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किसान की मौत
hathras
Updated Thu, 26 Nov 2015 12:07 AM IST
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हाथरस। मुरसान क्षेत्र के गांव कंचना में खेत में काम करते समय एक किसान की तबियत बिगड़ने पर आगरा में उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। पिछले तीन सीजन से फसलें तबाह होने से वह परेशान रहता था। उसके सिर पर लाखाें रूपये के कर्ज का बोझ था।
बताते हैं कि मंगलवार को कंचना गांव का 45 वर्षीय किसान राकेश पुत्र मोहनलाल खेतों में गेहूं की बुवाई कर रहा था। अचानक उसके सीने में तेज उठा। फिर देखते-देखते उसकी तबियत बिगड़ गई। स्थानीय चिकित्सकों को दिखाने पर उसे आगरा के एक प्राइवेट अस्पताल को रेफर कर दिया गया। जहां बुधवार की सुबह उसकी मौत हो गई। इस बारे में एसडीएम सदर केहरी सिंह एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है।
45 वर्षीय किसान राकेश ने पिछले वर्ष करीब 50 बीघा भूमि पट्टे पर लेकर आलू की खेती की थी। लेकिन आपदाओं के चलते उसे काफी नुकसान उठाना पड़ गया था। इससे पूर्व खरीफ की सूखे से एवं रबी की फसल बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद हो गई थी। आरोप है कि उसे शासन की ओर से आपदा राहत नहीं मिली थी। इस बार भी उसने रबी की फसल की बुवाई के लिए करीब 4 लाख रुपये का निजी कर्ज लिया था। बैंकों का भी उसपर कर्जा था।
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राकेश अपने पीछे पत्नी के अलावा सात बच्चे छोड़ गया है। चिंता की बात है कि अभी तक उसके किसी बच्चे की शादी नहीं हुई है। सभी पढ़ाई-लिखाई कर रहे हैं। राकेश के दो पुत्र और पांच बेटियां हैं। ऐसे में परिवार की जरूरतों को पूरा करने वाला अब कोई नहीं।
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बताते हैं कि मंगलवार को कंचना गांव का 45 वर्षीय किसान राकेश पुत्र मोहनलाल खेतों में गेहूं की बुवाई कर रहा था। अचानक उसके सीने में तेज उठा। फिर देखते-देखते उसकी तबियत बिगड़ गई। स्थानीय चिकित्सकों को दिखाने पर उसे आगरा के एक प्राइवेट अस्पताल को रेफर कर दिया गया। जहां बुधवार की सुबह उसकी मौत हो गई। इस बारे में एसडीएम सदर केहरी सिंह एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है।
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45 वर्षीय किसान राकेश ने पिछले वर्ष करीब 50 बीघा भूमि पट्टे पर लेकर आलू की खेती की थी। लेकिन आपदाओं के चलते उसे काफी नुकसान उठाना पड़ गया था। इससे पूर्व खरीफ की सूखे से एवं रबी की फसल बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद हो गई थी। आरोप है कि उसे शासन की ओर से आपदा राहत नहीं मिली थी। इस बार भी उसने रबी की फसल की बुवाई के लिए करीब 4 लाख रुपये का निजी कर्ज लिया था। बैंकों का भी उसपर कर्जा था।
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राकेश अपने पीछे पत्नी के अलावा सात बच्चे छोड़ गया है। चिंता की बात है कि अभी तक उसके किसी बच्चे की शादी नहीं हुई है। सभी पढ़ाई-लिखाई कर रहे हैं। राकेश के दो पुत्र और पांच बेटियां हैं। ऐसे में परिवार की जरूरतों को पूरा करने वाला अब कोई नहीं।