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Hathras News: मंडी में तैरती रही किसानों की मेहनत, पानी में बह गईं उम्मीदें

Sat, 13 Jun 2026 02:48 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Sat, 13 Jun 2026 02:48 AM IST
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Farmers' hard work left floating in the mandi; hopes washed away in the water.
मक्का पानी-पानी...अलीगढ़ रोड ​स्थित मंडी समिति में भीगी मक्का। संवाद - फोटो : Samvad
महीनों की मेहनत, लाखों की उम्मीदें और सुनहरी फसल... सबकुछ बृहस्पतिवार रात आई आंधी और बारिश की भेंट चढ़ गया। जिले में मक्के की रिकॉर्ड पैदावार से उत्साहित किसानों को उस समय बड़ा झटका लगा, जब खेतों से बचाकर मंडी पहुंचाई गई फसल भी पानी में डूब गई। मंडी परिसर में खुले में सुखाने के लिए रखी गई मक्का भीगने से आढ़तियों को भी तगड़ा झटका लगा है।
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मंडी में पहले से ही नमी वाली मक्का के कारण किसानों को उचित भाव नहीं मिल रहे थे। दाम सुधरने की उम्मीद में फसल को सड़कों और फड़ों पर सुखाया जा रहा था, लेकिन तेज बारिश ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कई स्थानों पर मक्का पूरी तरह जलमग्न हो गई। आढ़तियों ने तिरपाल से फसल बचाने का प्रयास किया, लेकिन तेज बहाव के आगे यह इंतजाम नाकाफी साबित हुआ।
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सबसे बड़ी चिंता यह है कि दोबारा सुखाने पर मक्का काली पड़ सकती है, जिससे बाजार में उसकी कीमत और गिर जाएगी। जिले में मक्का का रकबा चार वर्षों में 2,145 हेक्टेयर से बढ़कर 17,105 हेक्टेयर पहुंच गया है। इस बार करीब 6.33 लाख क्विंटल उत्पादन का अनुमान है, लेकिन मौसम की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
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15 जून से शुरू होने वाली सरकारी खरीद में केवल सूखी मक्का ही खरीदी जाएगी। ऐसे में भीगी फसल वाले किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,410 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ मिलना भी मुश्किल नजर आ रहा है।


पीडि़त किसानों व आढ़तियों की जुबानी
गीली मक्का के कारण पहले ही दाम कम मिल रहे थे, इसलिए मंडी में इसे सुखाने के लिए डाला गया था। रात की बारिश ने सब भिगो दिया। अब दोबारा सुखाएंगे तो मक्का काली पड़ जाएगी, कोई सही दाम नहीं देगा। ऊपर से बादल फिर बरसने को तैयार हैं।
-जय सिंह, किसान गांव अफोया
30 बीघा में मक्के की खेती है। रात को आई आंधी-बारिश से खड़ी फसल खेत में गिर गई है, जिससे पैदावार घटेगी। जो पकी हुई फसल अभी खेत में खड़ी है, उसमें पानी भरने से सड़न पैदा हो सकती है।

-हरिओम, किसान नगला हीरा

किसान किसी तरह अपनी फसल बचाकर लाता है। दाम कम मिलने पर मैंने सड़क किनारे मक्का सुखाई थी। रात को इस पर तिरपाल भी ढंकी, लेकिन इतनी तेज बारिश आई कि नीचे पानी भर गया। किसान का भारी नुकसान हुआ है।
-उमेश बंसल, आढ़तिया मंडी समिति

शुक्रवार को भी किसान उम्मीद लेकर मंडी आए थे, लेकिन बारिश से भीगी हुई मक्का का कोई उचित दाम देने को तैयार नहीं है। किसान पूरी तरह लाचार है।
-कुलदीप वार्ष्णेय, आढ़तिया मंडी समिति


जिले में मक्का की फसल के प्रमुख आंकड़े
विवरण आंकड़े
इस वर्ष कुल अनुमानित पैदावार
6.33 लाख क्विंटल
वर्ष 2026 में कुल रकबा
17,105 हेक्टेयर
पिछले वर्ष का रकबा
15,584 हेक्टेयर
प्रति बीघा औसत पैदावार
6 से 8 क्विंटल
अब तक मंडियों में कुल आवक
32,000 क्विंटल
मंडी समिति हाथरस में आवक
20,000 क्विंटल
सिकंदराराऊ मंडी में आवक
12,000 क्विंटल
शेष फसल की स्थिति
लगभग 6 लाख क्विंटल फसल अभी भी खेतों में खड़ी अथवा कटाई के दौर में
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