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ब्रजसंत गयाप्रसाद ने धारण कराया मुकट तो विदेशों बही कृष्ण भक्ति की बयार
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संत गयाप्रसाद ने धारण कराया मुकुट तो कमाया नाम
शहर में रामलीला कर रही मंडली के व्यास ने विदेशों में जाकर की श्रीकृष्ण के स्वरूप में लीला
गौरव भारद्वाज
हाथरस। संतों पर जिसकी कृपा हो जाए तो उसे सफलता निश्चित मिलती है। शहर में इन-दिनों रामलीला कर रही बरसाना की श्री गौरांग प्रेम रस माधुरी संस्थान मंडली के संचालक को बृज संत पं. गयाप्रसाद जी ने कृष्ण स्वरूप में मुकुट धारण कराया था। कृष्ण मुरारी ने भारत महोत्सव के तहत विदेशों में कृष्ण स्वरूप धारण कर भक्ति की अलख जगाई। अब वह खुद मंडली का संचालन कर रहे हैं।
बरसाना के कामा गांव के कृष्ण मुरारी शर्मा बाल्यकाल में श्रीराम शर्मा की मंडली में शामिल हो गए। गोवर्धन में बृज के संत पं.गयाप्रसाद जी ने कृष्ण मुरारी शर्मा को श्रीकृष्ण स्वरूप के लिए खुद अपने हाथों ने मुकुट धारण कराया। उन्होंने दस वर्ष की उम्र से करीब 22 वर्ष की आयु तक कृष्ण का रूप धारण किया।
भारत महोत्सव के तहत गए विदेश
हाथरस। कृष्ण मुरारी शर्मा का कहना है कि भारत महोत्सव के तहत वह अमेरिका, जापान, फ्रांस, न्यूयार्क, डबलम, जर्मनी, थाईलैंड में मंडली के साथ गए। उन्होंने विदेशों में कृष्ण का स्वरूप धारण कर कृष्ण भक्ति की बयार बहाई है। वह भारत के विभिन्न राज्यों में रामलीला और श्रीकृष्ण लीला का मंचन कर चुके हैं।
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उन्होंने बताया कि जब तक शादी न हो वह व्यक्ति का श्रीकृष्ण का स्वरूप धारण कर सकता है। ऐसी बृज की रासलीला मंडलियों में प्रथा है। शादी के बाद कोई व्यक्ति कृष्ण का स्वरूप धारण नहीं करता है।
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शहर में रामलीला कर रही मंडली के व्यास ने विदेशों में जाकर की श्रीकृष्ण के स्वरूप में लीला
गौरव भारद्वाज
हाथरस। संतों पर जिसकी कृपा हो जाए तो उसे सफलता निश्चित मिलती है। शहर में इन-दिनों रामलीला कर रही बरसाना की श्री गौरांग प्रेम रस माधुरी संस्थान मंडली के संचालक को बृज संत पं. गयाप्रसाद जी ने कृष्ण स्वरूप में मुकुट धारण कराया था। कृष्ण मुरारी ने भारत महोत्सव के तहत विदेशों में कृष्ण स्वरूप धारण कर भक्ति की अलख जगाई। अब वह खुद मंडली का संचालन कर रहे हैं।
बरसाना के कामा गांव के कृष्ण मुरारी शर्मा बाल्यकाल में श्रीराम शर्मा की मंडली में शामिल हो गए। गोवर्धन में बृज के संत पं.गयाप्रसाद जी ने कृष्ण मुरारी शर्मा को श्रीकृष्ण स्वरूप के लिए खुद अपने हाथों ने मुकुट धारण कराया। उन्होंने दस वर्ष की उम्र से करीब 22 वर्ष की आयु तक कृष्ण का रूप धारण किया।
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भारत महोत्सव के तहत गए विदेश
हाथरस। कृष्ण मुरारी शर्मा का कहना है कि भारत महोत्सव के तहत वह अमेरिका, जापान, फ्रांस, न्यूयार्क, डबलम, जर्मनी, थाईलैंड में मंडली के साथ गए। उन्होंने विदेशों में कृष्ण का स्वरूप धारण कर कृष्ण भक्ति की बयार बहाई है। वह भारत के विभिन्न राज्यों में रामलीला और श्रीकृष्ण लीला का मंचन कर चुके हैं।
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उन्होंने बताया कि जब तक शादी न हो वह व्यक्ति का श्रीकृष्ण का स्वरूप धारण कर सकता है। ऐसी बृज की रासलीला मंडलियों में प्रथा है। शादी के बाद कोई व्यक्ति कृष्ण का स्वरूप धारण नहीं करता है।