क्या नई आफत है: फैमिली आईडी बनवाने में झिझक रहे लोग, कह रहे-हमें नहीं चाहिए, ये आ रही बनाने में मुश्किलें
पंचायत सहायक राहुल कुमार ने घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करना शुरू किया तो उन्हें ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। ऑनलाइन ठगी और धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के डर से ग्रामीण अपना ओटीपी और निजी दस्तावेज साझा करने के लिए तैयार नहीं हैं।
विस्तार
सरकार की महत्वाकांक्षी फैमिली आईडी बनाने की मुहिम गांवों में जमीनी हकीकत से टकरा रही है। सूची में दर्ज कई लाभार्थी वर्षों पहले गांव छोड़कर दूसरे शहरों में बस चुके हैं, जबकि कुछ परिवार मोबाइल नंबर और ओटीपी साझा करने से ही इन्कार कर रहे हैं। हाथरस के एक गांव में तो ग्रामीण ने यहां तक कह दिया कि क्या नई आफत है यह, हमें इसकी कोई जरूरत नहीं है।
साफ है कि ग्राम पंचायत अधिकारियों को घर-घर पहुंचने के बावजूद फैमिली आईडी बनाने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। ग्राम पंचायत उदयभान भकरोई में ग्राम पंचायत अधिकारी अभिषेक गुप्ता फैमिली आईडी बनाने के लिए सूची में शामिल लाभार्थियों के घर पहुंचे।
गांव की सूची के अनुसार नीतू देवी विधवा पेंशन की लाभार्थी हैं, लेकिन उनकी फैमिली आईडी अभी तक नहीं बनी थी। जब अधिकारी उनके घर पहुंचे तो मकान पर ताला लगा मिला। पड़ोसियों से जानकारी करने पर पता चला कि नीतू देवी अपने बच्चों के साथ दिल्ली में रहकर काम करती हैं और लंबे समय से गांव नहीं आई हैं। उनके पास संपर्क के लिए मोबाइल नंबर भी उपलब्ध नहीं था। इस कारण उनकी फैमिली आईडी नहीं बनाई जा सकी।
इसी प्रकार ग्राम पंचायत महराम बाग में सूची में शामिल विष्णु शर्मा, जो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी भी हैं, गांव में नहीं मिले। परिजनों ने बताया कि वह अपनी ससुराल आगरा में रहते हैं। परिवार ने उनका मोबाइल नंबर देने से भी इन्कार कर दिया, जिससे उनकी फैमिली आईडी का सत्यापन और पंजीकरण नहीं हो सका। ग्राम पंचायत अधिकारियों का कहना है कि कई लाभार्थी गांव से बाहर रह रहे हैं, जबकि कई लोग मोबाइल पर आने वाला ओटीपी साझा करने से भी हिचक रहे हैं। इन कारणों से सरकार की फैमिली आईडी बनाने की प्रक्रिया गांवों में अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही है।
किसी का मोबाइल नंबर लिंक नहीं, तो किसी का बंद
सादाबाद की ग्राम पंचायत अभयपुरा में ग्राम पंचायत सचिव देवेंद्र गौतम की मौजूदगी में कई ग्रामीणों ने आधार कार्ड से जुड़ी समस्याएं रखीं। लोगों ने बताया कि उनके आधार कार्ड में मोबाइल नंबर लिंक नहीं है या पहले से दर्ज मोबाइल नंबर बंद हो चुका है। इस कारण फैमिली आईडी बनाने में परेशानी आ रही है। पंचायत सचिव ने ग्रामीणों को जल्द से जल्द आधार कार्ड में सक्रिय मोबाइल नंबर अपडेट कराने की सलाह दी। टीम ने ग्रामीणों को फैमिली आईडी के महत्व की जानकारी देते हुए आवश्यक दस्तावेजों को समय पर अपडेट कराने के लिए भी जागरूक किया।
पंचायत घर पर ताला, सचिव बोले-मुझे जानकारी नहीं
अभियान के प्रति सरकारी कर्मियों की उदासीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मेंडू-हाथरस जंक्शन पर पंचायत सहायक द्वारा कोई कैंप ही नहीं लगाया गया और पंचायत घर पर ताला लटका मिला। जब इस संबंध में ग्राम पंचायत देवी नगर के सचिव देवेंद्र यादव से बात की गई, तो उनका दो टूक कहना था कि उन्हें इस मामले में कोई जानकारी नहीं है। न ही कहीं कोई कैंप लगा है और न ही हमें कोई आदेश मिला है। मैं अभी घर पर हूं, जाकर पता करता हूं।
साइबर ठगी का खौफ
ग्राम पंचायत कजरौठी में जब पंचायत सहायक राहुल कुमार ने घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करना शुरू किया तो उन्हें ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। ऑनलाइन ठगी और धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के डर से ग्रामीण अपना ओटीपी और निजी दस्तावेज साझा करने के लिए तैयार नहीं हैं। अभियान के दौरान ग्रामीण जगवीर सिंह ने तो साफ तौर पर इन्कार करते हुए कहा, क्या नई आफत है यह, हमें इसकी कोई जरूरत नहीं है।
ये चुनौतियां आईं सामने
- पलायन : लाभार्थी सूची में नाम हैं, लेकिन रोजगार की खातिर लोग दूसरे शहरों में रह रहे हैं।
- अविश्वास व डर : साइबर अपराध के दौर में ग्रामीण ओटीपी साझा करने के लिए तैयार नहीं हैं।
- तकनीकी बाधा : आधार कार्ड में सक्रिय मोबाइल नंबर का न होना।
- प्रशासनिक उदासीनता : कुछ क्षेत्रों में सचिवों और पंचायत सहायकों को अभियान की जानकारी या आदेश ही नहीं मिल सके हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सभी एडीओ, बीडीओ और पंचायत सचिवों को निर्देश दिए गए थे कि फैमिली आईडी बनानी है। जो भी अनुपस्थित थे, उन पर कार्रवाई की जाएगी।-पीएन दीक्षित, मुख्य विकास अधिकारी