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Hathras News: किसानों को बाजरे के अच्छा दाम मिलने की उम्मीद
Fri, 07 Apr 2023 01:44 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Fri, 07 Apr 2023 01:44 AM IST
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संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2023 को मोटा अनाज या पोषक अनाज का अंतरराष्ट्रीय वर्ष घोषित किया है। इस जिले में मोटे अनाज में बाजरा की खेती काफी होती है। खानपान में बाजरा को गेहूं व चावल से ज्यादा पौष्टिक माना जाता है।
बाजरा की खेती पर जलवायु परिवर्तन का ज्यादा असर नहीं पड़ता है और बाजरा सस्ता भी है। इस वर्ष जिले में बाजरा का रकबा इस जिले में बढ़ा है। यहां जिले में 65 हेक्टेयर में बाजरा की फसल हुई है। यह बाजरा बरसात व गर्मी के मौसम में दो बार बोया जाता है। वहीं किसानों का मानना है कि अंर्तराष्ट्रीय बाजार में मोटे अनाज के प्रचार प्रसार से किसानों की बाजरे की फसल को अच्छे दाम मिलेंगे। वहीं इस मोटे अनाज की खपत भी अच्छी होगी।
गर्मी वाला बाजरा अब बोया गया है। तीन हेक्टेयर में फसल की है। मोटा अनाज वर्ष रहने से इस बार लाभ हुआ है। पहले बाजरा के कम रेट मिलते थे। इस बार बरसात वाले बाजरे का दाम दो हजार रुपये कुंतल से अधिक मिले हैं। पहले की अपेक्षा इस बार रेट बढ़े हैं। - सुखवीर, किसान
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मोटा अनाज वर्ष घोषित होने से अनाज खाने के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। किसानों को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। इस फसल में कम लागत में ज्यादा फायदा मिलता है। बाजरे को अंर्तराष्ट्रीय बाजार में अलग से पहचान मिली है। - गजेंद्र, किसान
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बाजरा की खेती पर जलवायु परिवर्तन का ज्यादा असर नहीं पड़ता है और बाजरा सस्ता भी है। इस वर्ष जिले में बाजरा का रकबा इस जिले में बढ़ा है। यहां जिले में 65 हेक्टेयर में बाजरा की फसल हुई है। यह बाजरा बरसात व गर्मी के मौसम में दो बार बोया जाता है। वहीं किसानों का मानना है कि अंर्तराष्ट्रीय बाजार में मोटे अनाज के प्रचार प्रसार से किसानों की बाजरे की फसल को अच्छे दाम मिलेंगे। वहीं इस मोटे अनाज की खपत भी अच्छी होगी।
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गर्मी वाला बाजरा अब बोया गया है। तीन हेक्टेयर में फसल की है। मोटा अनाज वर्ष रहने से इस बार लाभ हुआ है। पहले बाजरा के कम रेट मिलते थे। इस बार बरसात वाले बाजरे का दाम दो हजार रुपये कुंतल से अधिक मिले हैं। पहले की अपेक्षा इस बार रेट बढ़े हैं। - सुखवीर, किसान
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मोटा अनाज वर्ष घोषित होने से अनाज खाने के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। किसानों को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। इस फसल में कम लागत में ज्यादा फायदा मिलता है। बाजरे को अंर्तराष्ट्रीय बाजार में अलग से पहचान मिली है। - गजेंद्र, किसान