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बसपा सुप्रीमो को गुमराह कर कराया निलंबन: रामवीर
Thu, 23 May 2019 12:05 AM IST
Mohd Rafeek
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
Published by: Mohd Rafeek
Updated Thu, 23 May 2019 12:05 AM IST
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पत्रकार वार्ता करते रामवीर उपाध्याय, साथ में मौजूद पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला
हाथरस। पूर्व ऊर्जा मंत्री व सादाबाद विधायक रामवीर उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि पार्टी के कुछ लोगों ने बसपा सुप्रीमो मायावती को गुमराह कर पार्टी से उनका निलंबन कराया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कहा है कि वह पूरे चुनाव में महागठबंधन प्रत्याशियों का ही समर्थन करते रहे और उन्होंने पार्टी को कहीं कोई धोखा नहीं दिया। दूसरे दल में जाने की बात पर उपाध्याय ने कहा कि वह जल्द ही प्रदेश भर में अपने समर्थकों के साथ बैठक करेंगे और उनकी राय जानने के बाद ही वह अगला कदम उठाएंगे। उपाध्याय ने निलंबन के बाद यह कहा कि वह अपने आप को बसपाई नहीं मान रहे, क्योंकि बहन जी ने उनका निलंबन करा दिया है और सचेतक पद से भी हटा दिया गया है। पार्टी से निलंबन के बाद लेबर कॉलोनी स्थित पार्क पर वह अपनी पत्नी व पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय के साथ मीडिया से रू-ब-रू हुए।
उपाध्याय ने कहा कि वर्ष 1996 में बसपा की सदस्यता लेने के बाद वह पार्टी की मजबूती के लिए सर्वसमाज विशेषकर ब्राह्मण समाज को पार्टी से जोड़ने के लिए कड़ी मेहनत करते रहे और लगातार जनसंपर्क करते रहे। वर्ष 2007 के चुनाव से पहले तो दो माह 60 दिन तक चुनाव प्रचार के चलते एक भी दिन अपने घर नहीं आए। प्रदेश के प्रत्येक जिले से ब्राह्मण समाज बसपा से जुड़ा और 2007 में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। उन्होंने यह भी कहा कि 2009 के बाद से बसपा का जनाधार लगातार खिसकने लगा। सवर्ण, पिछड़ा वर्ग, गैरजाटव दलित पार्टी से दूर जाने लगे थे। इससे उन्होंने बहन जी को लगातार अवगत भी कराया। वह चाहते थे कि यह वर्ग पार्टी से दूर नहीं जाए और पुन: पार्टी से जुड कर पार्टी मजबूत होकर पुरानी स्थिति में आए। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में भी गठबंधन के प्रत्याशियों के पक्ष में ही चुनाव प्रचार किया। हाथरस में चुनावी सभा भी कराई, इसलिए यह आरोप लगाना है कि उन्होंने पार्टी को धोखा दिया, पूरी तरह से गलत है। एक सवाल के जबाव में उपाध्याय ने कहा कि आगरा के भाजपा प्रत्याशी एसपी सिंह बघेल उन्हें एकाएक ही मिल गए थे।
उन्होंने उनसे जीत के लिए आशीर्वाद मांगा था तो उन्होंने ने आशीर्वाद दे दिया था। वैसे भी बघेल बसपा में काफी समय तक रहे हैं। इसी प्रकार अलीगढ़ भाजपा प्रत्याशी सतीश गौतम के समर्थन के बारे में उपाध्याय ने कहा कि वह कोई राजनीतिक मंच नहीं था। ब्राह्मण समाज का कार्यक्रम वहां हुआ था। उन्होंने कहा कि बहन मायावती की अलीगढ़ में रैली हुई, लेकिन उन्हें बुलाया नहीं गया। इसके बाद भी उन्होंने किसी भी राजनीतिक मंच से बसपा विरोधी किसी प्रत्याशी का कोई समर्थन नहीं किया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि बसपा सुप्रीमो मायावती को कुछ लोगों ने गुमराह किया है और इसकी वजह से उनका निलंबन हुआ है। उन्होंने इस बात को भी नकार दिया कि उनका भाजपा में कुछ नेताओं से संपर्क हो रहा है और वह जल्द ही भाजपा में जाने वाले है। उन्होंने कहा कि उनके भाजपा में जाने की बात दो साल से उड़ रही है, लेकिन किसी नेता ने उनसे संपर्क नहीं किया।
