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Hathras News: क्रिप्टो करेंसी से काली कमाई को सफेद बना रहे साइबर ठग
Sat, 05 Sep 2026 02:23 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sat, 05 Sep 2026 02:23 AM IST
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साइबर ठगी और वित्तीय धोखाधड़ी का नेटवर्क अब केवल बैंक खातों तक सीमित नहीं है। जांच में सामने आया है कि साइबर ठग आम लोगों को झांसे में लेकर या धोखाधड़ी से खोले गए खातों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए कर रहे हैं। इस काली कमाई को सफेद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो करेंसी (यूएसडीटी), ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स और डिजिटल ई-वॉलेट का एक जटिल जाल बुना जा रहा है।
सहपऊ मामले की जांच कर रही जोधपुर पुलिस की टीम अब तक केवल लेयर-1, लेयर-2 और लेयर-3 (बैंक खातों के शुरुआती चक्र) तक ही पहुंच सकी है। पुलिस ने उन शातिरों की पहचान तो कर ली है, जिन्होंने फर्जी दस्तावेज जुटाकर ये म्यूल अकाउंट खुलवाए थे, लेकिन तीसरी लेयर के बाद ठगी की रकम कहां और कैसे ठिकाने लगाई गई, इसका डेटा जुटाना जांच एजेंसियों के लिए भूसे में सुई ढूंढने जैसा साबित हो रहा है।
इधर, मामला उजागर होने के बाद सहपऊ पुलिस ने भी खाता खुलवाने वाले आरोपियों के खिलाफ एफआईआर तो दर्ज कर ली है, लेकिन मुख्य साजिशकर्ताओं की गिरफ्तारी न होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
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इस तरह ठिकाने लगती है रकम (साइबर अपराध विशेषज्ञ और जांच एजेंसियों के अनुसार)
म्यूल खातों में रकम का प्रवेश (लेयर 1) : ठगी या रंगदारी के रुपये सबसे पहले निर्दोष या पैसों के लालच में आए लोगों के नाम पर खुले म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाते हैं। सहपऊ में खुले फर्जी खाते इसी श्रेणी का हिस्सा हैं।
मल्टीपल लेयरिंग और टुकड़ों में बंटवारा (लेयर 2 और 3) : जांच एजेंसियों और साइबर पुलिस को भ्रमित करने के लिए प्राथमिक खातों से रुपयों को तुरंत 50 से 100 अलग-अलग खातों में छोटे-छोटे टुकड़ों में ट्रांसफर किया जाता है। इसे लेयरिंग कहा जाता है। एनसीआरपी सैकड़ों खातों में गई छोटी राशि को ट्रेस नहीं कर पाता।
क्रिप्टो के जरिये ब्लैक मनी होती है व्हाइट
तीसरी लेयर के बाद इस रकम का इस्तेमाल पीयर-टू-पीयर प्लेटफॉर्म्स या बिना केवाईसी वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो एक्सचेंजों पर यूएसडीटी (टेथर), बिटकॉइन या मोनेरो जैसी क्रिप्टो करेंसी खरीदने में किया जाता है।
मिक्सर और गेमिंग ऐप्स का इस्तेमाल : क्रिप्टो ब्लॉकचेन पर पैसे का स्रोत छिपाने के लिए क्रिप्टो मिक्सर या विदेशों में संचालित ऑनलाइन गेमिंग या कैसीनो ऐप्स का सहारा लिया जाता है, जहां पैसे को हार-जीत और वर्चुअल वॉलेट्स के जरिये घुमाया जाता है। क्रिप्टो मिक्सर मूल पते से संबंध तोड़ देता है और नए पते पर राशि भेजता है, जिसे एजेंसियां ट्रेस नहीं कर पातीं।
वैध संपत्ति के रूप में वापसी : अंत में क्रिप्टो करेंसी को सेल करके विदेशी बैंक खातों में या शेल कंपनियों के जरिये व्यापारिक आय दिखाकर सफेद धन के रूप में टैक्स देकर वापस भारत या अन्य देशों में निकाल लिया जाता है।
