मां-बाप ने चप्पल और पैंट से पहचाना जीशान को
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मेरठ पुलिस भी इस दौरान हाथरस गेट पुलिस के साथ रही। हालांकि सोमवार रात को ही परिजनों को जीशान का शव मिलने की खबर लग चुकी थी। गुस्साए लोगों ने आरोपियों के घरों में आग लगा दी और वहां पुलिस को उन्हें काबू करने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। यहां भी शव की शिनाख्त करने करीब 15 लोग आए थे। शव की शिनाख्त के बाद आरोपी वसीम को देख उनका खून खौल रहा था।
बमुश्किल पुलिस ने परिजनों को समझाकर शांत किया। मालूम हो कि जीशान को 30 जून की रात को घर के बाहर से उसके ही पड़ोसी वसीम ने अपने साथियों के साथ मिलकर अगवा कर लिया था और गला दबाकर हत्या कर दी थी। उसके बाद शव को हाथरस के भगवंतपुर गांव में एक खेत में छिपा दिया था। पांच लाख रुपये की फिरौती के लिए किए गए इस अपहरण की गुत्थी मेरठ पुलिस ने जल्द सुलझा ली और आरोपियों को दबोच लिया। आरोपियों के पकड़ में आने के बाद जीशान की हत्या का खुलासा हुआ।
बड़े बेदर्द थे हत्यारे
जीशान को अगवा करने वाले पड़ोसी नाजिम, मोनू और वसीम बड़े ही बेदर्द थे। जीशान को अगवा करने के बाद वह कई घंटे तक इधर से उधर घुमाते रहे। वह पड़ोस में रहने वाले अंकल की आंखों में छिपी दरिंदगी को नहीं देख सका। हंसते-खेलते मासूम को मारते समय आरोपियों का दिल एक बार भी नहीं पसीजा। आरोपियेां ने उसका गला दबा दिया। वह देर तक छटपटाता रहा। उसकी आंखे आखिरी समय तक जिंदगी की भीख मांगती रही लेकिन आरोपी पत्थर दिल बने रहे। मंगलवार को पोस्टमार्टम में गला दबाकर हत्या किए जाने का खुलासा हुआ।
जानवरों ने की शव की दुर्गति
जीशान का शव जब पुलिस ने खेत से बरामद किया तब तक जानवर शव की दुर्गति कर चुके थे। गर्दन पर जख्म के निशान देख एक बार तो पुलिस को लगा कि हत्या गला रेतकर की गई है, लेकिन बाद में पता चला कि यह निशान जानवरों के हैं। जीशान का एक हाथ भी गायब था। पुलिस ने आसपास इसे काफी तलाश किया लेकिन हाथ नहीं मिला।