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केमिकल से पके फलों को बेचना पड़ेगा महंगा

Sun, 19 Feb 2017 11:29 PM IST
अमर उजाला, हाथरस
अमर उजाला, हाथरस Updated Sun, 19 Feb 2017 11:29 PM IST
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Chemical ripe fruit will have to sell expensive
fruits and vegetables - फोटो : getty images
कम समय में ज्यादा मुनाफे के लिए फलों को केमिकल डालकर पकाया जा रहा है। सस्ते दर पर खरीदे कच्चे फलों को 12 से 24 घंटों में कृत्रिम रूप से पकाया जा रहा है। ये सेहत के बेहद खतरनाक हैं। इसको लेकर शासनस्तर से कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी हुए हैं। 
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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अपर आयुक्त (प्रशासन) राम अरज मौर्य ने एफडीए को जारी किए गए निर्देशों में कहा है कि कृत्रिम रूप से फलों को पकाने में निषिद्ध पदार्थ कैल्शियम कार्बाइड या एसिटीलन गैस का उपयोग किया जा रहा है।
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इनमें आर्सेनिक व फास्फोरस पदार्थों की उपस्थिति के कारण खतरनाक रोग उत्पन्न होते हैं, जो उपभोक्ता के स्वास्थ्य के लिए चुनौती हैं। इस संबंध में संसद, माननीय उच्चतम न्यायालय, उपभोक्ता कार्यकर्ता तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का ध्यान भी आकृष्ट हुआ है। पत्र में भोज्य पदार्थों में कैल्शियम कार्बाइड के प्रयोग को रोके जाने संबंधी प्रवर्तन कार्यवाही किए जाने के निर्देश एफडीए को दिए गए हैं। कार्यवाही के संबंध में मासिक रिपोर्ट भी मांगी गई है। 
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हो सकती हैं किडनी और लीवर से जुड़ी बीमारियां
सीएमओ डॉ. रामवीर सिंह की मानें तो कृत्रिम रूप से पके फलों को खाने से किड़नी, लीवर से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। गले में खराश, पेट की बीमारियों से भी लोग परेशान हो सकते हैं। कृत्रिम रूप से पके फलों की बजाय प्राकृतिक रूप से पके फलों का सेवन करना ही बेहतर रहता है। 

कानूनन रसायन से नहीं पकाए जा सकते फल 
कानूनन फलों को रसायन से पकाया नहीं जा सकता। प्रिवेंशन ऑफ फूड एडल्ट्रेशन एक्ट(पोफा) के सेक्शन 44 एए के तहत कैल्शियम कार्बाइड के उपयोग से फल पकाने की प्रक्रिया को प्रतिबंधित किया गया है। यदि इस एक्ट का उल्लंघन किया जाए तो उसे दंडनीय अपराध माना जाता है। 

इस तरह 12 से 24 घंटे में पकाते हैं फल 
पपीता-कैल्शियम कार्बाइड को पुड़िया में भरकर अखबार में लिपटे हरे पपीतों के बीच में रख दिया जाता है। हर दो तीन पपीतों के बीच एक पुड़िया रखी जाती है। 24 से 36 घंटो में पपीते पक जाते हैं। 
आम-     कच्चे आम पर केल्शियम कार्बाइड का छिड़काव कर दिया जाता है, जो 24 घंटे के अंदर फलों को पका देता है। साथ ही इसका रंग भी पक्के आम की तरह हो जाता है। 
केला- विशेष केमिकल का 100 मिलीलीटर भाग पानी के ड्रम में डाला जाता है। गुच्छे को 24 घंटे के लिए बर्फ की सिल्ली के नीचे  या एसी में रख दिया जाता है। 

चीकू- केमिकल वाले पानी में भिगो कर रातभर रखते हैं। सुबह तक यह पक जाते हैं।

कृत्रिम रूप से फलाें को पकाना प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध है। जिले में जहां कहीं भी सेहत के  लिए नुकसानदेह रसायनों से फलों को पकाया जा रहा है, वहां छापा मारकर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए फलों को पकाए जाने वाले स्थान भी चिन्हित करना शुरू कर दिए गए हैं। 
डॉ. श्वेता सैनी, अभिहित अधिकारी हाथरस/ प्रभारी अलीगढ़।  
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