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छात्राओं का नामांकन जूनियर स्कूलों में कराने का आदेश निरस्त करें
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कलेक्ट्रेट पर ज्ञापन देते शिक्षक।
- फोटो : SADABAD
संवाद न्यूज एजेंसी, सादाबाद।
जिले के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों की शिक्षिकाओं ने बुधवार को मुख्यमंत्री के नाम कलेक्ट्रेट पर डीएम के स्टेनो को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में शिक्षिकाओं ने कहा है कि भारत सरकार की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत समग्र शिक्षा अभियान उप्र द्वारा जिले में संचालित छह कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। सभी उच्चाधिकारियों के निर्देश का पालन करते हुए शिक्षा से वंचित छात्राओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का काम कर रहे हैं, लेकिन उनका नवीनीकरण नहीं किया जा रहा।
ऐसी स्थिति में हम सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं। हम सभी लोग वर्ष 2005 से अब तक निरंतर सेवाएं देते हुए अपना व अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं, लेकिन अब ऐसी स्थिति में हम सभी कर्मी की आयु सीमा निकल जाने के कारण किसी भी अन्य सेवा में नहीं जा सकते हैं। योग्यता होते हुए भी बेरोजागरी का दंश झेलने को मजबूर हैं। हम सभी ने कोविड 19 में भी बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दी है, लेकिन अब राज्य परियोजना कार्यालय लखनऊ द्वारा बेसिक शिक्षा अधिकारी को छात्राओं का नामांकन जूनियर विद्यालयों में कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इन निर्देश को निरस्त करने की मांग ज्ञापन में की गई है। बताया गया कि भारत सरकार की नवीन शिक्षा नीति में भी मुख्य गौण विषय का कोई उल्लेख नहीं है। सभी विषयों को समान महत्व दिया गया है। मांग की गई 14 जुलाई 2020 के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए सभी शिक्षक और शिक्षिकाओं के साथ न्याय किया जाए। इस मौके पर तूलिका सक्सेना सहित काफी शिक्षिकाएं मौजूद थीं।
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जिले के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों की शिक्षिकाओं ने बुधवार को मुख्यमंत्री के नाम कलेक्ट्रेट पर डीएम के स्टेनो को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में शिक्षिकाओं ने कहा है कि भारत सरकार की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत समग्र शिक्षा अभियान उप्र द्वारा जिले में संचालित छह कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। सभी उच्चाधिकारियों के निर्देश का पालन करते हुए शिक्षा से वंचित छात्राओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का काम कर रहे हैं, लेकिन उनका नवीनीकरण नहीं किया जा रहा।
ऐसी स्थिति में हम सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं। हम सभी लोग वर्ष 2005 से अब तक निरंतर सेवाएं देते हुए अपना व अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं, लेकिन अब ऐसी स्थिति में हम सभी कर्मी की आयु सीमा निकल जाने के कारण किसी भी अन्य सेवा में नहीं जा सकते हैं। योग्यता होते हुए भी बेरोजागरी का दंश झेलने को मजबूर हैं। हम सभी ने कोविड 19 में भी बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दी है, लेकिन अब राज्य परियोजना कार्यालय लखनऊ द्वारा बेसिक शिक्षा अधिकारी को छात्राओं का नामांकन जूनियर विद्यालयों में कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इन निर्देश को निरस्त करने की मांग ज्ञापन में की गई है। बताया गया कि भारत सरकार की नवीन शिक्षा नीति में भी मुख्य गौण विषय का कोई उल्लेख नहीं है। सभी विषयों को समान महत्व दिया गया है। मांग की गई 14 जुलाई 2020 के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए सभी शिक्षक और शिक्षिकाओं के साथ न्याय किया जाए। इस मौके पर तूलिका सक्सेना सहित काफी शिक्षिकाएं मौजूद थीं।
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