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टिकट की घोषणा में देरी से बढ़ी दावेदारों की बेचैनी
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Sun, 29 Oct 2017 11:10 PM IST
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चुनाव
- फोटो : SELF
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निकाय चुनाव की नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो गई, लेकिन जिले के प्रमुख राजनीतिक दल अभी तक अध्यक्ष और सभासद पद के लिए अपने प्रत्याशी घोषित नहीं कर पाए हैं, जबकि हाथरस शहर ही नहीं, बल्कि जिले की सभी नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों में प्रत्याशी चयन को लेकर चर्चाओं और अटकलों का दौर तेज हो गया है। टिकटार्थियों की भागदौड़ भी तेज हो गई है।
प्रमुख दावेदार तो फिलहाल दिल्ली और लखनऊ में डेरा जमाए हुए हैं। उनकी कोशिश चुनाव चिह्न लेने के बाद ही वापस लौटने की है। दावेदारों की लंबी लाइन से कुछ पार्टियां तो इस कदर दुविधा में घिर गई हैं कि उन्हें डर सता रहा है कि प्रत्याशी चयन के बाद कहीं बगावत सिर नहीं उठा दे। यही वजह है कि वह प्रत्याशी चयन में किसी तरह की जल्दबाजी करने के मूड में नहीं हैं। पार्टियों के जिला नेतृत्व ने तो दावेदारों से यह कहकर अपना पीछा छुड़ा लिया है कि हमने अपनी रिपोर्ट भेज दी है, अब जो भी फैसला होगा, वह हाईकमान ही करेगा। फिलहाल तो लोगों की जुबां पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किस पार्टी से कौन प्रत्याशी होगा। जानकार बता रहे हैं कि सभी प्रमुख दलों की कोशिश यह है कि पहले उनके विरोधी अपना प्रत्याशी घोषित कर दें, जिसके बाद वह उनके जवाब में किसी दमदार चेहरे को आगे कर सकें। पहले आप-पहले आप के चक्कर में ही प्रत्याशियों की घोषणा में देरी हो रही है।
चुनाव लडने के दावेदार लगातार स्थानीय पदाधिकारियों से भी मिल रहे हैं, लेकिन कश्मकश को देखते हुए वह कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं हैं। पार्टी हाईकमान से भी दावेदारों को इस बारे में कोई ठोस संकेत मिल नहीं पा रहा, जिससे दावेदारों की बेचैनी बढ़ी हुई है। उन्हें यही चिंता खाए जा रही है कि कहीं ऐनवक्त पर उन्हें मायूसी नहीं झेलनी पड़े। हालांकि निकाय चुनाव में प्रत्याशी चयन के लिए सभी प्रमुख दलों से जुड़े लोगों ने अपनी पार्टी के अधिकृत लोगों को अपने आवेदन भी सौंप दिए हैं। इसके बावजूद अभी तक न तो सत्ताधारी भाजपा ने अपने पत्ते खोले हैं, न ही बसपा, सपा और कांग्रेस ने स्थिति स्पष्ट की है, जिससे टिकट के दावेदारों को अपने चुनाव अभियान को आगे बढ़ाने में मुश्किल हो रही है। यह लोग फिलहाल तो पार्टियों के स्थानीय रसूखदार नेताओं से मिलकर अपना पक्ष मजबूत करने के प्रयास कर रहे है। साथ ही वह पार्टी हाईकमान से जुड़े लोगों के भी संपर्क में हैं।
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प्रमुख दावेदार तो फिलहाल दिल्ली और लखनऊ में डेरा जमाए हुए हैं। उनकी कोशिश चुनाव चिह्न लेने के बाद ही वापस लौटने की है। दावेदारों की लंबी लाइन से कुछ पार्टियां तो इस कदर दुविधा में घिर गई हैं कि उन्हें डर सता रहा है कि प्रत्याशी चयन के बाद कहीं बगावत सिर नहीं उठा दे। यही वजह है कि वह प्रत्याशी चयन में किसी तरह की जल्दबाजी करने के मूड में नहीं हैं। पार्टियों के जिला नेतृत्व ने तो दावेदारों से यह कहकर अपना पीछा छुड़ा लिया है कि हमने अपनी रिपोर्ट भेज दी है, अब जो भी फैसला होगा, वह हाईकमान ही करेगा। फिलहाल तो लोगों की जुबां पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किस पार्टी से कौन प्रत्याशी होगा। जानकार बता रहे हैं कि सभी प्रमुख दलों की कोशिश यह है कि पहले उनके विरोधी अपना प्रत्याशी घोषित कर दें, जिसके बाद वह उनके जवाब में किसी दमदार चेहरे को आगे कर सकें। पहले आप-पहले आप के चक्कर में ही प्रत्याशियों की घोषणा में देरी हो रही है।
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चुनाव लडने के दावेदार लगातार स्थानीय पदाधिकारियों से भी मिल रहे हैं, लेकिन कश्मकश को देखते हुए वह कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं हैं। पार्टी हाईकमान से भी दावेदारों को इस बारे में कोई ठोस संकेत मिल नहीं पा रहा, जिससे दावेदारों की बेचैनी बढ़ी हुई है। उन्हें यही चिंता खाए जा रही है कि कहीं ऐनवक्त पर उन्हें मायूसी नहीं झेलनी पड़े। हालांकि निकाय चुनाव में प्रत्याशी चयन के लिए सभी प्रमुख दलों से जुड़े लोगों ने अपनी पार्टी के अधिकृत लोगों को अपने आवेदन भी सौंप दिए हैं। इसके बावजूद अभी तक न तो सत्ताधारी भाजपा ने अपने पत्ते खोले हैं, न ही बसपा, सपा और कांग्रेस ने स्थिति स्पष्ट की है, जिससे टिकट के दावेदारों को अपने चुनाव अभियान को आगे बढ़ाने में मुश्किल हो रही है। यह लोग फिलहाल तो पार्टियों के स्थानीय रसूखदार नेताओं से मिलकर अपना पक्ष मजबूत करने के प्रयास कर रहे है। साथ ही वह पार्टी हाईकमान से जुड़े लोगों के भी संपर्क में हैं।
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