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डॉक्टरी के बाद जेल भेजे गए एओ
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jun 2016 11:54 PM IST
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हाथरस। आगरा की विजिलेंस टीम द्वारा वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा बृजेश कुमार राजपूत को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में पकड़े जाने के बाद गुरुवार को एओ दफ्तर में दहशतभरी खामोशी पसरी रही। अधिकारी और कर्मियों के चेहरे पर दहशत के भाव साफ पढ़े जा सकते थे। उन्हें डर था कि एओ प्रकरण की आंच उन पर भी नहीं आ जाए। इसका असर उनके कामकाज पर भी साफ दिखाई दिया। अफसर और कर्मी सही काम से भी बचते रहे। कुछ कर्मचारी तो गैर हाजिर भी रहे, जिससे कामकाज पटरी पर उतरा दिखाई दिया।
गुरुवार को शिक्षा विभाग के दफ्तरों में दिन भर चर्चाओं का दौर रहा। कार्यालयों में अधिकारी एवं कर्मचारी विभागीय कामकाज को निपटाने के बजाय अपने-अपने तरीके से एओ के गुण-दोष पर विचार करते हुए दिखाई दिए। कार्यालयों में कुछ कामों को मामला ठंडा नहीं होने तक स्थगित भी कर दिया गया। गलत तो गलत, विभागीय मुलाजिम सही काम करने से भी बचते नजर आए। उनके कामकाज पर यही डर हावी रहा कि कहीं कुछ गलत नहीं हो जाए। निश्चित रूप से यह मामला कुछ समय तक तो उन मुलाजिमों के लिए सबक का काम करेगा, जिन्हें बिना लेन-देन के कोई भी काम करने की आदत ही नहीं रह गई थी। विभागीय मुलाजिम यह भी आकलन करते नजर आए कि आखिर एओ के साथ ऐसी नौबत आई कैसे। क्या वाकई उन्होंने शिक्षणेत्तर कर्मचारी से रिश्वत मांगी थी या फिर उनके खिलाफ कोई साजिश हुई है। आम तौर पर दफ्तर आने वाले शिक्षकों और कर्मियों के साथ कई बार तल्खी से पेश आने वाले कर्मचारियों का रवैया उनके प्रति गुरुवार को बेहद नरम भी दिखा।
डॉक्टरी के बाद जेल भेजे गए एओ
हाथरस। विजिलेंस टीम द्वारा 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए वित्त एवं लेखाधिकारी बृजेश राजपूत का गुरुवार को कोतवाली सदर पुलिस ने डॉक्टरी परीक्षण कराया। मुकदमा दर्ज होने के बाद उन्हें डॉक्टरी के लिए जिला अस्पताल लेकर आया गया।
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इसके बाद विजिलेंस आगरा की टीम उनको लेकर विशेष अदालत मेरठ में पेशी के लिए ले गई। जहां से उन्हें जेल भेजा जाएगा। इस घटनाक्रम से वित्त एवं लेखाधिकारी के समर्थक शिक्षक और कर्मी मायूस नजर आए। कोतवाली सदर के प्रभारी मनोज शर्मा ने बताया कि रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किए गए एओ बृजेश राजपूत पुत्र बाबू सिंह राजपूत निवासी सराय जरैलिया थाना मारहरा एटा को गुरुवार को जेल भेज दिया गया है।
रिटायर्ड शिक्षक ने की डीएम से शिकायत
हाथरस। एक और रिटायर्ड शिक्षक ने एओ बृजेश राजपूत के खिलाफ डीएम से शिकायत की है। प्राथमिक विद्यालय गढ़ी जैनी के प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत हुए शिक्षक भगवती प्रसाद गौतम ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनकी 31 मार्च 2016 में सेवानिवृत्ति हो चुकी है, लेकिन वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय से आज तक उनकी पत्रावली को स्वीकृति के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय नहीं भेजा गया है। उन्होंने आरोप लगाए कि एओ कार्यालय के बाबुओं को इस कार्यालय में काम करते हुए 18 से 20 साल हो चुके हैं, जिससे यह कर्मी बिना रिश्वत के कोई कार्य ही नहीं करते हैं। उन्होंने इस कार्यालय के पटल सहायकों का स्थानांतरण करने की मांग डीएम से की।
कई विभागों में अटक जाएंगे वित्तीय काम
हाथरस। वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा बृजेश कुमार राजपूत के रिश्वत लेने के आरोप में पकडे़ जाने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग, माध्यमिक शिक्षा विभाग व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों के वेतन को लेकर दिक्कतें आ सकती हैं। वित्त विभाग में अधिकारियों की कमी के कारण मौजूद समय में वित्त एवं लेखाधिकारी राजपूत पर अपने विभाग के साथ-साथ कई अन्य विभागों का भी अतिरिक्त प्रभार था। इन विभागों का वेतन आहरण और अन्य वित्तीय कामकाज एओ बेसिक ही निपटाते थे, लेकिन अब उनके रिश्वत के आरोप में पकड़े जाने के बाद नए एओ की तैनाती तक यहां इन विभागों के वित्तीय कामकाज पटरी से उतर सकते हैं। खासकर शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मियों के देयों की लंबित पत्रावलियां फिलहाल लटक गई हैं।
