रोत : स्वयं
- फोटो : samvad
हसायन ब्लाॅक के गांव महासिंहपुर में चकबंदी के विरोध में किसानों ने शुक्रवार को फिर प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि प्रशासन ने उनके साथ धोखा किया है। आश्वासन के 15 दिन बाद भी प्रशासन ने चकबंदी आयुक्त को कोई रिपोर्ट नहीं भेजी है।
गौरतलब है कि गांव में चकबंदी के विरोध में ग्रामीणों ने 23 दिनों तक चकबंदी के विरोध में क्रमिक अनशन किया था। 27 मई को डीएम के निर्देश पर एसडीएम सिकंदराराऊ ने गांव में पहुंचकर किसानों का अनशन समाप्त कराया था।
उन्होंने डीएम की तरफ से किसानों से वादा किया था कि गांव में चकबंदी का कोई भी कार्य नहीं किया जाएगा। यहां हुई वोटिंग के आधार पर जल्द ही चकबंदी आयुक्त को गांव में चकबंदी रुकवाने के लिए फाइल भेज दी जाएगी, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं भेजी है।
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किसानों का कहना है कि वह अब तक कई बार हाथरस जाकर रिपोर्ट की कॉपी मांग चुके हैं, मगर उन्हें हर बार टरका दिया जाता है। उन्हें पता चला है कि अभी तक बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने डीएम तक उनकी फाइल नहीं भेजी है। किसान चंद्रभूषण का कहना है कि डीएम साहब के कहने के बाद भी लेखपाल और कानूनगो गांव में आते हैं और किसानों को आपस में लड़वाने का काम करते हैं।
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गौरतलब है कि गांव में चकबंदी के विरोध में ग्रामीणों ने 23 दिनों तक चकबंदी के विरोध में क्रमिक अनशन किया था। 27 मई को डीएम के निर्देश पर एसडीएम सिकंदराराऊ ने गांव में पहुंचकर किसानों का अनशन समाप्त कराया था।
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उन्होंने डीएम की तरफ से किसानों से वादा किया था कि गांव में चकबंदी का कोई भी कार्य नहीं किया जाएगा। यहां हुई वोटिंग के आधार पर जल्द ही चकबंदी आयुक्त को गांव में चकबंदी रुकवाने के लिए फाइल भेज दी जाएगी, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं भेजी है।
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किसानों का कहना है कि वह अब तक कई बार हाथरस जाकर रिपोर्ट की कॉपी मांग चुके हैं, मगर उन्हें हर बार टरका दिया जाता है। उन्हें पता चला है कि अभी तक बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने डीएम तक उनकी फाइल नहीं भेजी है। किसान चंद्रभूषण का कहना है कि डीएम साहब के कहने के बाद भी लेखपाल और कानूनगो गांव में आते हैं और किसानों को आपस में लड़वाने का काम करते हैं।