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Hathras News: डीएम अंकल..पापा-मम्मी अब दुनिया में नहीं हैं, हम अनाथ हो गए
Tue, 13 Oct 2026 01:53 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 13 Oct 2026 01:53 AM IST
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कलक्ट्रेट में डीएम को अपनी व्यथा सुनाते बच्चे और उनके नाना। संवाद
- फोटो : Samvad
माता-पिता को खो चुके दो मासूम शिवम व दीप्ति सोमवार को जब डीएम के सामने पहुंचे और रुंधे गले से बोले, डीएम अंकल! पापा-मम्मी अब दुनिया में नहीं हैं, अब हम अनाथ हो गए हैं। उनकी पीड़ा ने सभी को भावुक कर दिया। डीएम ने तुरंत दोनों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया तेज कराई।
गांव ऐंहन निवासी दोनों मासूम अपने नाना के साथ जिलाधिकारी सत्यप्रकाश पटेल के समक्ष पहुंचे। बच्चों ने रोते हुए बताया कि एक वर्ष पूर्व सड़क हादसे में उनके माता-पिता की मौत हो चुकी है और उनके दादा-दादी भी इस दुनिया में नहीं हैं। बच्चों की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को तुरंत बुलाया।
उन्होंने प्रोबेशन अधिकारी को इन बच्चों का मुख्यमंत्री बाल विकास योजना के तहत आवेदन कराने के निर्देश दिए, ताकि इन्हें नियमित रूप से इसका लाभ मिल सके। डीएम ने बताया कि बच्चों की मां बीडीसी सदस्य थीं। नियमानुसार किसी सदस्य की मृत्यु पर पंचायत कल्याण कोष से तीन लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है।
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इन बच्चों का यह आवेदन भी एक वर्ष से अटका था, जिसे अब प्राथमिकता से आगे बढ़ाकर निस्तारित करा दिया गया है। इसके अलावा लीड बैंक मैनेजर को बुलाकर बच्चों के माता-पिता के बैंक खाते से जुड़ी बीमा राशि दिलाने की प्रक्रिया के लिए भी आवेदन करा दिया गया है। डीएम ने बताया कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बच्चों को सरकार की सभी वाजिब योजनाओं का लाभ मिले और उनकी पढ़ाई-लिखाई की मुकम्मल व्यवस्था हो।
डीएम ने बताया कि बच्चों के माता-पिता की मृत्यु के बाद उनकी जमीन का एक व्यक्ति द्वारा फर्जी बैनामा कराने का मामला भी सामने आया है। लगभग 40 वर्ष पुराने चकबंदी से जुड़े इस मामले के दस्तावेजों की जांच एडीएम को दी गई है। इस मामले को शीघ्र ही निस्तारित कराकर बच्चों के वैध अधिकारों को सुरक्षित कराया जाएगा।
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गांव ऐंहन निवासी दोनों मासूम अपने नाना के साथ जिलाधिकारी सत्यप्रकाश पटेल के समक्ष पहुंचे। बच्चों ने रोते हुए बताया कि एक वर्ष पूर्व सड़क हादसे में उनके माता-पिता की मौत हो चुकी है और उनके दादा-दादी भी इस दुनिया में नहीं हैं। बच्चों की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को तुरंत बुलाया।
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उन्होंने प्रोबेशन अधिकारी को इन बच्चों का मुख्यमंत्री बाल विकास योजना के तहत आवेदन कराने के निर्देश दिए, ताकि इन्हें नियमित रूप से इसका लाभ मिल सके। डीएम ने बताया कि बच्चों की मां बीडीसी सदस्य थीं। नियमानुसार किसी सदस्य की मृत्यु पर पंचायत कल्याण कोष से तीन लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है।
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इन बच्चों का यह आवेदन भी एक वर्ष से अटका था, जिसे अब प्राथमिकता से आगे बढ़ाकर निस्तारित करा दिया गया है। इसके अलावा लीड बैंक मैनेजर को बुलाकर बच्चों के माता-पिता के बैंक खाते से जुड़ी बीमा राशि दिलाने की प्रक्रिया के लिए भी आवेदन करा दिया गया है। डीएम ने बताया कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बच्चों को सरकार की सभी वाजिब योजनाओं का लाभ मिले और उनकी पढ़ाई-लिखाई की मुकम्मल व्यवस्था हो।
डीएम ने बताया कि बच्चों के माता-पिता की मृत्यु के बाद उनकी जमीन का एक व्यक्ति द्वारा फर्जी बैनामा कराने का मामला भी सामने आया है। लगभग 40 वर्ष पुराने चकबंदी से जुड़े इस मामले के दस्तावेजों की जांच एडीएम को दी गई है। इस मामले को शीघ्र ही निस्तारित कराकर बच्चों के वैध अधिकारों को सुरक्षित कराया जाएगा।