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एंबुलेंस चालक की मनमर्जी पर भड़के तीमारदार, हंगामा
अमर उजाला, हाथरस
Updated Thu, 02 Mar 2017 11:32 PM IST
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सलेमपुर में हादसे में घायल का उपचार करते चिकित्सक।
- फोटो : अमर उजाला
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एक घायल मरीज को आगरा ले जाने से मना करने पर एंबुलेंस 108 के विरोध में परिजनों ने इमरजेंसी में जमकर हंगामा किया। मरीज को देखने पहुंचे परियोजना निदेशक ने एंबुलेंस 108 के लखनऊ स्थित कार्यालय में फोन कर नाराजगी जाहिर कर शिकायत की बात कही। इसके बाद एंबुलेंस 108 के चालक आगरा जाने के लिए तैयार हो गया।
परियोजना निदेशक चंद्रशेखर शुक्ला के अर्दली सोरन सिंह निवासी नगला हीरा का 17 वर्षीय बेटा शशिकांत सिकंदराराऊ स्थित आईटीआई जा रहा था। सलेमपुर के पास अचानक शशिकांत को चक्कर आ गया और वह टेंपो से नीचे जा गिरा। तेज रफ्तार टेंपो से गिरने के कारण शशिकांत के सिर और पूरे शरीर में गहरी चोटें थीं। उसे बेहोशी की हालत में शाम करीब साढ़े चार बजे जिला अस्पताल लाया गया। यहां पिता सोरन सिंह और परियोजना निदेशक चंद्रशेखर शुक्ला भी पहुंच गए।
डॉक्टरों ने शशिकांत को आगरा मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। एंबुलेंस 108 को कॉल कर जिला अस्पताल बुलाया गया लेकिन लखनऊ स्थित कंट्रोल रूम ने एंबुलेंस को आगरा की जगह अलीगढ़ ले जाने को कहा। एंबुलेंस प्रशासन के लोगाें का कहना था कि अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज 45 किलोमीटर दूर है जबकि आगरा मेडिकल कॉलेज 60 किलोमीटर दूर है। एंबुलेंस सबसे पास मौजूद मेडिकल कॉलेज ही जाएगी। इस पर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। परियोजना निदेशक ने खुद फोन लेकर अधिकारियों से बात की।
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सीएमओ डॉ. रामवीर सिंह से भी बात की गई। कहा गया कि जब डॉक्टर मरीज को आगरा रेफर कर रहा है तो एंबुलेंस यह कैसे तय करेगी कि मरीज कहां रेफर होगा। पीडी ने एंबुलेंस संचालकों को जमकर हड़काया और शिकायत की चेतावनी दी। कहा कि नियमों के मुताबिक एंबुलेंस मरीज को निर्बाध दिल्ली तक ले जाएगी लेकिन अमूमन एंबुलेंस 108 मरीजों को आगरा तक ले जाने में आनाकानी करती रही है। पीडी के हंगामा काटने के बाद इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर ने भी एंबुलेंस के कंट्रोल रूम से बात की और एंबुलेंस को जिला अस्पताल तक बुलवाया।
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परियोजना निदेशक चंद्रशेखर शुक्ला के अर्दली सोरन सिंह निवासी नगला हीरा का 17 वर्षीय बेटा शशिकांत सिकंदराराऊ स्थित आईटीआई जा रहा था। सलेमपुर के पास अचानक शशिकांत को चक्कर आ गया और वह टेंपो से नीचे जा गिरा। तेज रफ्तार टेंपो से गिरने के कारण शशिकांत के सिर और पूरे शरीर में गहरी चोटें थीं। उसे बेहोशी की हालत में शाम करीब साढ़े चार बजे जिला अस्पताल लाया गया। यहां पिता सोरन सिंह और परियोजना निदेशक चंद्रशेखर शुक्ला भी पहुंच गए।
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डॉक्टरों ने शशिकांत को आगरा मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। एंबुलेंस 108 को कॉल कर जिला अस्पताल बुलाया गया लेकिन लखनऊ स्थित कंट्रोल रूम ने एंबुलेंस को आगरा की जगह अलीगढ़ ले जाने को कहा। एंबुलेंस प्रशासन के लोगाें का कहना था कि अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज 45 किलोमीटर दूर है जबकि आगरा मेडिकल कॉलेज 60 किलोमीटर दूर है। एंबुलेंस सबसे पास मौजूद मेडिकल कॉलेज ही जाएगी। इस पर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। परियोजना निदेशक ने खुद फोन लेकर अधिकारियों से बात की।
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सीएमओ डॉ. रामवीर सिंह से भी बात की गई। कहा गया कि जब डॉक्टर मरीज को आगरा रेफर कर रहा है तो एंबुलेंस यह कैसे तय करेगी कि मरीज कहां रेफर होगा। पीडी ने एंबुलेंस संचालकों को जमकर हड़काया और शिकायत की चेतावनी दी। कहा कि नियमों के मुताबिक एंबुलेंस मरीज को निर्बाध दिल्ली तक ले जाएगी लेकिन अमूमन एंबुलेंस 108 मरीजों को आगरा तक ले जाने में आनाकानी करती रही है। पीडी के हंगामा काटने के बाद इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर ने भी एंबुलेंस के कंट्रोल रूम से बात की और एंबुलेंस को जिला अस्पताल तक बुलवाया।