हत्या के बाद घर में ही जला दिया रोकेंद्र का शव
हाथरस। लहरा से 13 जनवरी की शाम से लापता युवक रोकेंद्र की हत्या उसी दिन हो गई थी। गांजा तस्कर रमन कुमार गुप्ता उर्फ रिंकू ने अपने घर बुलाकर उसे शराब पिलाई। शराब में नशे की गोली मिला दी गई। घर से रुपयों को गायब करने के शक में रोकेंद्र की गला दबाकर हत्या कर दी। रिंकू और उसके सात साथियों ने रोकेंद्र के शव को वहीं घर के आंगन में पुराने लकड़ी के दरवाजों और कंडों से जलाया और फिर रात को शव की राख और बाकी अधजले टुकड़ों को बोरों में भरकर जलेसर रोड स्थित गंदे नाले में फेंक दिया। लाश के अधजले टुकड़े और राख को गंदे नाले से बरामद कर लिया गया है।
एसपी डॉ. एस चन्नप्पा के मुताबिक आरोपी सुनील ने फोन कर रोकेंद्र को घर से बुलाया। 13 जनवरी को शाम साढ़े सात बजे रोकेंद्र के छोटे भाई सोनू ने उसे फोन किया तो उसने एक घंटे बाद आने को कहा। इसके बाद उसका फोन नहीं उठा। बोरे लेकर सुनील और मुकेश उर्फ खन्ना एक्टिवा से गंदे नाले तक ले गए। सतेंद्र और रूपचंद को उसी समय रोकेंद्र की बाइक को नगला इमलिया छोड़ने का जिम्मा सौंपा गया। चारों आरोपी एक्टिवा से ही लौटकर आए।
एसओजी और हाथरस गेट आरोपियों की तलाश में मध्यप्रदेश के मुरैना, मथुरा और हरियाणा के गुडगांव में उनके रिश्तेदारों के यहां दबिशें दीं। पुलिस ने गुड़गांव में दबिश देकर एक होटल से रिंकू पुत्र चंदगुप्त निवासी बागला मार्ग, उसकी पत्नी कुसुम, नृपुल पुत्र अजय कुमार उर्फ उल्लो निवासी थाना सुरीर, राजस्थान, मुकेश उर्फ खन्ना पुत्र कालीचरण निवासी नगला चौबे और सुनील पुत्र नंदलाल निवासी नगला चौबे को धर दबोचा है। जबकि हत्या के दौरान घर में मौजूद और षड़यंत्र में शमिल हिस्ट्रीशीटर रिंकू की साली भावना, साढ़ू सतेंद्र निवासी कांशीराम टाउनशिप और रूपचंद्र निवासी नगला चौबे फरार हैं।
एसपी डॉ. एस चन्नप्पा के मुताबिक रोकेंद्र रिकूं के यहां ड्राइवर था। अपने ऊपर शक होने की भनक लगने के बाद उसने नौकरी छोड़ दी थी। गांजा बेचने के आरोप में हाथरस गेट पुलिस ने रिंकू को दो महीने पहले ही आधा किलो नशीला पदार्थ रखने के आरोप में जेल भेज दिया था। रिंकू की हिस्ट्रीशीट पिछले साल ही खुली थी, उस पर पांच मुकदमे हैं। जेल में उसे साथी नृपुल से रोकेंद्र के घर आने की खबरें मिलती रहती थीं। 12 जनवरी को जमानत पर रिहा होने के अगले दिन उसने रोकेंद्र को सबक सिखाने की ठान ली।
गंदे नाले पर शव के अधजले टुकड़ों के बोरों की बरामदगी को सीओ सिटी प्रीति सिंह समेत थाने का पूरा फोर्स पहुंच गया। बोरे बरामद होने के बाद जैसे ही उन्हें खोलकर देखा गया, परिजनों का धैर्य जवाब दे गया। पिता चंद्रपाल फूट-फूटकर रोने लगे। उन्हें अपने बेटे के इस हश्र की उम्मीद नहीं थी। परिजनों में से एक तो बेहोश हो गया जिसे पुलिस ने संभाला। चंद्रपाल को आखिरी समय तक बेटे के जिंदा होने की उम्मीद थी जो टूट गई।