जोधपुर पुलिस अपनी जांच कर रही है। स्थानीय पुलिस खाता खुलवाने वाले युवकों व खाते में आई रकम के जरिये साइबर फ्रॉड तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। डिजिटल ट्रेल के आधार पर क्रिप्टो वॉलेट्स और पी-टू-पी मर्चेंट्स तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया जा सके।
-चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी
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सहपऊ मामले की जांच कर रही जोधपुर पुलिस की टीम अब तक केवल लेयर-1, लेयर-2 और लेयर-3 (बैंक खातों के शुरुआती चक्र) तक ही पहुंच सकी है। पुलिस ने उन शातिरों की पहचान तो कर ली है, जिन्होंने फर्जी दस्तावेज जुटाकर ये म्यूल अकाउंट खुलवाए थे, लेकिन तीसरी लेयर के बाद ठगी की रकम कहां और कैसे ठिकाने लगाई गई, इसका डेटा जुटाना जांच एजेंसियों के लिए भूसे में सुई ढूंढने जैसा साबित हो रहा है।
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इधर, मामला उजागर होने के बाद सहपऊ पुलिस ने भी खाता खुलवाने वाले आरोपियों के खिलाफ एफआईआर तो दर्ज कर ली है, लेकिन मुख्य साजिशकर्ताओं की गिरफ्तारी न होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
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इस तरह ठिकाने लगती है रकम (साइबर अपराध विशेषज्ञ और जांच एजेंसियों के अनुसार)
म्यूल खातों में रकम का प्रवेश (लेयर 1) : ठगी या रंगदारी के रुपये सबसे पहले निर्दोष या पैसों के लालच में आए लोगों के नाम पर खुले म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाते हैं। सहपऊ में खुले फर्जी खाते इसी श्रेणी का हिस्सा हैं।
मल्टीपल लेयरिंग और टुकड़ों में बंटवारा (लेयर 2 और 3) : जांच एजेंसियों और साइबर पुलिस को भ्रमित करने के लिए प्राथमिक खातों से रुपयों को तुरंत 50 से 100 अलग-अलग खातों में छोटे-छोटे टुकड़ों में ट्रांसफर किया जाता है। इसे लेयरिंग कहा जाता है। एनसीआरपी सैकड़ों खातों में गई छोटी राशि को ट्रेस नहीं कर पाता।
क्रिप्टो के जरिये ब्लैक मनी होती है व्हाइट
तीसरी लेयर के बाद इस रकम का इस्तेमाल पीयर-टू-पीयर प्लेटफॉर्म्स या बिना केवाईसी वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो एक्सचेंजों पर यूएसडीटी (टेथर), बिटकॉइन या मोनेरो जैसी क्रिप्टो करेंसी खरीदने में किया जाता है।
मिक्सर और गेमिंग ऐप्स का इस्तेमाल : क्रिप्टो ब्लॉकचेन पर पैसे का स्रोत छिपाने के लिए क्रिप्टो मिक्सर या विदेशों में संचालित ऑनलाइन गेमिंग या कैसीनो ऐप्स का सहारा लिया जाता है, जहां पैसे को हार-जीत और वर्चुअल वॉलेट्स के जरिये घुमाया जाता है। क्रिप्टो मिक्सर मूल पते से संबंध तोड़ देता है और नए पते पर राशि भेजता है, जिसे एजेंसियां ट्रेस नहीं कर पातीं।
वैध संपत्ति के रूप में वापसी : अंत में क्रिप्टो करेंसी को सेल करके विदेशी बैंक खातों में या शेल कंपनियों के जरिये व्यापारिक आय दिखाकर सफेद धन के रूप में टैक्स देकर वापस भारत या अन्य देशों में निकाल लिया जाता है।
जोधपुर पुलिस अपनी जांच कर रही है। स्थानीय पुलिस खाता खुलवाने वाले युवकों व खाते में आई रकम के जरिये साइबर फ्रॉड तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। डिजिटल ट्रेल के आधार पर क्रिप्टो वॉलेट्स और पी-टू-पी मर्चेंट्स तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया जा सके।
-चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी