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Hathras News: मंदिरों में जयकारे, वृद्धाश्रम में मां की सिसकियां

Mon, 19 Oct 2026 03:07 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2026 03:07 AM IST
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Chants of devotion in temples
वृद्ध आश्रम में बैठीं बुजुर्ग महिलाएंं। संवाद  - फोटो : samvad
शारदीय नवरात्र में मंदिरों में मां की पूजा-अर्चना हो रही है, वहीं वृद्धाश्रम में कई माताएं अपनों की बेरुखी से दुखी हैं। उन्हें आज भी इंतजार है कि उनके अपने आएंगे और घर ले जाएंगे। आगरा रोड स्थित नगला भुस के वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं ने अपनी आपबीती सुनाई तो आंखें नम हो गईं। संवाद
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केस-1
शादी के बाद बदल गए बेटे
- पति की मौत के बाद मेहनत-मजदूरी कर एक बेटी और दो बेटों को पाला। बड़ा बेटा हरिद्वार में इंजीनियर और छोटा दिल्ली में रहता है। आरोप है कि शादी के बाद दोनों बेटे परेशान करने लगे और अलग रहने लगे। पांच साल से वृद्धाश्रम में रह रही हैं। एक साल पहले कूल्हा टूटने पर भी बेटों ने सुध नहीं ली। आश्रम की वार्डन कुमारी कोमल ने रक्तदान कर ऑपरेशन कराया। - रमा देवी (76 वर्ष), निवासी सासनी।
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केस-2
पति के निधन के बाद तंग करने लगा बेटा
पति की मौत के बाद चार बेटियों और एक बेटे की शादी की। इसके बाद बेटे के साथ लखनऊ और हाथरस में रहीं। आरोप है कि बेटा शराब पीकर परेशान करता था। करीब डेढ़ महीने पहले वृद्धाश्रम आ गईं। बेटियां उन्हें अपने साथ रखना चाहती हैं, लेकिन वह उनके घर रहने के बजाय आश्रम में रहना उचित समझती हैं। - कैलाशी देवी (68 वर्ष), निवासी जलेसर।
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केस-3
खेत बेचकर बनवाए घर, दो साल शौचालय में गुजारे
बच्चों को पालने और उनके घर बनवाने में 10 बीघा खेत बिक गया। इसके बाद भी बेटों ने घर से निकाल दिया। वृद्धाश्रम आने से पहले पति के साथ दो साल गांव के सार्वजनिक शौचालय में गुजारे। अब आश्रम में रह रही हैं, लेकिन कोई बेटा हालचाल लेने नहीं आता। - रज्जो देवी (72 वर्ष), निवासी सादाबाद रोड।

वर्जन
- कई बुजुर्ग ऐसे हैं जिनके बेटे हैं, हम उन्हें फोन कर बताते हैं कि तुम्हारे मां बाप वृद्धाश्रम में हैं, लेकिन वह कह देते हैं कि हम क्या करें। हमारा इनके साथ कोई संबंध नहीं है। जिन बुजुर्गों का कोई नहीं है, उनके लिए हम बैठे हैं। उन्हें अपना मां-बाप समझकर उनकी सेवा करते हैं। - नीतू शर्मा, मैनेजर।
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