{"_id":"687f77a84f683fa1fb0e89b4","slug":"elderly-parents-were-made-to-travel-by-sitting-in-a-kanwar-2025-07-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hathras: बुजुर्ग मां-बाप को बिठाया कांवड़ में, 120 किलोमीटर की कराई यात्रा, जिसने देखा, देखता रह गया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hathras: बुजुर्ग मां-बाप को बिठाया कांवड़ में, 120 किलोमीटर की कराई यात्रा, जिसने देखा, देखता रह गया
Tue, 22 Jul 2025 05:37 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: चमन शर्मा
Updated Tue, 22 Jul 2025 05:37 PM IST
सार
यह परिवार पिछले वर्ष भी इसी तरह बुजुर्ग दंपती को कांवड़ यात्रा करवा चुका है। राजकुमार ने अपने भतीजों के साथ मिलकर अपने मां-बाप को कांवड़ में बैठाकर यात्रा कराई थी।
विज्ञापन
श्रवण कांवड़ लेकर आते राजकुमार व उनका परिवार
- फोटो : संवाद
विस्तार
सहपऊ क्षेत्र के गांव बुढ़ाइच निवासी बेटों, बहुओं और पोतों ने बुजुर्ग दंपती को पहले बदायूं के कछला घाट पर गंगा स्न्नान कराया। इसके बाद कांवड़ में उनको बैठाकर 120 किमी की पैदल यात्रा करने के बाद गांव के नीलकंठ महादेव मंदिर पर पहुंचे और गंगाजल से भोलेनाथ का अभिषेक कराया।
विज्ञापन
गांव बुढ़ाइच निवासी राजकुमार ने अपने 92 वर्षीय पिता पोतीराम और 85 वर्षीय माता अमान देवी को कांवड़ में बैठाकर बदायूं के कछला गंगा घाट से यात्रा शुरू की। सोमवार की सुबह करीब 10 बजे वह अपने गांव पहुंचे। इस यात्रा में राजकुमार की पत्नी विमलेश व 13 वर्षीय बेटे निशांत के साथ पोतीराम के बड़े बेटे वीरेंद्र कुमार के बेटे योगेश कुमार व उनकी पत्नी यशवती देवी, जितेंद्र कुमार व उनकी पत्नी गीता देवी भी शामिल थीं।
विज्ञापन
यह परिवार बारी-बारी से श्रवण कांवड़ को कंधे पर उठाकर हर-हर महादेव के जयकारों के साथ प्रतिदिन लगभग 20 किलोमीटर की यात्रा करते हुए गांव पहुंचा। पोतीराम और अमान देवी ने बताया कि यह यात्रा उनके बुजुर्ग दादा-दादी की मनोकामना पूरी करने के लिए है। कछला गंगा घाट से 16 जुलाई को गंगाजल लेकर ये सभी गांव के लिए रवाना हुए थे। अमान देवी ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि आज मेरा सपना पूरा हो गया। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मेरे पुत्र, पुत्रवधू और पोते मुझे व मेरे पति को कांवड़ से यात्रा कराके लाए हैं।
विज्ञापन
गौरतलब है कि यह परिवार पिछले वर्ष भी इसी तरह बुजुर्ग दंपती को कांवड़ यात्रा करवा चुका है। राजकुमार ने बताया कि एक वर्ष पूर्व भी उन्होंने अपने भतीजों के साथ मिलकर अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर यात्रा कराई थी। सोमवार की सुबह सहपऊ पहुंचने के बाद इस परिवार के सदस्यों ने मां भद्रकाली मंदिर पर पहुंचकर माथा टेका। इसके बाद गांव पहुंचकर नीलकंठ महादेव का गंगाजल से अभिषेक किया।
पिछले वर्ष भी बुजुर्ग दंपती ने की कांवड़ यात्रा
यह परिवार पिछले वर्ष भी इसी तरह बुजुर्ग दंपती को कांवड़ यात्रा करवा चुका है। राजकुमार ने अपने भतीजों के साथ मिलकर अपने मां-बाप को कांवड़ में बैठाकर यात्रा कराई थी।