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सादाबाद विधायक ने कहा कि अब चूंकि बहन मायावती ने उन्हें पार्टी में सभी पदों से हटा दिया है, इसलिए वह खुद को बसपाई नहीं मान रहे। हालांकि पूछने पर उपाध्याय ने यह कहा कि वह सादाबाद से बसपा विधायक हैं। अपने अगले कदम के बारे में उपाध्याय ने कहा कि इस जिले के अलावा अलीगढ़, आगरा मंडल के साथ साथ उनके काफी समर्थक हैं, वह अपने समर्थकों के बीच में जाएंगे। तब अपने अगले राजनीतिक कदम के बारे में तय करेंगे। उन्होंने इस बात का भी कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया कि उन्हें अगर बसपा में फिर से कोई जिम्मेदारी सौंपी जाती है तो वह लेंगे या नहीं। इस बारे में उपाध्याय का कहना था कि उनका निलंबन बहन मायावती ने किया, यह सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात को भी नकार दिया कि सीमा उपाध्याय के लिए अलीगढ़ से बसपा से टिकट चाहते थे।
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उपाध्याय ने कहा कि वर्ष 1996 में बसपा की सदस्यता लेने के बाद वह पार्टी की मजबूती के लिए सर्वसमाज विशेषकर ब्राह्मण समाज को पार्टी से जोड़ने के लिए कड़ी मेहनत करते रहे और लगातार जनसंपर्क करते रहे। वर्ष 2007 के चुनाव से पहले तो दो माह 60 दिन तक चुनाव प्रचार के चलते एक भी दिन अपने घर नहीं आए। प्रदेश के प्रत्येक जिले से ब्राह्मण समाज बसपा से जुड़ा और 2007 में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। उन्होंने यह भी कहा कि 2009 के बाद से बसपा का जनाधार लगातार खिसकने लगा। सवर्ण, पिछड़ा वर्ग, गैरजाटव दलित पार्टी से दूर जाने लगे थे। इससे उन्होंने बहन जी को लगातार अवगत भी कराया। वह चाहते थे कि यह वर्ग पार्टी से दूर नहीं जाए और पुन: पार्टी से जुड कर पार्टी मजबूत होकर पुरानी स्थिति में आए। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में भी गठबंधन के प्रत्याशियों के पक्ष में ही चुनाव प्रचार किया। हाथरस में चुनावी सभा भी कराई, इसलिए यह आरोप लगाना है कि उन्होंने पार्टी को धोखा दिया, पूरी तरह से गलत है। एक सवाल के जबाव में उपाध्याय ने कहा कि आगरा के भाजपा प्रत्याशी एसपी सिंह बघेल उन्हें एकाएक ही मिल गए थे।
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उन्होंने उनसे जीत के लिए आशीर्वाद मांगा था तो उन्होंने ने आशीर्वाद दे दिया था। वैसे भी बघेल बसपा में काफी समय तक रहे हैं। इसी प्रकार अलीगढ़ भाजपा प्रत्याशी सतीश गौतम के समर्थन के बारे में उपाध्याय ने कहा कि वह कोई राजनीतिक मंच नहीं था। ब्राह्मण समाज का कार्यक्रम वहां हुआ था। उन्होंने कहा कि बहन मायावती की अलीगढ़ में रैली हुई, लेकिन उन्हें बुलाया नहीं गया। इसके बाद भी उन्होंने किसी भी राजनीतिक मंच से बसपा विरोधी किसी प्रत्याशी का कोई समर्थन नहीं किया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि बसपा सुप्रीमो मायावती को कुछ लोगों ने गुमराह किया है और इसकी वजह से उनका निलंबन हुआ है। उन्होंने इस बात को भी नकार दिया कि उनका भाजपा में कुछ नेताओं से संपर्क हो रहा है और वह जल्द ही भाजपा में जाने वाले है। उन्होंने कहा कि उनके भाजपा में जाने की बात दो साल से उड़ रही है, लेकिन किसी नेता ने उनसे संपर्क नहीं किया।
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सादाबाद विधायक ने कहा कि अब चूंकि बहन मायावती ने उन्हें पार्टी में सभी पदों से हटा दिया है, इसलिए वह खुद को बसपाई नहीं मान रहे। हालांकि पूछने पर उपाध्याय ने यह कहा कि वह सादाबाद से बसपा विधायक हैं। अपने अगले कदम के बारे में उपाध्याय ने कहा कि इस जिले के अलावा अलीगढ़, आगरा मंडल के साथ साथ उनके काफी समर्थक हैं, वह अपने समर्थकों के बीच में जाएंगे। तब अपने अगले राजनीतिक कदम के बारे में तय करेंगे। उन्होंने इस बात का भी कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया कि उन्हें अगर बसपा में फिर से कोई जिम्मेदारी सौंपी जाती है तो वह लेंगे या नहीं। इस बारे में उपाध्याय का कहना था कि उनका निलंबन बहन मायावती ने किया, यह सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात को भी नकार दिया कि सीमा उपाध्याय के लिए अलीगढ़ से बसपा से टिकट चाहते थे।