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Hathras News: आत्मनिर्भर बन तरक्की का ताला बना रहीं महिलाएं
Fri, 22 May 2026 02:23 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Fri, 22 May 2026 02:23 AM IST
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गांव बांधनू में ताला बनातीं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं। स्रोत : स्वयं
- फोटो : Self
सासनी क्षेत्र के गांव बांधनूं में महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। यहां की निवासी राखी ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर पहले खुद को आत्मनिर्भर बनाया। अब उनकी प्रेरणा से गांव की दूसरी महिलाएं भी घरों में मशीन लगाकर अलमारी के ताले बना रही हैं और उन्हें रोजगार मुहैया करा रही हैं।
उनकी इस पहल ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है, बल्कि गांव की कई महिलाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं।इस कार्य की शुरुआत राखी ने वर्ष 2020 में की थी। शुरुआत में सीमित स्तर पर शुरू हुआ यह काम आज गांव में एक छोटे कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है।
राखी ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से अन्य महिलाओं को भी इस कार्य से जोड़ा और उन्हें मशीनों के संचालन और ताले बनाने का प्रशिक्षण दिया। आज स्थिति यह है कि गांव की करीब 50 महिलाएं अपने-अपने घरों में मशीन लगाकर नियमित रूप से तालों का निर्माण कर रही हैं। घर से काम करने की सुविधा मिलने से महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी योगदान दे पा रही हैं।
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राखी बताती हैं कि घरों में मशीनें लगाए जाने से उत्पादन लागत कम आती है और महिलाएं अपनी सुविधा के अनुसार काम कर सकती हैं। तैयार किए गए ताले स्थानीय बाजारों के साथ-साथ अन्य शहरों में भी भेजे जाते हैं। इससे महिलाओं की आमदनी बढ़ रही है और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ रहा है।
समूह से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि पहले वे केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, लेकिन अब अपने हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भर बन रही हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ा है और समाज में उनकी पहचान मजबूत हुई है।
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उनकी इस पहल ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है, बल्कि गांव की कई महिलाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं।इस कार्य की शुरुआत राखी ने वर्ष 2020 में की थी। शुरुआत में सीमित स्तर पर शुरू हुआ यह काम आज गांव में एक छोटे कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है।
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राखी ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से अन्य महिलाओं को भी इस कार्य से जोड़ा और उन्हें मशीनों के संचालन और ताले बनाने का प्रशिक्षण दिया। आज स्थिति यह है कि गांव की करीब 50 महिलाएं अपने-अपने घरों में मशीन लगाकर नियमित रूप से तालों का निर्माण कर रही हैं। घर से काम करने की सुविधा मिलने से महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी योगदान दे पा रही हैं।
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राखी बताती हैं कि घरों में मशीनें लगाए जाने से उत्पादन लागत कम आती है और महिलाएं अपनी सुविधा के अनुसार काम कर सकती हैं। तैयार किए गए ताले स्थानीय बाजारों के साथ-साथ अन्य शहरों में भी भेजे जाते हैं। इससे महिलाओं की आमदनी बढ़ रही है और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ रहा है।
समूह से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि पहले वे केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, लेकिन अब अपने हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भर बन रही हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ा है और समाज में उनकी पहचान मजबूत हुई है।