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बैंकों ने बांटे साढ़े `300 करोड़ और आरबीआई से मिले सिर्फ 100 करोड़

Wed, 23 Nov 2016 11:22 PM IST
अमर उजाला, हाथरस
अमर उजाला, हाथरस Updated Wed, 23 Nov 2016 11:22 PM IST
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Banks disbursed a half from `300 crore and 100 crore, RBI
बैंक फुल
अखिलेश वार्ष्णेय
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नोट बंदी के दौर में बैंकों की मुसीबत भी कम नहीं है। जिले में कई बैंक शाखाओं में कैश खत्म होने की समस्या सामने आ रही है। इसकी वजह है कि लोग बहुतायात में नई करेंसी की निकासी तो कर रहे हैं, लेकिन उसको जमा करने में कोताही बरत रहे हैं।

गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद करेंसी एक्सचेंज में बैंकों ने अपने सड़े-गोल और बेहद पुराने छोटे नोट भी खपा दिए, फिर भी ग्राहकों की जरूरत पूरी नहीं कर सकीं। 
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अब तक जिलेभर की बैंक साढ़े 300 करोड़ से अधिक की धनराशि जिले में वितरण हो चुका है, जबकि आरबीआई से हाथरस के बैंकों को दो हजार के नए नोटों के रूप में लगभग 100 करोड़ की धनराशि ही मिल सकी है।
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एलडीएम एके सक्सेना ने बताया कि जमा और निकासी में बहुत बड़ा अंतर आ गया है। बैंकों से लोग करेंसी निकाल तो रहे हैं, लेकिन जमा करने से हाथ पीछे खींच रहे हैं। जिलेभर की बैंक शाखाओें से अब तक साढ़े 300 करोड़ से अधिक की धनरशि डिस्ट्रीब्यूट हो चुकी है।

जबकि आरबीआई से दो हजार के नए नोट के रूप में हाथरस जिले के बैंकों को सिर्फ 80 से सौ करोड़ की धनराशि ही मिल सकी है, जो कि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। एलडीएम ने बताया कि आरबीआई से सौ, पचास, बीस आदि के नोटों की खेप अभी तक हाथरस को प्राप्त नहीं हुई है।

इन नोटों के रूप में बैंकों के पास जो रकम पहले से ही मौजूद थी, उस रकम को बैंक ग्राहकों को बांटा जा चुका है। इधर, दो हजार के नए नोट, दस, बीस, पचास और सौ के नोट को जमा करने में लोग कोताही बरत रहे हैं। 

इस वजह से भी जिले की अधिकांश बैंक शाखाएं कैश की किल्लत से जूझ रही हैं। इससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। 

कैश की किल्लत प्राइवेट बैंकों के सामने अधिक आ रही है। प्राइवेट बैंक को कैश नहीं मिल पा रहा है, जिससे इन बैंकों के खाताधारक काफी परेशान हैं। लोग बैंक प्रशासन पर ही अपना गुस्सा उतार रहे हैं, जबकि हकीकत यही है कि प्राइवेट बैंक को बड़ी मुश्किल से कैश मिल पा रहा है। 


हाथरस। नियम है कि एक व्यक्ति एक हफ्ते में अपने खाते से 24 हजार रुपये निकाल सकता है, लेकिन कैश की किल्लत से जूझ रहीं बैंक उसे सिर्फ दो हजार से चार हजार रुपये ही पकड़ा रही हैं। ऐसे में लोगों की नोक-झोंक होना आम बात हो गई है। 
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