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काका के साथ मंच साझा किया था अटल जी ने
Tue, 25 Dec 2018 12:29 AM IST
Mohd Rafeek
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
Published by: Mohd Rafeek
Updated Tue, 25 Dec 2018 12:29 AM IST
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काका हाथरसी के साथ मंच साझा करते पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी।
- फोटो : अमर उजाला
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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हाथरस से गहरा नाता रहा है। राजनैतिक क ार्यक्रमों तो अटल कई बार आए। एक कवि सम्मेलन में 1994 में काका हाथरसी पुरस्कार समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसमें डॉ.राकेश शरद व भगवत शरण शर्मा को काका हाथरसी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
इस कार्यक्रम में अटल ने काका हाथरसी की खूब तारिफ की। समारोह में अटल से कविता की फरमाइश की जाने लगी। उन्होने एक नहीं तीन कतिवाएं प्रस्तुत की।
बेनकाब चेहरे हैं दाग बड़े गहरे हैं ःकवि सम्मेलन में अटल ने कविता प्रस्तुत की। -गीत नहीं गाता हूं, बेनकाब चेहरे हैं दाग बड़े गहरे हैं। टूटता तिलस्म आज सच से भय खाता हूं।- गीत नया गाता हूं टूटे हुए तारों में फूटे वांसती स्वर पत्थर की छाती पर उग आया नवं अंकुर।-झरे सब पीले पात, कोयल की कहुकरात, प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूं। गीत नया गाता हूं, गीत।
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इस कार्यक्रम में अटल ने काका हाथरसी की खूब तारिफ की। समारोह में अटल से कविता की फरमाइश की जाने लगी। उन्होने एक नहीं तीन कतिवाएं प्रस्तुत की।
बेनकाब चेहरे हैं दाग बड़े गहरे हैं ःकवि सम्मेलन में अटल ने कविता प्रस्तुत की। -गीत नहीं गाता हूं, बेनकाब चेहरे हैं दाग बड़े गहरे हैं। टूटता तिलस्म आज सच से भय खाता हूं।- गीत नया गाता हूं टूटे हुए तारों में फूटे वांसती स्वर पत्थर की छाती पर उग आया नवं अंकुर।-झरे सब पीले पात, कोयल की कहुकरात, प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूं। गीत नया गाता हूं, गीत।
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