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गुरुवार को शिक्षा विभाग के दफ्तरों में दिन भर चर्चाओं का दौर रहा। कार्यालयों में अधिकारी एवं कर्मचारी विभागीय कामकाज को निपटाने के बजाय अपने-अपने तरीके से एओ के गुण-दोष पर विचार करते हुए दिखाई दिए। कार्यालयों में कुछ कामों को मामला ठंडा नहीं होने तक स्थगित भी कर दिया गया। गलत तो गलत, विभागीय मुलाजिम सही काम करने से भी बचते नजर आए। उनके कामकाज पर यही डर हावी रहा कि कहीं कुछ गलत नहीं हो जाए। निश्चित रूप से यह मामला कुछ समय तक तो उन मुलाजिमों के लिए सबक का काम करेगा, जिन्हें बिना लेन-देन के कोई भी काम करने की आदत ही नहीं रह गई थी। विभागीय मुलाजिम यह भी आकलन करते नजर आए कि आखिर एओ के साथ ऐसी नौबत आई कैसे। क्या वाकई उन्होंने शिक्षणेत्तर कर्मचारी से रिश्वत मांगी थी या फिर उनके खिलाफ कोई साजिश हुई है। आम तौर पर दफ्तर आने वाले शिक्षकों और कर्मियों के साथ कई बार तल्खी से पेश आने वाले कर्मचारियों का रवैया उनके प्रति गुरुवार को बेहद नरम भी दिखा।
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डॉक्टरी के बाद जेल भेजे गए एओ
हाथरस। विजिलेंस टीम द्वारा 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए वित्त एवं लेखाधिकारी बृजेश राजपूत का गुरुवार को कोतवाली सदर पुलिस ने डॉक्टरी परीक्षण कराया। मुकदमा दर्ज होने के बाद उन्हें डॉक्टरी के लिए जिला अस्पताल लेकर आया गया।
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इसके बाद विजिलेंस आगरा की टीम उनको लेकर विशेष अदालत मेरठ में पेशी के लिए ले गई। जहां से उन्हें जेल भेजा जाएगा। इस घटनाक्रम से वित्त एवं लेखाधिकारी के समर्थक शिक्षक और कर्मी मायूस नजर आए। कोतवाली सदर के प्रभारी मनोज शर्मा ने बताया कि रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किए गए एओ बृजेश राजपूत पुत्र बाबू सिंह राजपूत निवासी सराय जरैलिया थाना मारहरा एटा को गुरुवार को जेल भेज दिया गया है।
रिटायर्ड शिक्षक ने की डीएम से शिकायत
हाथरस। एक और रिटायर्ड शिक्षक ने एओ बृजेश राजपूत के खिलाफ डीएम से शिकायत की है। प्राथमिक विद्यालय गढ़ी जैनी के प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत हुए शिक्षक भगवती प्रसाद गौतम ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनकी 31 मार्च 2016 में सेवानिवृत्ति हो चुकी है, लेकिन वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय से आज तक उनकी पत्रावली को स्वीकृति के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय नहीं भेजा गया है। उन्होंने आरोप लगाए कि एओ कार्यालय के बाबुओं को इस कार्यालय में काम करते हुए 18 से 20 साल हो चुके हैं, जिससे यह कर्मी बिना रिश्वत के कोई कार्य ही नहीं करते हैं। उन्होंने इस कार्यालय के पटल सहायकों का स्थानांतरण करने की मांग डीएम से की।
कई विभागों में अटक जाएंगे वित्तीय काम
हाथरस। वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा बृजेश कुमार राजपूत के रिश्वत लेने के आरोप में पकडे़ जाने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग, माध्यमिक शिक्षा विभाग व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों के वेतन को लेकर दिक्कतें आ सकती हैं। वित्त विभाग में अधिकारियों की कमी के कारण मौजूद समय में वित्त एवं लेखाधिकारी राजपूत पर अपने विभाग के साथ-साथ कई अन्य विभागों का भी अतिरिक्त प्रभार था। इन विभागों का वेतन आहरण और अन्य वित्तीय कामकाज एओ बेसिक ही निपटाते थे, लेकिन अब उनके रिश्वत के आरोप में पकड़े जाने के बाद नए एओ की तैनाती तक यहां इन विभागों के वित्तीय कामकाज पटरी से उतर सकते हैं। खासकर शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मियों के देयों की लंबित पत्रावलियां फिलहाल लटक गई हैं।