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Hathras News: जन्मजात विकृति को हरा कर खिलखिलाया बचपन

Fri, 22 May 2026 02:22 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Fri, 22 May 2026 02:22 AM IST
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Childhood Blooms After Defeating a Congenital Defect
प्रतीकात्मक चित्र। - फोटो : Archive
जन्मजात शारीरिक विकृतियों से जूझ रहे बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम एक नई उम्मीद बनकर उभरी है। स्वास्थ्य विभाग के प्रयास और आरबीएसके टीम की जमीनी स्तर पर की जा रही खोज के चलते जिले के 25 बच्चों को नया जीवन मिला है। टीम न सिर्फ इन बच्चों को तलाश रही है, बल्कि उनका सफल इलाज कराकर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का कार्य भी कर रही है।
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में 14 टीम सक्रिय हैं। प्रत्येक ब्लाॅक में दो-दो टीमें लगी हुई हैं। एक टीम शहरी क्षेत्र में काम करती है। प्रत्येक टीम में दो चिकित्सक, एक नर्स व एक फार्मासिस्ट या ऑप्टोमेट्रिस्ट की तैनाती होती है। इस टीम का कार्य नवजात बच्चों में जन्मजात बीमारियों का पता लगाना होता है।
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इसके बाद संबंधित उपचार शुरू कराया जाता है। पिछले एक साल में विभिन्न बीमारियों के आरबीएसके की टीम ने 125 बच्चे चिह्नित किए हैं, जिनमें से 85 को इलाज मिल चुका है। शेष बच्चे उपचार के लिए या तो छोटे हैं या फिर उन्हें निर्धारित समय दिया गया है।
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जन्मजात विकृति के मिले 29 बच्चे

टीम ने वर्ष 2025-26 में शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में जन्मजात विकृतियों (जैसे कटे होंठ और तालु) से पीड़ित 29 बच्चे चिह्नित किए हैं। टीम ने विशेष प्रयास करते हुए 25 ऐसे बच्चों का सफल ऑपरेशन कराया है। शेष बच्चों के ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है, जिन्हें जल्द ही उपचार का लाभ मिलेगा।

जागरूकता और मुफ्त इलाज बना सहारा

महौ क्षेत्र की आरबीएसके टीम की नोडल अधिकारी डाॅ. ऋचा ने बताया कि कई बार ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी या आर्थिक तंगी के कारण माता-पिता इन विकृतियों को बच्चे की नियति मानकर बैठ जाते हैं। आरबीएसके की टीमें स्कूल, गांवों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर ऐसे बच्चों को चिह्नित करती हैं। गरीबी व मजदूरी के चलते कभी-कभी परिवार को समझाना मुश्किल हो जाता है।

केस-01

हाथरस जंक्शन के गांव केशोपुर के निवासी सुभाष के बेटे जयवीर सिंह का होठ जन्म से ही कटा हुआ था। महौ की आरबीएसके टीम ने बच्चे को चिह्नित किया। टीम ने बच्चे का ऑपरेशन शिड्यूल किया। आगरा के प्राइवेट अस्पताल में 25 अप्रैल को पांच माह की उम्र में बच्चे का सफल ऑपरेशन हुआ। बच्चे का चेहरा अब पूरी तरह ठीक है। सुभाष ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि निजी अस्पताल में दिखा सकते। बच्चे को देखकर पूरे परिवार के चेहरे पर मुस्कान रहती है।

केस-02

मेंडू रोड, सोखना के निकट स्थित सुखराम कॉलोनी के रहने वाले विष्णु की पत्नी ने पिछले साल बेटी को जन्म दिया था। बेटी का तालु कटा हुआ था। तालु में छेद होने के कारण दूध पीना भी मुश्किल हो रहा था। सोखना के आंगनबाड़ी केंद्र से बच्ची को ट्रेस किया और आरबीएसके की मदद से 30 अक्तूबर 2025 को 8.5 माह की उम्र में बच्ची का आगरा में सफल ऑपरेशन हुआ। अब बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है और आसानी से दूध व अन्य पेय पदार्थ पी सकती है। विष्णु ने बताया कि वह खाद्य पदार्थों का भी सेवन करती है।


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आरबीएसके के तहत होने वाले ये सभी ऑपरेशन पूरी तरह निशुल्क हैं। हमारा लक्ष्य जिले के हर उस बच्चे तक पहुंचना है, जो किसी भी तरह की जन्मजात विकृति से जूझ रहा है, ताकि कोई भी बच्चा इलाज से वंचित न रहे।

-डाॅ. राजीव गुप्ता, एसीएमओ हाथरस
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