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Hathras News: बारिश-ओलावृष्टि की चेतावनी से बढ़ी चिंता, गेहूं की निकासी तेज
Sat, 04 Apr 2026 01:52 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sat, 04 Apr 2026 01:52 AM IST
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कटर थ्रेसर से गेहूं निकालते किसान। संवाद
- फोटो : Samvad
कृषि वैज्ञानिकों द्वारा चार और पांच अप्रैल को दी गई पुनः बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। गेहूं की फसल को बर्बादी से बचाने के लिए किसानों ने खेतों में गेहूं की निकासी (थ्रेसरिंग) का काम युद्ध स्तर पर तेज कर दिया है। किसान दिन-रात एक कर अनाज को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हैं।
खेतों में तेज हवाओं के बावजूद किसान थ्रेसर चलाने को मजबूर हैं। हालांकि हवा के कारण भूसा उड़ने से आर्थिक नुकसान हो रहा है, लेकिन किसानों का कहना है कि भूसे से ज्यादा जरूरी दाने को बचाना है। पिछले दिनों हुई बारिश से पहले ही फसल गिर चुकी है, जिससे पैदावार पर असर पड़ा है।
अब किसान किसी भी हाल में बची हुई फसल को जल्द से जल्द घर पहुंचाना चाहते हैं। गांवों में स्थिति यह है कि थ्रेसर मशीनों की भारी मांग के चलते किसानों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में रात भर मशीनें चल रही हैं, ताकि बारिश शुरू होने से पहले कटाई का काम पूरा किया जा सके।
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बारिश की चेतावनी के बाद अब पूरा ध्यान गेहूं की निकासी पर है। रात-दिन एक कर रहे हैं, ताकि फसल सुरक्षित जगह पहुंच जाए। अगर बची-खुची फसल भी खराब हो गई तो साल भर खाने के लाले पड़ जाएंगे।
-मनमोहन, किसान, गांव झींगुरा
बारिश ने इस साल बहुत रुलाया है। गीला गेहूं निकालने में खर्च और मेहनत ज्यादा लग रही है, लेकिन फसल को बचाने का यही एक रास्ता है। थ्रेसर के लिए बड़ी मुश्किल से नंबर आ रहा है, इसलिए मजदूरों के साथ मिलकर जल्दी से जल्दी गेहूं की निकासी करा रहे हैं।
-कुंवरपाल, किसान गांव कटेलिया
मुख्य बिंदु:
अलर्ट : 4 और 5 अप्रैल को जिले में बारिश और ओलावृष्टि की संभावना
चुनौती : तेज हवा से भूसा उड़ने का खतरा, फिर भी थ्रेसरिंग जारी
संकट : गीली फसल और मशीनों की कमी से बढ़ रही है किसानों की परेशानी
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खेतों में तेज हवाओं के बावजूद किसान थ्रेसर चलाने को मजबूर हैं। हालांकि हवा के कारण भूसा उड़ने से आर्थिक नुकसान हो रहा है, लेकिन किसानों का कहना है कि भूसे से ज्यादा जरूरी दाने को बचाना है। पिछले दिनों हुई बारिश से पहले ही फसल गिर चुकी है, जिससे पैदावार पर असर पड़ा है।
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अब किसान किसी भी हाल में बची हुई फसल को जल्द से जल्द घर पहुंचाना चाहते हैं। गांवों में स्थिति यह है कि थ्रेसर मशीनों की भारी मांग के चलते किसानों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में रात भर मशीनें चल रही हैं, ताकि बारिश शुरू होने से पहले कटाई का काम पूरा किया जा सके।
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बारिश की चेतावनी के बाद अब पूरा ध्यान गेहूं की निकासी पर है। रात-दिन एक कर रहे हैं, ताकि फसल सुरक्षित जगह पहुंच जाए। अगर बची-खुची फसल भी खराब हो गई तो साल भर खाने के लाले पड़ जाएंगे।
-मनमोहन, किसान, गांव झींगुरा
बारिश ने इस साल बहुत रुलाया है। गीला गेहूं निकालने में खर्च और मेहनत ज्यादा लग रही है, लेकिन फसल को बचाने का यही एक रास्ता है। थ्रेसर के लिए बड़ी मुश्किल से नंबर आ रहा है, इसलिए मजदूरों के साथ मिलकर जल्दी से जल्दी गेहूं की निकासी करा रहे हैं।
-कुंवरपाल, किसान गांव कटेलिया
मुख्य बिंदु:
अलर्ट : 4 और 5 अप्रैल को जिले में बारिश और ओलावृष्टि की संभावना
चुनौती : तेज हवा से भूसा उड़ने का खतरा, फिर भी थ्रेसरिंग जारी
संकट : गीली फसल और मशीनों की कमी से बढ़ रही है किसानों की परेशानी