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Hathras News: 30 साल से अन देखी का शिकार चंदपा का पशु अस्पताल
Sat, 03 Oct 2026 02:19 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sat, 03 Oct 2026 02:19 AM IST
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जर्जर हालत में पशु अस्पताल की छत और परिसर में उगीं झाड़ियां। संवाद
- फोटो : Samvad
चंदपा। विकास खंड मुरसान के गांव चंदपा में बना राजकीय पशु अस्पताल पिछले 30 सालों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। बार-बार प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी अस्पताल की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका है। आलम यह है कि अस्पताल का आधे से अधिक हिस्सा ढह चुका है और बचा हुआ एकमात्र कमरा भी इतना जर्जर है कि उसमें बैठना खतरे से खाली नहीं है।
छत से गिरता है मलबा, डॉक्टर भी हो चुके हैं चोटिल
अस्पताल में तैनात डॉक्टर नरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि ड्यूटी के दौरान कई बार छत से प्लास्टर और मलबा टूटकर नीचे गिर चुका है, जिससे वे खुद भी चोटिल हो चुके हैं। गनीमत यह रही कि अब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। बारिश के दिनों में जर्जर कमरे में छत टपकने के साथ-साथ सांप और अन्य जहरीले जीव-जंतु घुस आते हैं। अस्पताल में डर के साए में बैठकर काम करना पड़ता है।
न बिजली की सुविधा, न बाउंड्रीवॉल
सालों पुराने इस पशु अस्पताल में आज तक बिजली का कनेक्शन नहीं लग सका है। बाउंड्रीवॉल (चारदीवारी) न होने के कारण आसपास के लोग परिसर में कचरा फेंक जाते हैं। डॉक्टर चौहान के अनुसार, उन्होंने अपने निजी खर्च से परिसर में पौधे लगवाए थे, जिन्हें बाउंड्री न होने की वजह से आवारा सांड और मवेशी नष्ट कर गए। अस्पताल परिसर की सफाई भी उन्हें अपने पैसों से करानी पड़ती है।
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जहरीले जीवों का डर, ग्रामीणों ने अस्पताल आना किया बंद
इस पशु चिकित्सा केंद्र से आसपास के कई गांव जुड़े हुए हैं। पहले ग्रामीण अपने पशुओं के इलाज के लिए यहां आते थे, लेकिन परिसर में उगी बड़ी-बड़ी घास, झाड़ियों और उसमें छिपे जहरीले कीड़ों के डर से अब ग्रामीणों ने अस्पताल आना बंद कर दिया है। मजबूरी में ग्रामीणों को इलाज के लिए डॉक्टर को अपने घर ही बुलाना पड़ता है।
अस्पताल की दुर्दशा और नए निर्माण को लेकर कई बार शासन-प्रशासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। हर वक्त हादसा होने का डर बना रहता है।
— डॉ. नरेंद्र सिंह चौहान, पशु चिकित्साधिकारी
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छत से गिरता है मलबा, डॉक्टर भी हो चुके हैं चोटिल
अस्पताल में तैनात डॉक्टर नरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि ड्यूटी के दौरान कई बार छत से प्लास्टर और मलबा टूटकर नीचे गिर चुका है, जिससे वे खुद भी चोटिल हो चुके हैं। गनीमत यह रही कि अब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। बारिश के दिनों में जर्जर कमरे में छत टपकने के साथ-साथ सांप और अन्य जहरीले जीव-जंतु घुस आते हैं। अस्पताल में डर के साए में बैठकर काम करना पड़ता है।
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न बिजली की सुविधा, न बाउंड्रीवॉल
सालों पुराने इस पशु अस्पताल में आज तक बिजली का कनेक्शन नहीं लग सका है। बाउंड्रीवॉल (चारदीवारी) न होने के कारण आसपास के लोग परिसर में कचरा फेंक जाते हैं। डॉक्टर चौहान के अनुसार, उन्होंने अपने निजी खर्च से परिसर में पौधे लगवाए थे, जिन्हें बाउंड्री न होने की वजह से आवारा सांड और मवेशी नष्ट कर गए। अस्पताल परिसर की सफाई भी उन्हें अपने पैसों से करानी पड़ती है।
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जहरीले जीवों का डर, ग्रामीणों ने अस्पताल आना किया बंद
इस पशु चिकित्सा केंद्र से आसपास के कई गांव जुड़े हुए हैं। पहले ग्रामीण अपने पशुओं के इलाज के लिए यहां आते थे, लेकिन परिसर में उगी बड़ी-बड़ी घास, झाड़ियों और उसमें छिपे जहरीले कीड़ों के डर से अब ग्रामीणों ने अस्पताल आना बंद कर दिया है। मजबूरी में ग्रामीणों को इलाज के लिए डॉक्टर को अपने घर ही बुलाना पड़ता है।
अस्पताल की दुर्दशा और नए निर्माण को लेकर कई बार शासन-प्रशासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। हर वक्त हादसा होने का डर बना रहता है।
— डॉ. नरेंद्र सिंह चौहान, पशु चिकित्साधिकारी