{"_id":"6aa70460070f9c8e8e0a73a7","slug":"even-in-the-age-of-english-hathras-news-c-56-1-hts1003-154124-2026-09-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hathras News: अंग्रेजी के दौर में भी संस्कारों और प्रतियोगी परीक्षाओं की रीढ़ है हिंदी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hathras News: अंग्रेजी के दौर में भी संस्कारों और प्रतियोगी परीक्षाओं की रीढ़ है हिंदी
विज्ञापन
आधुनिक दौर में अंग्रेजी की बढ़ती होड़ के बावजूद मातृभाषा हिंदी की प्रासंगिकता, लोकप्रियता और स्वीकार्यता लगातार मजबूत हो रही है। जिले के वरिष्ठ शिक्षाविदों का कहना है कि हिंदी केवल भावों की अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक जड़ों, वैज्ञानिक चेतना और युवाओं के सुनहरे भविष्य की मजबूत आधारशिला है। साहित्य और संस्कार से लेकर देश की बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं तक में हिंदी का परचम लगातार लहरा रहा है।
हिंदी में हस्ताक्षर करने का आह्वान
कई बार हिंदी का अध्ययन-अध्यापन कराने वाले शिक्षक भी अपनी भाषा में कार्य-व्यवहार करने से हिचकिचाते हैं और अंग्रेजी में हस्ताक्षर करते हैं। प्रोफेसर राजेश ने आह्वान किया कि जब तक हम स्वयं अपनी मातृभाषा को दैनिक जीवन, हस्ताक्षर और प्रशासनिक कार्यों में गौरव के साथ नहीं अपनाएंगे, तब तक इसे इसका वास्तविक सम्मान नहीं मिल पाएगा।
परीक्षाओं में सफलता की कुंजी और सरल मार्ग है हिंदी : डॉ. मंजू वर्मा
आरडी कन्या पीजी कॉलेज की प्राचार्या एवं वरिष्ठ हिंदी प्रवक्ता डॉ. मंजू वर्मा ने बताया कि आज का युग पूरी तरह प्रतिस्पर्धा का है। इस दौर में भी अधिकांश महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं का मूल आधार हिंदी ही है। विद्यार्थियों के लिए हिंदी माध्यम से विषयों को समझना और तैयारी करना बेहद सहज होता है। उन्होंने कहा कि हमारे महाविद्यालय में आज भी हिंदी विषय में छात्राओं की संख्या 300 से अधिक रहती है, जो इस बात का प्रमाण है कि युवाओं का झुकाव अपनी मातृभाषा के प्रति कम नहीं हुआ है।
विज्ञापन
संस्कारों और वैज्ञानिक चेतना से अनुप्राणित है हिंदी : प्रो. राजेश कुमार
सेठ फूलचंद बागला पीजी कॉलेज के हिंदी विभाग के प्रोफेसर राजेश कुमार ने हिंदी के दार्शनिक और रोजगारपरक पक्ष को रेखांकित करते हुए कहा कि हिंदी संस्कारों की भाषा है, जिसमें जीवन लहराता है। हिंदी पूरी तरह वैज्ञानिक चेतना से अनुप्राणित है, क्योंकि इसकी लिपि देवनागरी है। जिस प्रकार संस्कृत की गुणवत्ता अक्षुण्ण है, उसी प्रकार हिंदी भी समृद्ध है। दोनों की लिपि समान होने के बावजूद इसका अपना स्वतंत्र स्वरूप और व्याकरण है। आज अनुवाद, मीडिया, सिनेमा और डिजिटल क्षेत्र के जरिए हिंदी विदेशों तक पहुंच रही है और इसमें रोजगार की असीम संभावनाएं हैं।
विज्ञापन
हिंदी में हस्ताक्षर करने का आह्वान
कई बार हिंदी का अध्ययन-अध्यापन कराने वाले शिक्षक भी अपनी भाषा में कार्य-व्यवहार करने से हिचकिचाते हैं और अंग्रेजी में हस्ताक्षर करते हैं। प्रोफेसर राजेश ने आह्वान किया कि जब तक हम स्वयं अपनी मातृभाषा को दैनिक जीवन, हस्ताक्षर और प्रशासनिक कार्यों में गौरव के साथ नहीं अपनाएंगे, तब तक इसे इसका वास्तविक सम्मान नहीं मिल पाएगा।
विज्ञापन
परीक्षाओं में सफलता की कुंजी और सरल मार्ग है हिंदी : डॉ. मंजू वर्मा
आरडी कन्या पीजी कॉलेज की प्राचार्या एवं वरिष्ठ हिंदी प्रवक्ता डॉ. मंजू वर्मा ने बताया कि आज का युग पूरी तरह प्रतिस्पर्धा का है। इस दौर में भी अधिकांश महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं का मूल आधार हिंदी ही है। विद्यार्थियों के लिए हिंदी माध्यम से विषयों को समझना और तैयारी करना बेहद सहज होता है। उन्होंने कहा कि हमारे महाविद्यालय में आज भी हिंदी विषय में छात्राओं की संख्या 300 से अधिक रहती है, जो इस बात का प्रमाण है कि युवाओं का झुकाव अपनी मातृभाषा के प्रति कम नहीं हुआ है।
विज्ञापन
संस्कारों और वैज्ञानिक चेतना से अनुप्राणित है हिंदी : प्रो. राजेश कुमार
सेठ फूलचंद बागला पीजी कॉलेज के हिंदी विभाग के प्रोफेसर राजेश कुमार ने हिंदी के दार्शनिक और रोजगारपरक पक्ष को रेखांकित करते हुए कहा कि हिंदी संस्कारों की भाषा है, जिसमें जीवन लहराता है। हिंदी पूरी तरह वैज्ञानिक चेतना से अनुप्राणित है, क्योंकि इसकी लिपि देवनागरी है। जिस प्रकार संस्कृत की गुणवत्ता अक्षुण्ण है, उसी प्रकार हिंदी भी समृद्ध है। दोनों की लिपि समान होने के बावजूद इसका अपना स्वतंत्र स्वरूप और व्याकरण है। आज अनुवाद, मीडिया, सिनेमा और डिजिटल क्षेत्र के जरिए हिंदी विदेशों तक पहुंच रही है और इसमें रोजगार की असीम संभावनाएं हैं।